नया जूता पसंद आने पर अक्सर लोग यह मानकर समझौता कर लेते हैं कि चंद दिनों में इसका चमड़ा या कपड़ा ढीला पड़ जाएगा और यह अपने आप फिट बैठने लगेगा। बाजार में फुटवियर चुनते समय अधिकांश ग्राहकों का ध्यान सिर्फ बाहरी डिजाइन, आकर्षक रंग और दाम पर ही टिका रहता है, जबकि पंजों के वास्तविक फैलाव और आराम की उपेक्षा हो जाती है। यह आम आदत आगे चलकर पैरों की सेहत के लिए गंभीर संकट खड़ी कर सकती है। जब कोई संकरा या छोटे नाप का जूता लगातार पहना जाता है, तो वह पंजों की हड्डियों और त्वचा पर निरंतर अनावश्यक दबाव बनाता है, जिससे पूरे शरीर की चाल और मुद्रा पर नकारात्मक असर पड़ता है। केवल चपटे या संकरे जूते ही नहीं, बल्कि ऊंची एड़ी वाले फुटवियर के उपयोग में भी ऐसा ही असंतुलन देखने को मिलता है।
छोटे और संकरे जूतों से होने वाले शारीरिक नुकसान
जब किसी जूते की लंबाई पैर से छोटी होती है या उसका अगला हिस्सा पंजों के मुकाबले अत्यधिक तंग होता है, तो उंगलियों को स्वाभाविक रूप से फैलने की जगह नहीं मिल पाती। इस लगातार दबाव और घर्षण की वजह से त्वचा में सूजन, तेज दर्द, छाले, कॉर्न और त्वचा के कड़े होने जैसी दिक्कतें जन्म लेने लगती हैं। विशेष रूप से आगे से नुकीले या बेहद पतले डिजाइन वाले जूतों में यह परेशानी बहुत जल्दी उभरती है। पंजों की उंगलियां जब आपस में घिसटती हैं, तो पैरों के ऊपरी और निचले हिस्सों में भारी खिंचाव महसूस होने लगता है, जिससे सामान्य रूप से जमीन पर कदम रखना भी कष्टदायक बन जाता है।
अक्सर खरीदारी के दौरान लोग सिर्फ यह जांचते हैं कि उनका पैर जूते के भीतर चला गया या नहीं। लेकिन सही फिटिंग की परिभाषा केवल पैर का जूते में समा जाना भर नहीं है। जूते की लंबाई जितनी महत्वपूर्ण है, उसकी चौड़ाई भी उतनी ही जरूरी होती है। यदि जूते के अंदर उंगलियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ रही हों या उन्हें स्वतंत्र रूप से हिलाना मुमकिन न हो, तो ऐसा फुटवियर भविष्य के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्यप्रद नहीं माना जा सकता।
संतुलन और चाल में उंगलियों का स्वाभाविक महत्व
चलते, दौड़ते या सीधे खड़े रहते समय पैर की उंगलियां पूरे शरीर का वजन जमीन पर संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में अगर कोई जूता उंगलियों को जकड़कर उनकी प्राकृतिक मुद्रा को बाधित करता है, तो शरीर का गुरुत्व केंद्र डगमगाने लगता है। जूते के अगले हिस्से यानी टो बॉक्स में इतनी खाली जगह हमेशा उपलब्ध होनी चाहिए कि उंगलियां बिना किसी दबाव के स्वाभाविक स्थिति में रह सकें। इसी वजह से दुकान में नया जूता आजमाते समय चंद कदम चलकर देखना बेहद मददगार साबित होता है। अगर पहली बार पहनते ही पैर में कोई चुभन, खिंचाव या घिसाव महसूस हो, तो इस उम्मीद में उसे कभी नहीं खरीदना चाहिए कि इस्तेमाल के बाद वह अपने आप फैल जाएगा।
हाई हील्स और घुटनों के जोड़ों पर पड़ता भार
पैरों की समस्या केवल चपटे या छोटे जूतों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊंची हील्स का चुनाव भी शरीर के बायोमैकेनिक्स को पूरी तरह बदल देता है। जब एड़ी को जमीन से बहुत ऊपर उठा दिया जाता है, तो शरीर का अधिकांश भार पंजों और उंगलियों के अग्रभाग पर स्थानांतरित हो जाता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों में हाई हील्स के नियमित इस्तेमाल को पैरों की बनावट में विकृति, मस्कुलोस्केलेटल दर्द और गंभीर चोटों के बढ़ते जोखिम से सीधे तौर पर जोड़ा गया है। इसके अलावा एक मेटा-एनालिसिस में यह भी स्पष्ट रूप से पाया गया है कि ऊंची हील पहनकर चलने से घुटनों के जोड़ों पर पड़ने वाला लोड और मोमेंट काफी बढ़ जाता है।
हालांकि इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि कभी-कभार किसी विशेष आयोजन पर हील पहनने से हर व्यक्ति तुरंत बीमार पड़ जाएगा। असली जोखिम तब उत्पन्न होता है जब बहुत ज्यादा ऊंची हील्स को दैनिक जीवन में बार-बार और लंबे समय तक पहना जाए। इसके साथ ही केवल हील की ऊंचाई ही नहीं, बल्कि जूते की आंतरिक बनावट भी अहम होती है। यदि हील वाली सैंडल या जूते में पैर आगे की तरफ फिसल रहा हो और सारी उंगलियां आगे जाकर दब रही हों, तो यह घुटनों और रीढ़ की हड्डी पर असहज तनाव पैदा करता है।
कदमों की सहजता प्रभावित होने पर बरतें सावधानी
मानव पैर शरीर के कुल वजन को जमीन पर सही ढंग से बांटने और हर कदम पर संतुलन बनाए रखने का जटिल काम करते हैं। जूते की अनुचित बनावट और त्रुटिपूर्ण माप पैरों के इस प्राकृतिक काम में बाधा डालते हैं। इसी कारण लंबे समय तक गलत साइज का जूता पहनने से पूरे पैर, टखनों और पिंडलियों में दर्द या सुन्नता रहने लगती है। यदि नया या पुराना फुटवियर पहनने के कुछ ही मिनटों बाद पंजों में दर्द, जलन, अत्यधिक दबाव या त्वचा छिलने का अहसास हो, तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जब भी किसी जूते से बार-बार परेशानी हो, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए और आवश्यकता महसूस होने पर हड्डी या पैर रोग विशेषज्ञ से चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
जूते खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है
नया फुटवियर खरीदते समय हमेशा दोनों पैरों में जूते पहनकर जांचना समझदारी भरा कदम है, क्योंकि अक्सर दोनों पैरों के नाप में थोड़ा अंतर हो सकता है। जूते पहनकर खड़े होना और कुछ कदम चलना आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पंजों को पर्याप्त जगह मिल रही है और एड़ी जूते के भीतर बिना फिसले स्थिर बनी हुई है। जूते का अगला घेरा बहुत संकरा नहीं होना चाहिए और चलते समय पैर की एड़ी बार-बार बाहर नहीं निकलनी चाहिए। दैनिक उपयोग में आने वाले जूतों में दिखावे से ज्यादा शारीरिक आराम को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।



















