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कैम्ब्रिज की कैंसर शोधकर्ता की चेतावनी, गर्दन पर परफ्यूम छिड़कना सेहत के लिए क्यों है खतरनाकस्वास्थ्य
31 जुल॰ 2026, 3:06 pm (43 दिन पहले)· 0

कैम्ब्रिज की कैंसर शोधकर्ता की चेतावनी, गर्दन पर परफ्यूम छिड़कना सेहत के लिए क्यों है खतरनाक

गर्दन पर सीधे परफ्यूम छिड़कना आपके खून और फेफड़ों को ऐसे जहरीले एंडोक्राइन डिसरप्टर्स के संपर्क में ला सकता है, जो बांझपन, कैंसर और हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं।

रोजाना सुबह तैयार होते समय गर्दन पर पसंदीदा परफ्यूम का छिड़काव करना अधिकांश लोगों की दिनचर्या का हिस्सा होता है। हालांकि, सौंदर्य और ताज़गी की यह आदत शरीर के लिए अनजाने में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर सकती है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग में पीएचडी शोधकर्ता और कैंसर अध्ययन से जुड़ी एना कैनादास ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने लोगों को अपनी गर्दन पर सीधे परफ्यूम छिड़कने से बचने की सख्त सलाह दी है, क्योंकि सुगंध के नाम पर कई तरह के हानिकारक रसायन शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं।

परफ्यूम के लेबल में छिपे खतरनाक केमिकल और एंडोक्राइन डिसरप्शन

अधिकांश परफ्यूम निर्माता अपने उत्पादों के लेबल पर केवल सुगंध या इत्र का उल्लेख करते हैं और उनमें इस्तेमाल होने वाले जटिल रासायनिक यौगिकों के विवरण को उजागर नहीं करते। शोधकर्ता के अनुसार, परफ्यूम में कई ऐसे तत्व शामिल होते हैं जो एंडोक्राइन डिसरप्टर के रूप में कार्य करते हैं। इनमें मुख्य रूप से फॉर्मेल्डिहाइड रिलीज करने वाले उत्पाद, थैलेट और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक शामिल हैं।

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एंडोक्राइन डिसरप्टर्स मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र यानी हार्मोनल सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। ये रसायन प्राकृतिक हार्मोनों की संरचना की नकल करते हैं या फिर हार्मोन ग्रंथियों के सुचारू कार्यप्रणाली को बाधित करते हैं। चिकित्सा अध्ययनों में इन रसायनों का दीर्घकालिक संपर्क बांझपन जैसी प्रजनन समस्याओं, सांस संबंधी विकारों और कई प्रकार के कैंसर के बढ़ते जोखिम से सीधे तौर पर जुड़ा पाया गया है।

गर्दन की त्वचा और सांस के जरिए हानिकारक अवशोषण

गर्दन का क्षेत्र परफ्यूम छिड़कने के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। शोधकर्ता ने शरीर में इन केमिकल्स के दाखिल होने के दो मुख्य मार्ग बताए हैं। पहला मार्ग त्वचा के माध्यम से अवशोषण का है। गर्दन के आसपास की त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी पतली और नाजुक होती है। इसके साथ ही, इस हिस्से में रक्त वाहिकाओं का घना जाल होता है और रक्त प्रवाह अत्यधिक तेज रहता है। जब परफ्यूम को सीधे गर्दन पर छिड़का जाता है, तो उसमें मौजूद रसायन पतली त्वचा को भेदकर गहराई तक पहुंचते हैं और सीधे खून में अवशोषित हो जाते हैं।

दूसरा प्रमुख मार्ग श्वसन प्रणाली से जुड़ा हुआ है। जब परफ्यूम को गर्दन और गले के पास स्प्रे किया जाता है, तो उसके बारीक कण एरोसोल बनकर हवा में तैरने लगते हैं। सांस लेते समय ये सूक्ष्म रासायनिक कण फेफड़ों और श्वसन मार्ग में चले जाते हैं। इससे न केवल फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, बल्कि त्वचा और आंतरिक अंगों दोनों को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहती है।

सावधानी और सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके

यद्यपि हर परफ्यूम का इस्तेमाल तुरंत किसी बीमारी का कारण नहीं बनता, फिर भी बिना सोचे-समझे सालों तक रोजाना त्वचा पर तेज रसायनों का उपयोग करना दीर्घकालिक रूप से जोखिम भरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुगंधित उत्पादों का चयन करते समय उनके घटकों के प्रति जागरूकता जरूरी है। अपनी त्वचा, विशेषकर गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों को जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क से बचाना सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

सवाल-जवाब

गर्दन पर परफ्यूम छिड़कना क्यों हानिकारक माना जाता है?
गर्दन की त्वचा काफी पतली होती है और वहां रक्त प्रवाह तेज होता है, जिससे रसायन सीधे खून में तेजी से अवशोषित होते हैं। साथ ही छिड़काव के दौरान एरोसोल कण सांस के साथ फेफड़ों में चले जाते हैं।
परफ्यूम में कौन से मुख्य हानिकारक रसायन पाए जाते हैं?
परफ्यूम में थैलेट, फॉर्मेल्डिहाइड-रिलीज करने वाले यौगिक और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक जैसे एंडोक्राइन डिसरप्टर्स पाए जाते हैं।
एंडोक्राइन डिसरप्टर्स शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?
ये रसायन शरीर के प्राकृतिक हार्मोनों की नकल करते हैं या उन्हें रोकते हैं, जिससे बांझपन, सांस की समस्याएं और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
गर्दन पर परफ्यूम न लगाने की चेतावनी किसने दी है?
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग में पीएचडी शोधकर्ता और कैंसर अध्ययन से जुड़ी एना कैनादास ने इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए यह चेतावनी दी है।
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