मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी, खांसी और विभिन्न प्रकार के वायरल संक्रमणों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे हालात में लोग आम तौर पर अंग्रेजी दवाइयों या फिर तरह-तरह के घरेलू नुस्खों पर निर्भर हो जाते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह मानना है कि कुछ बेहद सरल योगाभ्यास और प्राणायाम तकनीकें भी शरीर को अंदर से मजबूत रखने में एक अहम और सकारात्मक भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं खास अभ्यासों में से एक अनुलोम-विलोम प्राणायाम है, जो केवल श्वसन तंत्र को दुरुस्त रखने तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी अपना गहरा सकारात्मक असर छोड़ता है।
मानसिक तनाव और एकाग्रता में सुधार
आज की दौड़भाग भरी और अत्यंत व्यस्त जीवनशैली के कारण मानसिक तनाव, चिंता और एकाग्रता में कमी जैसी परेशानियां आम होती जा रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में यदि नियमित रूप से केवल कुछ मिनट अनुलोम-विलोम का अभ्यास कर लिया जाए, तो शरीर और मन दोनों को ही इसके अद्भुत लाभ मिल सकते हैं। देश का आयुष मंत्रालय भी समय-समय पर आम जनता को यह सलाह देता है कि उन्हें अपनी दैनिक दिनचर्या में योग और प्राणायाम को जरूर शामिल करना चाहिए। खासकर जब मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा हो, तब यह प्राकृतिक अभ्यास स्वास्थ्य को बेहतर और स्थिर बनाए रखने का सबसे आसान जरिया साबित होता है।
श्वसन तंत्र के लिए अनुलोम-विलोम के लाभ
आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुलोम-विलोम प्राणायाम हमारे श्वसन तंत्र की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में काफी मददगार साबित हो सकता है। इसके नियमित और सही अभ्यास से सांस लेने की पूरी प्रक्रिया संतुलित होती है, जिसके परिणामस्वरुप खांसी और सांस से जुड़ी अन्य सामान्य परेशानियों में भी काफी राहत मिल सकती है। इस प्राणायाम के अभ्यास के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सांसें बहुत ही धीरे-धीरे और पूरी गहराई के साथ ली जाएं ताकि फेफड़ों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंच सके।
मन की शांति और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता
अनुलोम-विलोम का सबसे बड़ा फायदा यह माना जाता है कि यह अशांत मन को पूरी तरह शांत करने में सहायता करता है। इसके लगातार अभ्यास से रोजमर्रा की जिंदगी का मानसिक तनाव कम होता है और चिंता की भावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाने में बहुत मदद मिलती है। इसके साथ ही यह मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक ऊर्जा के स्तर को ऊपर उठाने में भी बेहद उपयोगी साबित होता है, जिससे व्यक्ति खुद को तरोताजा महसूस करता है।
करने की सही और आसान विधि
इस प्राणायाम को करने की प्रक्रिया बेहद सरल है जिसके लिए सबसे पहले किसी भी आरामदायक स्थिति में आराम से बैठ जाएं। इसके बाद अपने हाथ के अंगूठे से एक नथुने को बंद करें और दूसरे खुले नथुने से बहुत ही धीरे-धीरे सांस अंदर की ओर खींचें। अब सांस लेने के बाद पहले वाले नथुने को खोलें और दूसरे को बंद करके सांस बाहर छोड़ें, और इसी पूरी प्रक्रिया को दोनों तरफ से बारी-बारी से दोहराएं। अभ्यास करते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सांसों की गति बिल्कुल धीमी और पूरी तरह नियंत्रित होनी चाहिए।
गंभीर लक्षणों में लापरवाही न बरतें
आयुष मंत्रालय ने यह चेतावनी भी दी है कि मौसम बदलने के दौरान यदि शरीर में किसी भी प्रकार के गंभीर स्वास्थ्य संकेत दिखाई दें, तो उन्हें कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार की समस्या हो, सांस लेने में भारी कठिनाई महसूस हो रही हो, लगातार उल्टी आ रही हो, अत्यधिक कमजोरी बनी हुई हो या फिर शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण उभरें, तो बिना किसी देरी के तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
संतुलित जीवनशैली का महत्व
मंत्रालय के स्पष्ट रुख के मुताबिक केवल योग ही नहीं बल्कि एक संतुलित जीवनशैली भी अच्छे और लंबे स्वास्थ्य के लिए उतनी ही आवश्यक है। अपने रक्तचाप, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और शरीर के वजन की नियमित निगरानी करने से हृदय से जुड़े जोखिमों की पहचान समय रहते की जा सकती है। योग के साथ-साथ एक संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाकर बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया जा सकता है।



















