दैनिक जीवन की भागदौड़ में उलझकर लोग अक्सर मानसिक थकान को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका सीधा असर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में होने वाली हल्की घबराहट शरीर के लिए नुकसानदेह नहीं होती, पर जब चिंता हफ्तों या महीनों तक लगातार बनी रहे तो यह अंदरूनी अंगों के लिए घातक साबित हो सकती है। पंजाब में कार्यरत होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर, आहार विशेषज्ञ और हॉलिस्टिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर कोमल भंगू ग्रेवाल के अनुसार, लंबे समय का तनाव शरीर में निरंतर सूजन पैदा करता है, जिससे आगे चलकर स्ट्रोक और हृदय विफलता की संभावना तेजी से बढ़ जाती है।
कार्डियोवैस्कुलर प्रणाली पर खिंचाव का जैविक असर
जब भी कोई व्यक्ति अत्यधिक मानसिक दबाव महसूस करता है, तो मस्तिष्क तुरंत एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स का स्राव तेज कर देता है। इन केमिकल्स के अचानक बढ़ने से नाड़ी की गति और रक्त का संचार असामान्य रूप से तेज हो जाता है। तात्कालिक रूप से यह शरीर की रक्षा प्रणाली का हिस्सा है, मगर जब यह दबाव स्थायी हो जाता है तो रक्त वाहिकाओं की आंतरिक परतें क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। लगातार जारी यह खिंचाव धमनियों में सूजन लाने के साथ-साथ लिपिड प्रोफाइल और कोलेस्ट्रॉल के संतुलन को भी पूरी तरह बिगाड़ देता है, जिससे समय बीतने पर धमनियों में रुकावट आने लगती है।
पहचानें शरीर में नजर आने वाले चेतावनी भरे लक्षण
मानसिक परेशानी जब शारीरिक रूप लेने लगती है, तो सीने के हिस्से में जकड़न अथवा धीमा दर्द उभर सकता है। कई लोग ऐसे दौर में गहरी सांस खींचने में असमर्थता महसूस करते हैं या उन्हें घबराहट के दौरे पड़ने लगते हैं। इसके अलावा नींद का अचानक टूट जाना, लगातार चिड़चिड़ापन रहना और बिना किसी भारी काम के भी थकावट का अनुभव होना इसके स्पष्ट संकेत हैं। यदि इन लक्षणों को लंबे समय तक बिना उपचार के छोड़ दिया जाए, तो यह दिल की मांसपेशियों को स्थायी रूप से कमजोर कर सकता है।
दैनिक आदतों से तनाव पर काबू पाने के व्यावहारिक कदम
दिल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जीवनशैली में कुछ बुनियादी बदलाव करना बेहद जरूरी है
- नियमित पैदल चलना: हर दिन कम से कम 30 मिनट तक तेज कदमों से टहलने की आदत बनाएं। नियमित सैर से रक्त में मौजूद तनाव पैदा करने वाले तत्वों का स्तर घटता है और कार्डियक क्षमता मजबूत होती है। इसके साथ प्राणायाम, ध्यान या कुछ पलों का धीमा श्वसन अभ्यास नर्वस सिस्टम को शांत करके रक्तचाप को स्थिर रखता है।
- पर्याप्त और गहरी नींद: मानसिक तनाव से ऊतकों को उबारने के लिए नींद सबसे अचूक प्राकृतिक उपाय है। हर वयस्क को रात के समय करीब सात से आठ घंटे की निर्बाध नींद लेने का पक्का नियम बनाना चाहिए।
- पौष्टिक खानपान का चयन: अपने दैनिक भोजन में ताजे मौसमी फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और ओमेगा-3 फैटी एसिड देने वाले पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं। दूसरी ओर, अत्यधिक कैफीन, मीठे पेय पदार्थ, पैकेज्ड उत्पाद और तले-भुने जंक फूड से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
- विशेषज्ञ परामर्श: अगर तमाम घरेलू प्रयासों के बाद भी बेचैनी कम न हो रही हो, तो किसी योग्य चिकित्सक अथवा मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता से सलाह लेना ही सबसे उचित कदम है।



















