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मानसून में अस्थमा का खतरा: सांस की तकलीफ से बचने के लिए विशेषज्ञ ने दी ये अहम सलाहस्वास्थ्य
9 जुल॰ 2026, 7:52 am (20 दिन पहले)· 3

मानसून में अस्थमा का खतरा: सांस की तकलीफ से बचने के लिए विशेषज्ञ ने दी ये अहम सलाह

मानसून के दौरान नमी और बढ़ते संक्रमण के कारण अस्थमा के मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। डॉक्टर भुमेश त्यागी ने इस मौसम में लक्षणों को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया है।

बरसात का मौसम तपती गर्मी से राहत जरूर लेकर आता है, लेकिन नमी और वातावरण में फैली ठंडक कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देती है। अस्थमा के मरीजों के लिए यह समय विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। नमी के कारण पनपने वाली फफूंद और हवा में मौजूद वायरल संक्रमण अस्थमा के लक्षणों को तेजी से ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। इस दौरान स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें और किन बातों से परहेज करें, इस पर शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर भुमेश त्यागी ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

मानसून के दौरान अस्थमा मरीजों के लिए खास सावधानियां

घर के भीतर सुरक्षित रहें: इस मौसम में जितना संभव हो, अपने घर के अंदर ही रहना चाहिए। बारिश, तेज हवाओं और आंधी के दौरान बाहर जाने से बचें, क्योंकि यह स्थिति अस्थमा के लक्षणों को बिगाड़ सकती है। यदि आप घर के अंदर एयर कंडीशनर यानी एसी का उपयोग करते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि उसकी ठंडी हवा सीधे आपके चेहरे या शरीर पर न पड़े। हवा के सीधे संपर्क में आने से श्वसन तंत्र में परेशानी महसूस हो सकती है।

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मास्क का प्रयोग करें: घर से बाहर निकलते समय हमेशा मास्क का उपयोग करें। यह आपको धूल के कणों, पराग, एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों और फफूंद के सूक्ष्म बीजाणुओं के सीधे संपर्क में आने से बचाता है। मानसून में ये चीजें वातावरण में अधिक सक्रिय हो जाती हैं, इसलिए मास्क एक जरूरी सुरक्षा कवच का काम करता है।

घर को नमी मुक्त और स्वच्छ रखें: अपने रहने की जगह को सूखा और फफूंद से मुक्त रखना अत्यंत आवश्यक है। घर की दीवारों, कोनों और दरवाजों पर लगातार नजर रखें। यदि आपको कहीं भी फंगस या सीलन के निशान दिखाई दें, तो उसे तुरंत साफ करें। घर में हवा का आवागमन बना रहे, ताकि नमी जमा न हो सके।

डीह्यूमिडिफायर का करें उपयोग: घर की अतिरिक्त नमी को नियंत्रित करने के लिए आप डीह्यूमिडिफायर का सहारा ले सकते हैं। यह उपकरण फफूंद और धूल के कणों के पनपने के अनुकूल वातावरण को कम करता है। इसके अतिरिक्त, घर के भीतर पौधों को न रखें, क्योंकि वे नमी को बढ़ा सकते हैं।

दवाओं में लापरवाही न बरतें: अस्थमा की दवाओं को नियमित रूप से लेना बहुत जरूरी है। चाहे आप मीटर्ड-डोज इनहेलर का उपयोग कर रहे हों या ड्राई पाउडर इनहेलर का, इन्हें अपनी दिनचर्या का हिस्सा समझें। इन्हें कभी भी नजरअंदाज न करें, क्योंकि मानसून के समय दवा छोड़ना लक्षणों को गंभीर बना सकता है।

वायरल इंफेक्शन से बचाव: बरसात के दिनों में सांस से जुड़ी दिक्कतों का एक बड़ा कारण वायरल संक्रमण है। उन लोगों से दूरी बनाए रखें जो पहले से बीमार हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करें ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके।

ठंडी चीजों का सेवन न करें: इस दौरान कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम जैसी ठंडी चीजों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। ये चीजें अस्थमा के लक्षणों को बढ़ावा दे सकती हैं। हमेशा ताजा और हल्का गर्म भोजन लेने को प्राथमिकता दें।

बाहरी गतिविधियों में सावधानी: यदि आपको काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलना पड़ता है, तो अत्यधिक सतर्क रहें। बाहर धूल और पराग जैसे एलर्जेन अस्थमा को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त होते हैं। ऐसी स्थितियों में अपना मास्क पहनकर रखना न भूलें।

संतुलित आहार अपनाएं: बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए पौष्टिक और संतुलित भोजन का सेवन करें। स्वस्थ आहार शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है और श्वसन तंत्र की समस्याओं से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।

सवाल-जवाब

मानसून में अस्थमा के मरीजों को किन चीजों से दूर रहना चाहिए?
अस्थमा के मरीजों को मानसून में ठंडी चीजों जैसे कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम से परहेज करना चाहिए।
क्या मानसून में मास्क पहनना जरूरी है?
हाँ, घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी है क्योंकि यह फफूंद के बीजाणुओं, धूल और पराग से बचाने में मदद करता है।
घर में नमी कैसे कम की जा सकती है?
घर में नमी को कम करने के लिए डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करें और पौधों को घर के अंदर न रखें।
क्या दवा के समय में बदलाव किया जा सकता है?
नहीं, दवाओं को नियमित रूप से लेना बहुत जरूरी है, खासकर मानसून के दौरान इनमें लापरवाही लक्षणों को बिगाड़ सकती है।
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