शीशे के सामने खड़े होकर अगर सिर में एक-दो सफेद बाल दिख जाएं तो किसी का भी चिंतित होना स्वाभाविक है। हालांकि, जब यही समस्या बच्चों, किशोरों और 25 साल से कम उम्र के युवाओं में तेजी से दिखाई देने लगे, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे प्रीमेच्योर ग्रेइंग यानी समय से पहले बाल सफेद होना कहा जाता है। गाजियाबाद स्थित जिला एमएमजी अस्पताल की वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि समय से पहले बालों के सफेद होने के पीछे केवल बढ़ती उम्र ही कारण नहीं होती। इसके पीछे जेनेटिक्स, मानसिक तनाव, असंतुलित जीवनशैली, शरीर में पोषक तत्वों की कमी और कई प्रकार की अंदरूनी स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं।
25 साल से कम उम्र में सफेद बाल और जेनेटिक्स की भूमिका
डॉ. दिव्या द्विवेदी के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के बाल 25 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले ही सफेद होने शुरू हो जाते हैं, तो इसे आधिकारिक रूप से प्रीमेच्योर ग्रेइंग की श्रेणी में रखा जाता है। इस समस्या के उत्पन्न होने में आनुवंशिकी यानी जेनेटिक्स की बहुत बड़ी भूमिका होती है। यदि माता-पिता या परिवार के अन्य निकट संबंधियों को अपनी युवावस्था में ही समय से पहले बाल सफेद होने की शिकायत रही हो, तो बच्चों में भी इस लक्षण के उभरने की आशंका काफी हद तक बढ़ जाती है। वंशानुगत कारणों से बालों के फॉलिकल्स में मेलेनिन पिगमेंट बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
मानसिक तनाव और बालों के रंग पर प्रभाव
वर्तमान समय की अति व्यस्त और भागदौड़ भरी दिनचर्या में बच्चों, छात्रों और कामकाजी युवाओं पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। पढ़ाई की प्रतियोगिता, करियर की चिंता, नौकरी की जिम्मेदारियों और दैनिक जीवन के तनाव का असर सीधे शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। विशेषज्ञ के अनुसार, लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव बालों की जड़ों में रंग बनाने वाली कोशिकाओं यानी मेलानोसाइट्स की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। जब ये कोशिकाएं सही तरीके से पिगमेंट का उत्पादन नहीं कर पातीं, तो कम उम्र में ही बाल अपनी प्राकृतिक रंगत खोने लगते हैं और तेजी से सफेद होने लगते हैं।
जंक फूड, असंतुलित आहार और पोषक तत्वों की कमी
आजकल के खान-पान की आदतें भी बालों के असमय सफेद होने का एक प्रमुख कारण हैं। बच्चे और युवा पौष्टिक भोजन के बजाय जंक फूड, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड आहार का अधिक सेवन कर रहे हैं। इस कारण शरीर को दैनिक रूप से आवश्यक पोषण पर्याप्त मात्रा में प्राप्त नहीं हो पाता। विभिन्न अध्ययनों और चिकित्सीय अनुभवों में पाया गया है कि शरीर में मुख्य रूप से विटामिन B12 और आयरन की कमी का सीधा संबंध बालों के सफेद होने से है। बालों को मजबूत और काला बनाए रखने के लिए आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, सूखे मेवे और दालों को शामिल करना बेहद जरूरी है।
थायरॉइड और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
कुछ मामलों में बाल सफेद होने की प्रक्रिया किसी अंदरूनी बीमारी या शारीरिक विकार का संकेत भी हो सकती है। थायरॉइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी होने पर शरीर के हार्मोनल संतुलन पर असर पड़ता है, जिससे बालों की सेहत भी प्रभावित होती है। यदि किसी व्यक्ति के बाल अचानक बहुत तेजी से सफेद होने लगें और साथ ही थकान, वजन में बदलाव या अन्य शारीरिक परेशानियां दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर की सलाह पर आवश्यक रक्त परीक्षण और थायरॉइड की जांच करानी चाहिए।
सोशल मीडिया ट्रेंड्स से सावधान और विशेषज्ञ की सलाह
डॉ. दिव्या द्विवेदी ने यह विशेष सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले विज्ञापनों और वीडियो को देखकर किसी भी प्रकार के शैंपू, कंडीशनर, हेयर ऑयल या सीरम का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति के बालों की बनावट, स्कैल्प की प्रकृति और शारीरिक आवश्यकताएं अलग होती हैं। किसी भी केमिकल युक्त प्रोडक्ट का गलत चुनाव बालों को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बजाय, बचपन से ही बच्चों में संतुलित आहार, 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त रहने की आदतें विकसित करनी चाहिए। यदि बालों के सफेद होने की समस्या लगातार बढ़ रही हो, तो घबराने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित कदम है।



















