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कमजोर पाचन और गैस की समस्या दूर करने के लिए डिंपल जांगड़ा ने बताए चार खास आहार उपायस्वास्थ्य
24 अग॰ 2026, 12:45 pm (19 दिन पहले)· 3

कमजोर पाचन और गैस की समस्या दूर करने के लिए डिंपल जांगड़ा ने बताए चार खास आहार उपाय

कमजोर पाचन और संवेदनशील आंतों से जूझ रहे लोगों के लिए सही आहार चुनना बेहद जरूरी है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डिंपल जांगड़ा के अनुसार A2 दूध, पेपरमिंट, बेल और चावल का पानी पाचन को दुरुस्त करने में मदद करते हैं।

अगर आपको बार-बार ब्लोटिंग, गैस, अपच या कब्ज की शिकायत रहती है, तो यह कमजोर या अत्यधिक संवेदनशील पाचन तंत्र का संकेत हो सकता है। संवेदनशील आंतों वाले लोगों को कुछ भी सामान्य खाना खाने के बाद पेट में ऐंठन और असुविधा होने लगती है। ऐसे में सही आहार का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। आयुर्वेदिक हेल्थ कोच डिंपल जांगड़ा ने कुछ ऐसे विशेष खाद्य पदार्थों की सलाह दी है जो आंतों को मजबूती प्रदान करते हैं और पेट की पुरानी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं।

दूध और दही के बेहतर विकल्प से बढ़ाएं आंतों की ताकत

संवेदनशील पेट वाले लोगों को सामान्य दूध की जगह A2 दूध का चयन करना चाहिए। A2 दूध देसी गायों से प्राप्त होता है और इसमें केवल A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन होता है, जो साधारण दूध की तुलना में पचने में बहुत हल्का और सुपाच्य होता है। जो लोग डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं करते या वीगन जीवनशैली अपनाते हैं, वे काजू के दही का उपयोग कर सकते हैं। काजू और शुद्ध देसी घी दोनों में ब्यूटायरिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह एसिड कोलन यानी बड़ी आंत की अंदरूनी दीवारों की कोशिकाओं को आवश्यक पोषण देता है, जिससे आंतों का सुरक्षा घेरा या गट बैरियर मजबूत होता है।

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पेपरमिंट से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में राहत

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या का सामना कर रहे लोगों के लिए पेपरमिंट एक असरदार प्राकृतिक उपाय है। इसमें मौजूद मेंथोल तत्व पेट और आंतों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, जिससे ऐंठन और दर्द से राहत मिलती है। पेपरमिंट का सही लाभ उठाने के लिए एंटरिक-कोटेड पेपरमिंट कैप्सूल का इस्तेमाल करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह कैप्सूल पेट में घुलने के बजाय सीधे आंतों में जाकर असर दिखाता है, जिससे पाचन तंत्र को तुरंत राहत मिलती है।

बेल और एलोवेरा से शांत होगी पेट की जलन

आयुर्वेद में बेल को आंतों और पेट के विकारों के लिए सबसे उत्तम औषधि माना गया है। यह आंतों की आंतरिक सूजन को कम करता है और संपूर्ण पाचन क्रिया को सुचारू बनाता है। यदि बेल आसानी से उपलब्ध न हो, तो प्रतिदिन 20 एमएल ताजा एलोवेरा जूस पीना एक बेहतरीन विकल्प है। एलोवेरा जूस शरीर में बढ़े हुए पित्त को शांत करता है और पेट की संवेदनशील अंदरूनी परत को ठंडक पहुंचाकर आराम देता है।

कांजी यानी फर्मेंटेड चावल का पानी

पारंपरिक कांजी पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने का एक और कारगर घरेलू उपाय है। इसे बनाने के लिए चावल पकाते समय निकाले गए मांड या पानी में थोड़ा सा घी और नमक मिलाया जाता है। यह फर्मेंटेड मिश्रण लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया का एक समृद्ध स्रोत है। ये मित्र बैक्टीरिया आंतों के माइक्रोबायोम को संतुलित करते हैं, पाचन क्षमता में सुधार लाते हैं और कोलन को शांत तथा स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।

सवाल-जवाब

संवेदनशील आंत या गट के मुख्य लक्षण क्या हैं?
बार-बार पेट में गैस बनना, ब्लोटिंग होना, अपच और कब्ज होना संवेदनशील पाचन तंत्र के मुख्य लक्षण हैं।
A2 दूध साधारण दूध से कैसे अलग है?
A2 दूध में केवल A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन होता है, जिससे यह साधारण दूध की तुलना में पेट के लिए हल्का और पचाने में बहुत आसान होता है।
काजू का दही और घी आंतों के लिए क्यों फायदेमंद हैं?
काजू और घी दोनों में ब्यूटायरिक एसिड होता है, जो आंतों की अंदरूनी परत की कोशिकाओं को पोषण देता है और गट बैरियर को मजबूत करता है।
पेपरमिंट इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में कैसे काम करता है?
पेपरमिंट में मौजूद मेंथोल पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और आंतों की ऐंठन व दर्द को कम करता है।
कांजी या फर्मेंटेड चावल का पानी कैसे बनाया जाता है?
चावल पकाते समय निकले पानी को छानकर उसमें थोड़ा घी और नमक मिलाकर कांजी बनाई जाती है, जिससे लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं।
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