बस्तर के गांवों में खास तरीके से बनाई जाती है इमली के पानी वाली देसी सब्जीघर पर ऐसे करें पितृपक्ष का श्राद्ध-तर्पण, पूजन सामग्री और संपूर्ण विधिराधिका मदान ने खोले बॉडी शेमिंग के राज, बोलीं- लोग कहते थे तुम बहुत मोटी हो गई हो हीरोइन कैसे बनोगीफ्रांस के ओबाग्ने में स्कूल के अंदर चली गोली, 14 साल का छात्र गिरफ्तार और दो शिक्षक घायलउत्तराखंड में मौसम का यूटर्न, देहरादून और नैनीताल समेत सात जिलों में बारिश और बर्फबारी का अलर्टगया में पिंडदान से पहले पुनपुन में क्यों जरूरी है तर्पण, जानें गोदावरी तालाब का महत्वआगरा में डॉक्टर की चेतावनी, चोट के बाद भूलकर भी न करें ये गलतीमेटा के एआई एजेंट म्यूज पर एडल्ट चैट की खुली छूट, प्राइवेसी को लेकर एक्सपर्ट्स की चिंताझारखंड के सात जिलों में मौसम का मिजाज बदला, रांची से पलामू तक जानें तापमान का ताजा हालकिंडल एल्युमिनियम रिव्यू (2026): बेहद खूबसूरत डिजाइन वाला ई-रीडर, लेकिन कीमत है काफी ज्यादा
मौसम बदलते ही पशुओं की सेहत पर मंडराता है गंभीर खतरा, बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यानस्वास्थ्य
13 अक्तू॰ 2026, 4:13 am (2 घंटे पहले)· 0

मौसम बदलते ही पशुओं की सेहत पर मंडराता है गंभीर खतरा, बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यान

मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण गोंडा में पशुओं में कई तरह की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने पशुपालकों को खान-पान, साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

मौसम में बदलाव का असर केवल इंसानों के जीवन पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पशुओं की सेहत पर भी देखने को मिलता है। तापमान में लगातार होने वाले बदलाव, अचानक होने वाली बारिश और ठंड में वृद्धि के कारण पशुओं को स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में पशुपालकों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे अपने पशुओं के खान-पान, रहने के स्थान की स्वच्छता और उनकी सेहत पर खास नजर रखें। थोड़ी सी भी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भारी साबित हो सकती है और उन्हें गंभीर बीमारियों की चपेट में ला सकती है।

बीमारियों के प्रकार और लक्षण

गोंडा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि मौसम के करवट लेते ही पशुओं में सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके साथ ही, अस्वच्छ पानी पीने या खराब और सड़ा हुआ चारा खाने की वजह से पशुओं को पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पशुओं की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए समय रहते इनकी पहचान करना बेहद आवश्यक है।

ये भी पढ़ें

मुंहपका-खुरपका रोग से बचाव

राकेश कुमार तिवारी के अनुसार, मौसम के इस बदलाव के दौर में पशुपालकों को विशेष तौर पर मुंहपका-खुरपका रोग से अपने पशुओं की रक्षा करने पर ध्यान देना चाहिए। यह एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है जो एक संक्रमित पशु के संपर्क में आने से बहुत तेजी से अन्य स्वस्थ पशुओं में भी फैल जाती है। इस बीमारी की चपेट में आने वाले पशुओं के मुंह और पैरों में दर्दनाक छाले या घाव उभर आते हैं। यदि पशुओं में इस तरह के कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो पशुपालकों को बिना किसी देरी के तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

खान-पान और आवास की स्वच्छता

मौसम बदलने के दौरान सबसे पहले पशुओं के रहने वाले स्थान को पूरी तरह साफ और सूखा रखना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पशुशाला के आसपास बारिश का पानी बिल्कुल भी जमा न होने पाए। पशुओं को पीने के लिए हमेशा स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं और उन्हें ताजा एवं पौष्टिक चारा ही खिलाएं। तेज हवा और ठंड के प्रभाव से बचाने के लिए उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर बांधें। इसके अलावा, पशुओं के सामान्य व्यवहार और उनके रोजमर्रा के खान-पान पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी है। यदि कोई पशु भोजन करना कम कर दे, बहुत सुस्त नजर आए, उसे तेज बुखार हो, लगातार खांसी की समस्या हो या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो, तो तुरंत किसी योग्य पशु चिकित्सक से परामर्श लें। बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के पशुओं को अपनी तरफ से कोई भी दवा देने से हमेशा बचना चाहिए।

टीकाकरण और सतर्कता

पशुओं को विभिन्न संक्रामक बीमारियों के खतरनाक प्रकोप से सुरक्षित रखने के लिए समय पर टीकाकरण करवाना अनिवार्य होता है। विशेष रूप से मुंहपका-खुरपका रोग से बचाव के वास्ते पशुपालकों को सरकारी विभागों की तरफ से चलाए जाने वाले टीकाकरण अभियानों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। यदि किसी पशु के शरीर में बीमारी के जरा भी लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत बाकी स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए और इसकी सूचना पशु चिकित्सक को देनी चाहिए। ऐसा करने से खेत या बाड़े में संक्रमण के तेजी से फैलने के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

नियमित निगरानी का महत्व

राकेश कुमार तिवारी का यह भी कहना है कि मौसम में बदलाव के इस संवेदनशील समय के दौरान पशुपालकों को अपने मवेशियों की नियमित रूप से निगरानी करते रहना चाहिए। उनके दैनिक आहार, पीने के पानी की शुद्धता और आवास की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। किसी भी प्रकार के असामान्य शारीरिक लक्षण नजर आने पर बिना एक पल की देरी किए पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। समय पर की गई सही देखभाल और जरूरी सावधानियां अपनाकर पशुओं को खतरनाक बीमारियों की चपेट में आने से आसानी से बचाया जा सकता है।

सवाल-जवाब

मौसम बदलने पर पशुओं में कौन सी बीमारियां आम हैं?
मौसम बदलने के दौरान पशुओं में सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं।
मुंहपका-खुरपका रोग के क्या लक्षण हैं?
इस बीमारी में पशुओं के मुंह और पैरों में छाले या घाव दिखाई देने लगते हैं।
पशुओं को पाचन संबंधी समस्याएं क्यों होती हैं?
गंदा पानी पीने या खराब चारा खाने की वजह से पशुओं को पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।
संक्रमित पशुओं से बीमारी फैलने से कैसे रोकें?
बीमार पशुओं को तुरंत दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए और समय पर टीकाकरण कराना चाहिए।
पशुओं में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने पर क्या करें?
लक्षण दिखते ही बिना किसी देरी के पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और खुद दवा नहीं देनी चाहिए।
गोंडा में पशुओं की सेहत को लेकर किसने सलाह दी है?
यह सलाह गोंडा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp