भारतीय खानपान में रोटी हर घर की थाली का एक जरूरी हिस्सा मानी जाती है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले गेहूं के आटे से शरीर को मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट और सीमित मात्रा में प्रोटीन मिलता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी रोजाना की डाइट में प्रोटीन का इंटेक बढ़ाना चाहता है, तो उसे केवल अपने भोजन की शैली बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि वह अपनी सामान्य रोटियों के आटे में ही कुछ खास और पौष्टिक चीजें मिलाकर इसे हाई-प्रोटीन डाइट में बदल सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो शाकाहारी हैं और मांस-मछली का सेवन नहीं करते, यह तरीका रोजमर्रा के भोजन में प्रोटीन जोड़ने का एक बेहद आसान और व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता है।
गेहूं के आटे में मिलाएं भुना चना
अपनी रोजाना खाई जाने वाली रोटियों को ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए गेहूं के आटे में भुना हुआ चना या फिर चने का बेसन मिलाया जा सकता है। चना न केवल प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है, बल्कि इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है। आटे में चने का यह मिश्रण मिलाने से तैयार होने वाली रोटियां अधिक पौष्टिक बनती हैं और इन्हें खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। अगर आप पहली बार ऐसा कर रहे हैं, तो शुरुआत में गेहूं के आटे के साथ थोड़ी मात्रा में ही चने का आटा मिलाएं, ताकि इसका स्वाद और बनावट आपको आसानी से रास आ सके।
सोया आटा बढ़ाएगा प्रोटीन
यदि आपका मुख्य उद्देश्य डाइट में प्रोटीन की मात्रा को तेजी से ऊपर ले जाना है, तो गेहूं के साथ सोया आटा मिलाना एक असरदार कदम हो सकता है। सोयाबीन में उच्च गुणवत्ता वाला प्लांट-बेस्ड प्रोटीन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सोया आटा मिलाने से सामान्य गेहूं की तुलना में रोटी के स्वाद और टेक्सचर में बदलाव आ सकता है। इसलिए किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए इसे हमेशा सीमित मात्रा में ही गेहूं के साथ गूंथना बेहतर माना जाता है।
मूंग दाल और बीजों का विकल्प
चने और सोया के अलावा मूंग दाल को पीसकर तैयार किया गया आटा भी गेहूं के साथ आसानी से मिलाया जा सकता है। मूंग दाल शरीर को आवश्यक प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर भी प्रदान करती है। इस मिश्रण से बनी रोटियों का स्वाद भले ही थोड़ा अलग लगे, लेकिन अनाज और दाल का यह मेल रोज के भोजन को पोषण से भरपूर बना देता है। इसके अलावा, पोषण में विविधता लाने के लिए अलसी के बीज, कद्दू के बीज या तिल को मिक्सी में पीसकर बहुत कम मात्रा में आटे में शामिल किया जा सकता है। इनमें प्रोटीन के साथ-साथ हेल्दी फैट्स और कई अन्य मिनरल्स भी होते हैं। हालांकि, बीजों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे आटा भारी हो सकता है और रोटी को बेलते समय परेशानी आ सकती है।
मिलेट्स और जरूरी सावधानियां
गेहूं के साथ रागी, बाजरा या ज्वार जैसे मिलेट्स को मिलाकर मल्टीग्रेन आटा तैयार करना भी सेहत के लिए फायदेमंद है। ये अनाज शरीर को फाइबर और कई जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स देते हैं। हालांकि, सिर्फ मिलेट्स मिलाने से ही रोटी बहुत ज्यादा हाई-प्रोटीन नहीं हो जाती, इसलिए प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए दाल, चना या सोया जैसे विकल्पों का चुनाव करना ज्यादा फायदेमंद रहता है। आटे में एक साथ बहुत सारी चीजें मिलाने के बजाय 2 या 3 चीजों का ही चुनाव करें। अगर आपको किसी खास खाद्य वस्तु से एलर्जी है, तो उसे आटे में बिल्कुल न डालें। इसके अलावा, यदि आपको किडनी की कोई बीमारी है या डॉक्टर ने आपको किसी विशेष डाइट पर रखा है, तो ऐसी कोई भी नई चीज अपनी डाइट में शामिल करने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें।



















