बरसात के इस दौर में लगातार बढ़ती नमी और शरीर से निकलने वाले पसीने के कारण त्वचा पर जलन या लालिमा उभरने की दिक्कतें आम हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में ताजा एलोवेरा जेल का इस्तेमाल त्वचा को ठंडक और राहत देने में काफी मददगार माना जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए सबसे पहले एलोवेरा की पत्ती से शुद्ध जेल निकाल लें और फिर उस प्रभावित हिस्से को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद जेल की बहुत ही पतली परत उस जगह पर लगाएं और लगभग 15 मिनट के लिए वैसे ही छोड़ दें। तय समय के बाद इसे साफ पानी से दोबारा धो लें क्योंकि यह तरीका त्वचा को अंदरूनी नमी प्रदान करने में भी सहायता कर सकता है। हालांकि यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि खुले हुए घावों, गंभीर संक्रमणों या फिर पस से भरे फोड़ों पर बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के कुछ भी लगाना बिल्कुल उचित नहीं होता है।
त्वचा पर एलोवेरा लगाने से पहले जरूरी पैच टेस्ट और सावधानियां
डॉ. ऐजल पटेल इस बात पर जोर देते हैं कि अपनी त्वचा पर एलोवेरा का लेप लगाने से पहले थोड़ी एहतियात बरतना बहुत आवश्यक है। पूरी तरह प्राकृतिक होने के बावजूद भी कई बार कुछ विशेष लोगों को एलोवेरा से त्वचा पर एलर्जी या तीव्र जलन की समस्या हो सकती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि सीधे चेहरे या बड़े हिस्से पर लगाने से पहले अपने हाथ या त्वचा के किसी छोटे से कोने पर इसकी थोड़ी सी मात्रा लगाकर जांच लें। यदि ऐसा करने पर किसी भी प्रकार की लालिमा, खुजली, जलन या सूजन जैसे लक्षण नजर आएं तो इसका बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें। सबसे पहले उस प्रभावित स्थान को पूरी तरह साफ करने के बाद ही एलोवेरा जेल की एक हल्की सी परत वहां लगाई जानी चाहिए और करीब 15 मिनट बीत जाने के बाद इसे पानी से धोकर साफ कर लेना चाहिए।
बारिश के दिनों में त्वचा पर पसीना और नमी बहुत लंबे समय तक टिके रहने की वजह से बैक्टीरिया के पनपने और बढ़ने की संभावना काफी ज्यादा हो जाती है। इसलिए किसी भी तरह के फोड़े-फुंसियों जैसी परेशानियों से सुरक्षित रहने के लिए शरीर की साफ-सफाई पर विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिए। जिस जगह पर संक्रमण या दाने हैं, उस प्रभावित हिस्से को हमेशा हल्के साबुन और साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। शरीर से ज्यादा पसीना निकलने की स्थिति में अपने कपड़े समय-समय पर बदलते रहें और बहुत ज्यादा तंग तथा चिपके हुए कपड़े पहनने से हमेशा परहेज करें। यहाँ यह समझना भी जरूरी है कि एलोवेरा जेल केवल त्वचा को ठंडक और नमी पहुँचाने का काम करता है, इसे किसी भी सूरत में फंगस या बैक्टीरिया के संक्रमण की दवा नहीं माना जाना चाहिए।
फोड़े-फुंसियों से जुड़ा सही बचाव और किन स्थितियों में लें डॉक्टर की सलाह
यदि आपकी त्वचा पर कोई फोड़ा या फुंसी निकल आई है, तो उसे बार-बार अपनी उंगलियों से दबाने या फोड़ने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। इस तरह की नादानी करने से संक्रमण आसपास की स्वस्थ त्वचा में भी तेजी से फैल सकता है और आपका घाव तथा परेशानी और अधिक बढ़ सकती है। इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी काम यही है कि उस प्रभावित स्थान को हमेशा साफ और पूरी तरह सूखा रखा जाए। हल्की-फुल्की जलन या त्वचा की सामान्य परेशानी में ताजा एलोवेरा जेल कुछ समय के लिए लगाया जा सकता है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है कि यह किसी भी प्रकार के संक्रमण को पूरी तरह खत्म कर देगा। खासकर जब पस से भरे हुए बड़े फोड़े हो जाएं, तेज दर्द उठने लगे या फिर बुखार जैसी स्थिति बनने लगे तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
घरों में आसानी से उगने वाले एलोवेरा के पौधे से जेल निकालकर उसे सीधे त्वचा पर इस्तेमाल करने की सलाह लोगों को अक्सर दी जाती है, लेकिन इसे सही तरीके से उपयोग करना ही सबसे समझदारी का काम है। जब आप पौधे से पत्ती काटते हैं, तो उससे निकलने वाले पीले रंग के रस को अच्छी तरह हटा देना चाहिए और केवल अंदर के साफ जेल का ही उपयोग करना चाहिए। इस शुद्ध जेल को प्रभावित त्वचा पर एक पतली सी परत के रूप में लगाया जा सकता है और करीब 15 मिनट बीतने के बाद इसे पानी से धोया जा सकता है। यदि इस जेल को लगाने के बाद आपकी त्वचा पर जलन या खुजली और ज्यादा बढ़ने लगे तो इसे तुरंत पानी से धोकर हटा दें। इसके अलावा, किसी भी संक्रमित, गहरे या फिर खुले घाव पर डॉक्टर की सलाह के बिना एलोवेरा का भूलकर भी इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
कपड़ों की साफ-सफाई और गंभीर लक्षणों की पहचान
फोड़े-फुंसियों की समस्या से बचे रहने के लिए केवल त्वचा की देखभाल करना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके पहने जाने वाले कपड़ों की स्वच्छता भी उतनी ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। बारिश के इस मौसम में कपड़े यदि बहुत देर तक गीले या नम बने रहते हैं, तो इससे त्वचा में घर्षण और जलन की समस्या काफी ज्यादा बढ़ सकती है। यही वजह है कि पसीने से तरबतर या फिर बारिश के पानी में भीगे हुए कपड़ों को तुरंत बदल लेना चाहिए। इसके अलावा, इस्तेमाल होने वाले तौलिए, अन्य कपड़े और बिस्तर की चादरों को भी नियमित रूप से साफ रखना बेहद जरूरी है और उन्हें पूरी तरह धूप में सुखाने के बाद ही इस्तेमाल में लाना चाहिए। अपनी त्वचा को कभी भी लंबे समय तक नम या सीलनयुक्त न रहने दें।
यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि हर एक फुंसी या त्वचा की हल्की लालिमा सामान्य नहीं होती है। यदि किसी फोड़े के अंदर पस बनने लगे, उसमें बहुत तेज दर्द महसूस हो, आसपास की त्वचा जरूरत से ज्यादा लाल या गर्म हो जाए, सूजन बहुत तेजी से बढ़ने लगे या फिर शरीर में बुखार आने लगे तो यह किसी गंभीर संक्रमण का स्पष्ट संकेत हो सकता है। ऐसी खतरनाक स्थिति में केवल एलोवेरा या अन्य किसी भी घरेलू नुस्खे पर पूरी तरह निर्भर रहना बिल्कुल भी उचित कदम नहीं है। डॉक्टर पूरी जांच करने के बाद ही समस्या के असली कारण का पता लगाकर जरूरी उपचार बता सकते हैं। हालांकि, त्वचा की साधारण जलन में एलोवेरा जेल से कुछ समय के लिए अस्थायी ठंडक जरूर मिल सकती है, लेकिन किसी भी गंभीर संक्रमण का इलाज हमेशा पेशेवर चिकित्सकीय देखरेख में ही कराया जाना चाहिए।
एलोवेरा के भीतर प्राकृतिक रूप से त्वचा को गहरी नमी प्रदान करने और ठंडक पहुँचाने वाले तमाम गुण मौजूद होते हैं, इसीलिए बारिश के इस मौसम में होने वाली हल्की-फुल्की जलन या रूखेपन से राहत पाने के लिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। प्रभावित हिस्से को अच्छी तरह साफ करने के बाद थोड़ी सी मात्रा में एलोवेरा जेल लगाकर लगभग 15 मिनट बाद इसे धोया जा सकता है, लेकिन फोड़े-फुंसियों के होने के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं और यह जरूरी नहीं है कि हर एक समस्या पर एलोवेरा पूरी तरह प्रभावी साबित हो। इसलिए इसे हमेशा घरेलू देखभाल का ही एक सीमित उपाय समझें और गंभीर मामलों में डॉक्टर की मदद लें।



















