जमशेदपुर में इन दिनों धूप और बारिश के लुकाछिपी वाले खेल के चलते मौसम में तेजी से उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। तापमान में आ रहे इस अचानक बदलाव का सबसे बुरा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। शहर में वायरल फीवर, सर्दी, जुकाम, खांसी और गले में खराश जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हालात यह हैं कि अस्पतालों की ओपीडी में बीमार बच्चों को लेकर पहुंचने वाले अभिभावकों की भीड़ बढ़ती जा रही है और माता-पिता अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य को लेकर खासे परेशान नजर आ रहे हैं।
संक्रमण का बढ़ता खतरा और मौसम का मिजाज
मौसम की इस बेरुखी के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ रहा है, जिससे वे संक्रमण की चपेट में बहुत जल्दी आ रहे हैं। खासकर बारिश के पानी में भीग जाने के तुरंत बाद ठंडी हवाओं या एयर कंडीशनर के संपर्क में आने से यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। चिकित्सा जानकारों का कहना है कि इस संक्रामक दौर में बच्चों की जरा सी भी अनदेखी भारी पड़ सकती है। इसलिए इस मौसम में माता-पिता को अपने बच्चों के खान-पान से लेकर उनकी दिनचर्या और पहनावे तक का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी हो गया है ताकि वे स्वस्थ रह सकें।
अस्पतालों में उमड़ रही मरीजों की भीड़
सरकारी सदर अस्पताल, जमशेदपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कमलेश कुमार प्रसाद ने मौजूदा हालात की जानकारी देते हुए बताया कि इन दिनों हर रोज लगभग 50 से 60 बच्चे बुखार और तरह-तरह के वायरल संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल आ रहे हैं। डॉक्टर प्रसाद का कहना है कि मौसम के इस बदलाव भरे दौर में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। जरा सी लापरवाही से बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं, जिसके चलते समय पर अस्पताल पहुंचना जरूरी हो जाता है।
वायरल फीवर के प्रमुख लक्षण
बच्चों में फैल रहे इस वायरल संक्रमण के कई स्पष्ट लक्षण देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टर कमलेश कुमार प्रसाद के मुताबिक, बुखार आने के साथ-साथ बच्चों में भारी कमजोरी महसूस होना, पूरे शरीर में दर्द रहना, लगातार नाक बहना, सूखी या बलगमी खांसी होना और खाने-पीने की इच्छा बिल्कुल खत्म हो जाना इसके मुख्य लक्षण हैं। डॉक्टर की दो टूक सलाह है कि जैसे ही बच्चों में इस तरह के कोई भी लक्षण दिखाई दें, उन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज न किया जाए और तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लिया जाना चाहिए ताकि समय रहते इलाज शुरू हो सके।
बारिश में भीगने के बाद क्या करें
यदि कोई बच्चा बारिश के पानी में पूरी तरह भीग जाता है, तो उसे तुरंत संभालना जरूरी होता है। डॉक्टर कमलेश कुमार प्रसाद ने सलाह दी है कि सबसे पहले बच्चे के शरीर को किसी सूखे कपड़े या तौलिये से पूरी तरह साफ करके पोंछना चाहिए। इसके बाद बच्चे को तुरंत सूखे, गर्म और आरामदायक कपड़े पहनाए जाने चाहिए। चूंकि मौसम में ठंडक घुल चुकी होती है, इसलिए शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखना बहुत आवश्यक है। इसके साथ ही बच्चों को लगातार अंतराल पर गुनगुना या सामान्य साफ पानी पिलाते रहना चाहिए। बारिश में भीगने के तुरंत बाद बच्चों को किसी भी तरह के ठंडे पेय पदार्थ देने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके अलावा बीमारी से जल्दी उबरने के लिए बच्चों को पर्याप्त आराम मिलना भी बहुत जरूरी है।
खान-पान में बरतें विशेष सावधानी
इस बदलते हुए मौसम के दौरान बच्चों के रहन-सहन के साथ-साथ उनके खान-पान पर भी विशेष नजर रखना अनिवार्य है। चिकित्सकों का स्पष्ट निर्देश है कि बच्चों को बाहर मिलने वाला खुला, सड़क किनारे का या अस्वच्छ खाना बिल्कुल न खिलाया जाए। बरसात के इस मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के सेवन से पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चों को हमेशा घर का बना ताजा और पौष्टिक आहार ही देना चाहिए। घर में इस्तेमाल होने वाले फल और सब्जियों को हमेशा अच्छी तरह पानी से धोने के बाद ही पकाना या इस्तेमाल करना चाहिए। पीने के लिए भी केवल साफ पानी का ही प्रबंध करें। इसके अलावा बच्चों में खाने से ठीक पहले और बाहर से खेल कर घर लौटने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धोने की आदत डालना बहुत जरूरी है।
खुद से दवा देने से बचें
अभिभावकों को इस बात का भी खास तौर पर ख्याल रखना चाहिए कि बच्चे में वायरल फीवर या अन्य संक्रमण के लक्षण नजर आते ही अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से लाकर एंटीबायोटिक या किसी भी तरह की अन्य दवाएं शुरू न कर दें। बच्चों को हमेशा डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और सलाह के मुताबिक ही दवा दी जानी चाहिए। यदि बच्चे का बुखार लगातार बना रहता है और किसी भी घरेलू उपाय या शुरुआती दवा से उतर नहीं रहा है, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर के पास जाकर संपर्क करना चाहिए।



















