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डेंगू मरीज को बकरी का दूध पिलाने से क्या सचमुच बढ़ते हैं प्लेटलेट्स, डॉक्टर चंचल शर्मा से जानिए मेडिकल साइंस और आयुर्वेद का सचस्वास्थ्य
20 अग॰ 2026, 8:00 am (1 घंटे पहले)· 3

डेंगू मरीज को बकरी का दूध पिलाने से क्या सचमुच बढ़ते हैं प्लेटलेट्स, डॉक्टर चंचल शर्मा से जानिए मेडिकल साइंस और आयुर्वेद का सच

डेंगू के दौरान बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ने का दावा कितना सही है? जानिए आयुर्वेद संहिता, वैज्ञानिक रिसर्च और डॉक्टरी सलाह के अनुसार इसकी पूरी सच्चाई।

मानसून के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने के कारण मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ जाता है। इन मच्छरों के काटने से फैलने वाला डेंगू बुखार मरीज के शरीर को तेजी से कमजोर कर देता है। डेंगू संक्रमण के दौरान मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरने लगती है, जिसे लेकर परिवार के लोग अक्सर घबरा जाते हैं। ऐसे समय में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए कई घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों का सहारा लिया जाता है। इनमें से सबसे ज्यादा प्रचलित नुस्खा बकरी का दूध पीने की सलाह है। कई लोगों का मानना है कि बकरी का दूध पीते ही प्लेटलेट काउंट तेजी से ऊपर चढ़ने लगता है। हालांकि, क्या इस दावे में वाकई कोई वैज्ञानिक या चिकित्सीय सच्चाई है, या यह केवल एक भ्रांति है? इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययनों और आयुर्वेदिक सिद्धांतों का गहराई से विश्लेषण करना बेहद जरूरी है।

वैज्ञानिक रिसर्च और अनपाश्चराइज्ड दूध के खतरे

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुए अध्ययनों से यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है कि बकरी के दूध का प्लेटलेट काउंट बढ़ाने से कोई सीधा संबंध नहीं है। किसी भी बड़े और प्रामाणिक मेडिकल शोध में यह सिद्ध नहीं हो पाया है कि बकरी का दूध पीने से मरीज की प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ती हैं। इसके विपरीत, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेंगू के मरीजों को कच्चा या बिना उबाला (अनपाश्चराइज्ड) बकरी का दूध पिलाने को लेकर सख्त चेतावनी देते हैं। यदि कोई मरीज बिना पाश्चराइज किया हुआ कच्चा दूध पीता है, तो उसे ब्रुसेलोसिस नाम का बेहद गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। यह संक्रमण ब्रूसेला मेलिटेंसिस नामक जीवाणु से फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू से जूझ रहे मरीज के शरीर में यदि ब्रुसेलोसिस का इंफेक्शन प्रवेश कर जाता है, तो उसकी स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है तथा उसके ठीक होने की प्रक्रिया में बड़ी बाधा उत्पन्न हो सकती है।

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चरक संहिता और आयुर्वेद का दृष्टिकोण

आयुर्वेद में बकरी के दूध का एक विशेष स्थान है और इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में बकरी के दूध को छाग पय के नाम से संबोधित किया गया है। आयुर्वेद के महान ग्रंथ चरक संहिता के चिकित्सास्थान के आठवें अध्याय, जिसे राजयक्ष्मा चिकित्सा कहा जाता है, में एक प्रसिद्ध श्लोक दर्ज है

छागं पयः स्यात् प्रथमं प्रयोगे गव्यं शृतं पञ्चगुणे जले वा।
सशर्करं माक्षिकसंप्रयुक्तं विदारीगन्धादिगणैः शृतं वा॥

इस श्लोक का स्पष्ट अर्थ है कि शरीर में रक्तपित्त यानी ब्लीडिंग संबंधी समस्याओं और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी या टीबी (राजयक्ष्मा) के इलाज में बकरी का दूध पहली पसंद होना चाहिए। यदि किसी कारणवश बकरी का दूध उपलब्ध न हो पाए, तो गाय के दूध में उससे पांच गुना अधिक पानी मिलाकर उसे तब तक अच्छी तरह उबालना चाहिए जब तक कि पूरा पानी भाप बनकर उड़ न जाए। इसके बाद उस दूध में मिश्री मिलाकर या फिर शरीर की ताकत बढ़ाने वाली विदारीगंधादि गण की जड़ी-बूटियों के साथ पकाकर मरीज को देना चाहिए। इससे मरीज के शरीर को ऊर्जा मिलती है और कमजोरी दूर होती है।

बकरी के दूध के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

भले ही बकरी का दूध प्लेटलेट्स बढ़ाने का कोई जादुई उपाय न हो, लेकिन पोषण के दृष्टिकोण से यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं

  • पाचन में आसान: बकरी के दूध में मौजूद फैट के कण गाय के दूध की तुलना में काफी छोटे आकार के होते हैं। इस वजह से यह पेट के लिए बहुत हल्का होता है और बेहद आसानी तथा तेजी से पच जाता है। पाचन तंत्र पर इसका दबाव नहीं पड़ता।
  • ब्लीडिंग और खांसी में राहत: यह दूध पुरानी खांसी, क्षय रोग यानी टीबी और शरीर के विभिन्न हिस्सों से ब्लीडिंग होने की समस्या में अत्यधिक आराम पहुंचाता है। गंभीर बीमारियों के कारण आई शारीरिक कमजोरी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह कार्य करता है।
  • इम्यूनिटी और ऊर्जा में बढ़ोतरी: इसमें जिंक, सेलेनियम और आवश्यक फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये सभी पोषक तत्व मिलकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं और मरीज को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
  • हड्डियों की मजबूती: बकरी का दूध कैल्शियम, मैग्नीशियम और फ़ॉस्फोरस का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। ये खनिज तत्व हड्डियों की डेंसिटी को बनाए रखने और उन्हें मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

विशेषज्ञ की सलाह और विवेकपूर्ण निर्णय

आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा स्पष्ट करती हैं कि बकरी के दूध में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों का अनूठा मिश्रण होता है। यह बीमार शरीर में खोई हुई ऊर्जा को वापस लौटाने, बुखार को शांत करने और खांसी जैसी बीमारियों को ठीक करने में बहुत असरदार सिद्ध होता है। हालांकि, केवल सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करके यह मान लेना कि इससे प्लेटलेट्स रातों-रात बढ़ जाएंगे, चिकित्सीय रूप से सही नहीं है। किसी भी बीमारी या लक्षण का उपचार करने से पहले उसकी उत्पत्ति और उसके सही कारणों को समझना आवश्यक है। मरीजों और उनके परिजनों को बिना डॉक्टर की सलाह के अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय अपने विवेक और चिकित्सीय मार्गदर्शन के आधार पर ही कोई कदम उठाना चाहिए।

सवाल-जवाब

क्या डेंगू में बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं?
नहीं, मेडिकल रिसर्च में यह साबित नहीं हुआ है कि बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट काउंट तेजी से बढ़ता है।
क्या कच्चा बकरी का दूध पीना सुरक्षित है?
कच्चा या अनपाश्चराइज्ड बकरी का दूध पीने से ब्रुसेलोसिस नाम का गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है, जो डेंगू मरीज के ठीक होने में रुकावट डालता है।
चरक संहिता में बकरी के दूध के क्या फायदे बताए गए हैं?
चरक संहिता के अनुसार, बकरी का दूध आसानी से पचता है और यह टीबी, अत्यधिक कमजोरी तथा रक्तपित्त (ब्लीडिंग समस्या) में टॉनिक का काम करता है।
अगर बकरी का दूध न मिले तो आयुर्वेद में क्या विकल्प दिया गया है?
चरक संहिता में बताया गया है कि गाय के दूध में पांच गुना पानी मिलाकर तब तक उबालें जब तक पानी सूख न जाए, फिर उसमें मिश्री या विदारीगंधादि गण की जड़ी-बूटियां मिलाकर दें।
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