महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई की है। नियामक संस्था ने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स की अत्यधिक लोकप्रिय एसिडिटी और सीने की जलन दूर करने वाली दवा एसीलॉक की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। विभाग का कहना है कि कंपनी द्वारा दवाओं के नामकरण और ब्रांडिंग में ऐसी समानताएं रखी गई हैं जिससे मरीजों और डॉक्टरों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इस व्यापक कार्रवाई के तहत पूरे राज्य में लगभग 2.45 करोड़ रुपये मूल्य की दवाओं का स्टॉक जब्त कर लिया गया है।
पुणे, नागपुर और भिवंडी में छापेमार कार्रवाई और जब्ती
इस पूरे मामले में FDA के अधिकारियों ने बड़ी सतर्कता से कार्रवाई की है। 9 और 10 जुलाई को विभाग के विशेष जांच दलों ने पुणे, नागपुर और ठाणे जिले के भिवंडी में स्थित विभिन्न गोदामों पर छापेमारी की। इस सघन अभियान के दौरान अधिकारियों ने कुल 2,45,37,490 रुपये मूल्य का दवा स्टॉक जब्त किया। यह कार्रवाई मुख्य रूप से एसीलॉक 150, एसीलॉक 150 प्लस, एसीलॉक 300 और एसीलॉक 300 प्लस नामक दवाओं पर की गई है। इन दवाओं में पेट के अल्सर और अत्यधिक एसिड को नियंत्रित करने वाले सक्रिय औषधीय घटक (API) रैनिटिडीन और फैमोटिडीन का इस्तेमाल किया जाता है।
ब्रांड के नामों में समानता से पैदा हुआ गंभीर भ्रम
इस नियामकीय कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजह दवाओं के नाम में किया गया अनधिकृत बदलाव है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, कैडिला फार्मास्यूटिकल्स के पास शुरुआत में केवल रैनिटिडीन आधारित एसीलॉक 150 और एसीलॉक 300 दवाओं के निर्माण की ही मंजूरी थी। लेकिन बाद में कंपनी ने नियमों को दरकिनार करते हुए फैमोटिडीन आधारित एसीलॉक 150 प्लस और एसीलॉक 300 प्लस नामक दवाएं भी बाजार में उतार दीं। इन नई दवाओं की ब्रांडिंग और पैकिंग को पुरानी दवाओं जैसा ही रखा गया, जिससे मेडिकल स्टोर संचालकों और आम खरीदारों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो गया कि वे कौन सी रासायनिक संरचना वाली दवा खरीद रहे हैं।
दवाएं वापस मंगाने के निर्देश और कानूनी कार्रवाई की तैयारी
जनस्वास्थ्य के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि दवाओं के ब्रांड नाम में किसी भी प्रकार की समानता जो किसी डॉक्टर, फार्मासिस्ट या मरीज को भ्रमित कर सकती है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह सीधे तौर पर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने कैडिला को निर्देश दिया है कि वह बाजार से इन सभी विवादित दवाओं के स्टॉक को तुरंत वापस बुलाए। इसके साथ ही एसीलॉक 150 प्लस और एसीलॉक 300 प्लस की बिक्री को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिलहाल इस मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।











