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व्यस्त जीवनशैली से बढ़ रहा स्वास्थ्य संकट, डॉक्टर मान रहे हैं बीमारियों की नई लहरस्वास्थ्य
24 अग॰ 2026, 10:06 pm (64 दिन पहले)· 4

व्यस्त जीवनशैली से बढ़ रहा स्वास्थ्य संकट, डॉक्टर मान रहे हैं बीमारियों की नई लहर

काम की अधिकता और भागदौड़ भरी दिनचर्या के कारण लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसे चिकित्सा विशेषज्ञ गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बता रहे हैं.

आज के दौर में हर डॉक्टर के क्लिनिकल कक्ष में एक आम शिकायत बहुत आम हो गई है, जहां लोग अपनी खराब सेहत के लिए सीधे तौर पर समय की कमी को जिम्मेदार ठहराते हैं। लोगों का यह कहना कि वे अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहते हैं लेकिन अत्यधिक व्यस्तता के कारण ऐसा कर नहीं पाते, पहली नजर में पूरी तरह सही और व्यावहारिक प्रतीत होता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस आधुनिक जीवनशैली को उन तमाम गंभीर बीमारियों का मूल कारण मान रहे हैं जो समाज में आज तेजी से पांव पसार रही हैं।

प्राथमिकताओं का बदलता क्रम और अनदेखी

मूल समस्या यह नहीं है कि लोग जानबूझकर अपने शरीर को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। सच्चाई यह है कि काम के बढ़ते दबाव के बीच स्वास्थ्य से जुड़े जरूरी काम धीरे-धीरे सूची से पूरी तरह बाहर हो जाते हैं। लोग या तो सही समय पर भोजन करना छोड़ देते हैं या फिर उसकी भरपाई रेडी-टू-ईट जंक फूड से करने लगते हैं। इसके अलावा, काम का बकाया बोझ समेटने के चक्कर में नींद के घंटों में कटौती कर दी जाती है और शारीरिक व्यायाम को भविष्य के किसी अनिश्चित समय पर टाल दिया जाता है।

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शुरुआती दौर में की जाने वाली ये छोटी-छोटी लापरवाहियां बेहद मामूली महसूस होती हैं, लेकिन कुछ ही समय में यही हमारा दैनिक नियम बन जाती हैं। चिकित्सा जगत इस तरह की व्यस्त दिनचर्या को एक अदृश्य हत्यारा करार दे रहा है जो बिना किसी शुरुआती चेतावनी के इंसान को भीतर से कमजोर कर रहा है।

वक्त की कमी या प्राथमिकताओं की भूल

अधिकांश मामलों में असल दिक्कत समय का अभाव नहीं होती, बल्कि जीवन में सही और अनुशासित आदतों की गैरमौजूदगी होती है। दिन भर में महज 10 से 15 मिनट टहलना, वक्त पर खाना खाना और रात को 7 से 8 घंटे की भरपूर नींद लेना कोई असंभव कार्य नहीं है। इसके बावजूद, चूंकि इन सकारात्मक आदतों के परिणाम फौरन या जादुई रूप से सामने नहीं आते, इसलिए लोग इन्हें बहुत आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं।

इसके विपरीत, कार्यस्थल पर कोई काम समय पर पूरा करने पर तुरंत सराहना या परिणाम मिल जाता है, जिसके चलते इंसान अनजाने में ही अपनी शारीरिक सेहत का सौदा कर बैठता है। हमारा शरीर इस तरह की खराब जीवनशैली के प्रति बहुत धीमी गति से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है।

खामोशी से पनपती शारीरिक बीमारियां

रक्तचाप का धीरे-धीरे ऊपर जाना, ब्लड शुगर का अनियंत्रित होना और शरीर की चयापचय प्रक्रिया यानी मेटाबॉलिज्म का सुस्त पड़ना, ये सभी ऐसे बदलाव हैं जिनके शुरुआती चरण में कोई भी स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। जब तक बीमारियां खुलकर सामने आती हैं, तब तक शरीर के भीतर काफी हद तक नुकसान हो चुका होता है।

एक बड़ी गलतफहमी यह भी है कि यदि किसी व्यक्ति का कैलेंडर मीटिंग्स और कामों से भरा हुआ है, तो वह शारीरिक रूप से भी सक्रिय माना जाएगा। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है क्योंकि हमारी आधुनिक दिनचर्या अत्यधिक निष्क्रिय होती जा रही है।

निष्क्रिय दिनचर्या और शरीर पर असर

लोग दिन के 8 से 10 घंटे लगातार एक ही स्थान पर कुर्सी पर बैठकर स्क्रीन के सामने बिताते हैं। ऐसी स्थिति में सप्ताह में कभी-कभार की जाने वाली एक्सरसाइज भी पूरी तरह से बीमारियों के जोखिम से नहीं बचा सकती। शरीर में हलचल की कमी के कारण वह शर्करा और वसा को ठीक प्रकार से पचा नहीं पाता, जिससे मधुमेह, फैटी लिवर और हृदय रोगों की आशंका काफी बढ़ जाती है.

इस तेज रफ्तार दिनचर्या में सबसे पहले मानसिक शांति और नींद की बलि चढ़ती है। पर्याप्त नींद न मिलने के कारण शरीर के विभिन्न हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप बेवजह भूख का अहसास होता है और लगातार थकान बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर, लगातार बना रहने वाला कार्यस्थल का तनाव शरीर के भीतर कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है, जिसकी वजह से पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है।

एक खतरनाक और दुष्चक्र वाला सिलसिला

कम नींद मिलने से तनाव में इजाफा होता है, तनाव की वजह से खानपान की आदतें बिगड़ जाती हैं और यह बिगड़ा हुआ खानपान हमारे मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह तबाह कर देता है। काम की व्यस्तता का बहाना वर्तमान समय में भले ही संतोषजनक लगे, लेकिन इसके परिणाम बेहद घातक साबित होते हैं। यदि कोई व्यक्ति आज अपनी सेहत के लिए थोड़ा सा समय नहीं निकालेगा, तो आने वाले कल में बीमारियों के इलाज के लिए उसे मजबूरन समय निकालना ही पड़ेगा।

सवाल-जवाब

बिजी लाइफस्टाइल को साइलेंट किलर क्यों कहा जा रहा है?
क्योंकि इसके शुरुआती दौर में कोई लक्षण नजर नहीं आते और यह अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
खराब जीवनशैली से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
इससे ब्लड प्रेशर बढ़ना, ब्लड शुगर अनियंत्रित होना और मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ना जैसी समस्याएं होती हैं।
पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
पर्याप्त नींद न मिलने से हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, बेवजह भूख लगती है और थकान बनी रहती है।
लगातार एक जगह बैठकर काम करने से क्या खतरा बढ़ता है?
इससे शरीर शुगर और फैट को ठीक से नहीं पचा पाता, जिससे डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
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