मानसून के आगमन के साथ ही देश भर में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगता है। मौसम में बदलाव और बारिश के पानी के जमाव की वजह से वायरल इंफेक्शन के साथ-साथ डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरों से फैलने वाली गंभीर बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। कई बार इन तीनों बीमारियों के शुरुआती लक्षण इतने मिलते-जुलते होते हैं कि सामान्य मरीज के लिए यह समझ पाना बेहद कठिन हो जाता है कि वह किस बीमारी से पीड़ित है। गलतफहमी में गलत दवा लेना स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकता है। डॉ. नेहा रस्तोगी, सीनियर कंसल्टेंट, संक्रामक रोग विभाग, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम, ने इन बीमारियों के विशिष्ट लक्षणों और समय पर चिकित्सकीय जांच कराने के सही तरीक़ों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
डेंगू बुखार के मुख्य लक्षण और खतरे के संकेत
डेंगू बुखार के मामले मानसून और उसके बाद के महीनों में सबसे अधिक देखने को मिलते हैं। जब कोई व्यक्ति डेंगू वायरस से संक्रमित होता है, तो उसमें अचानक बहुत तेज बुखार आ सकता है। इसके साथ ही आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द, सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में असहनीय दर्द महसूस होता है। मरीज को अत्यधिक शारीरिक कमजोरी घेर लेती है।
कुछ मरीजों को उल्टी, मिचली और त्वचा पर लाल चकत्ते (रैशेज) आने की समस्या भी होती है। संक्रामक रोग विशेषज्ञ के अनुसार, डेंगू के कुछ लक्षण बेहद गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं। यदि मरीज को पेट में लगातार तेज दर्द बना रहे, बार-बार उल्टी हो रही हो, मसूड़ों या नाक से खून बहने लगे, अत्यधिक सुस्ती छा जाए या सांस लेने में तकलीफ होने लगे, तो यह आपातकालीन स्थिति हो सकती है। ऐसे संकेत दिखते ही बिना किसी देरी के तुरंत निकटतम अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
मलेरिया संक्रमण के विशिष्ट पहचान लक्षण
मलेरिया एक अन्य गंभीर मच्छर जनित बीमारी है, जिसके लक्षण डेंगू और सामान्य वायरल फीवर से भिन्न हो सकते हैं। आमतौर पर मलेरिया के मरीज को बुखार आने से पहले बहुत तेज ठंड लगती है और पूरा शरीर कंपकंपाने लगता है। इसके बाद मरीज का शरीर बहुत तेजी से गर्म हो जाता है और तेज बुखार के बाद भारी पसीना आता है।
बुखार के इस चक्र के अलावा मरीज को तेज सिरदर्द, बदन दर्द, शारीरिक कमजोरी और कभी-कभी उल्टी आने जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। हालांकि, डॉक्टर का कहना है कि हर मरीज में मलेरिया का यह पारंपरिक चक्र दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में बिना कंपकंपी के भी मलेरिया का बुखार आ सकता है, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी का आकलन नहीं करना चाहिए।
सामान्य वायरल फीवर की पहचान
मौसम बदलने के दौरान फैलने वाला वायरल संक्रमण आमतौर पर ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। वायरल फीवर से पीड़ित व्यक्ति को बुखार के साथ-साथ गले में खराश, लगातार खांसी, नाक बहने या बंद होने जैसी परेशानियां होती हैं। इसके अलावा शरीर में हल्का दर्द और थकान बनी रहती है।
चूंकि वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया के कई शुरुआती लक्षण जैसे सिरदर्द, कमजोरी और बुखार आपस में काफी मिलते-जुलते हैं, इसलिए घर पर रहकर स्वयं बीमारी तय करना या मेडिकल स्टोर से बिना सलाह दवाएं लेना खतरनाक साबित हो सकता है।
डॉक्टर से कब परामर्श लें और कौन से टेस्ट करवाएं
यदि तेज बुखार कई दिनों तक ठीक न हो, बहुत अधिक शारीरिक कमजोरी महसूस हो रही हो, सिर में असहनीय दर्द हो, कंपकंपी छूट रही हो या आपके आसपास डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ रहे हों, तो बिना समय गंवाए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
डॉक्टर मरीज की शारीरिक स्थिति और बुखार के दिनों का आकलन करके उपयुक्त रक्त जांच कराने की सलाह देते हैं। इसमें CBC टेस्ट, डेंगू के लिए एनएस1 एंटीजन या एंटीबॉडी टेस्ट, और मलेरिया के लिए एंटीजन या ब्लड स्मियर टेस्ट शामिल हो सकते हैं। डॉक्टर यह भी स्पष्ट करती हैं कि जांच कराने का सही समय बीमारी की प्रकृति और टेस्ट के प्रकार पर निर्भर करता है, इसलिए डॉक्टर के बताए अनुसार ही टेस्ट कराना चाहिए।



















