बढ़ती उम्र के दौर में घुटनों में खिंचाव, अकड़न और असहनीय दर्द की शिकायत अक्सर लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगती है। कई बार लोग महंगे चिकित्सीय उपचार के भय या असमर्थता के चलते इस शारीरिक तकलीफ को लगातार सहते रहते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ पारंपरिक और घरेलू तरीकों के जरिए घुटनों की बेचैनी को कम करने का प्रयास किया जा सकता है, हालांकि समस्या गंभीर होने पर विशेषज्ञ की राय लेना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
घुटनों में दर्द और जकड़न के प्रमुख कारण
राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय, मऊ के चिकित्सक डॉ. मोहम्मद इमरान के अनुसार, जोड़ों में पीड़ा उत्पन्न होने के पीछे कई शारीरिक कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। उम्र का बढ़ना एक स्वाभाविक कारण है, जिसके साथ ही शरीर में आवश्यक विटामिन्स और पोषक तत्वों का अभाव जोड़ों को कमजोर बना देता है। इसके अतिरिक्त, यदि शरीर का वजन सामान्य से अधिक है, तो चलने-फिरने के दौरान घुटनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे दर्द की समस्या तेजी से बढ़ती है। जब जोड़ों का दर्द गंभीर रूप ले लेता है, तो सामान्य रूप से चलना, सीढ़ियां चढ़ना और रोजमर्रा के साधारण कार्य करना भी व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सरसों और अरंडी के तेल से मालिश का सुरक्षित तरीका
घुटनों की बेचैनी को कम करने के लिए सरसों के तेल से मालिश करना एक पारंपरिक उपाय माना जाता है। डॉ. मोहम्मद इमरान के अनुसार, सरसों के तेल को हल्का गुनगुना करके जोड़ों पर बिल्कुल हल्के हाथों से लगाना चाहिए, जिससे कई लोगों को आराम का अहसास होता है। मालिश के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रभावित हिस्से पर कड़ा या तेज दबाव बिल्कुल न डाला जाए। यदि घुटनों में बाहरी चोट के निशान हों अथवा वहां सूजन पहले से मौजूद हो, तो बिना चिकित्सीय परामर्श के किसी भी प्रकार की मालिश करने से बचना चाहिए।
मालिश के अन्य पारंपरिक विकल्पों में अरंडी के तेल का उपयोग भी शामिल है, जिसे जोड़ों की देखभाल के लिए लंबे समय से अपनाया जाता रहा है। इसके साथ ही, यदि घुटनों में कड़ापन या अकड़न महसूस हो रही हो, तो गर्म पानी की थैली का इस्तेमाल करके हल्की सिकाई की जा सकती है। सिकाई के समय पानी अथवा थैली के तापमान की सावधानीपूर्वक जांच कर लेनी चाहिए ताकि बहुत अधिक गर्मी के कारण त्वचा झुलसने या जलने का खतरा न रहे। यदि घुटने में अचानक तीव्र सूजन उभर आई हो अथवा स्पर्श करने पर जोड़ असामान्य रूप से गर्म लगे, तो गर्म सिकाई का प्रयोग करने से पहले चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
खानपान की आदतें और जीवनशैली का महत्व
शारीरिक देखभाल के अलावा आहार संबंधी आदतों में सुधार लाना भी जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम माना गया है। डॉ. इमरान के परामर्श के अनुसार, रात को सोते समय हल्दी मिश्रित दूध पीना और रातभर भीगे हुए मेथी के दानों का सुबह खाली पेट सेवन करना राहत प्रदान करने वाले घरेलू उपायों में शामिल है। इसी प्रकार, अदरक की चाय का सेवन भी कुछ व्यक्तियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह स्पष्ट समझना जरूरी है कि ये नुस्खे केवल लक्षणों में हल्का आराम दे सकते हैं, लेकिन इनसे किसी गंभीर बीमारी के पूर्ण समाधान अथवा बीमारी को जड़ से खत्म करने की कोई गारंटी नहीं मिलती है।
जोड़ों के दर्द से जूझ रहे व्यक्तियों को अपने खानपान में प्रोटीन, आवश्यक विटामिन्स और अन्य खनिज तत्वों की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संतुलित आहार अपनाना चाहिए। शरीर के बढ़ते वजन पर नियंत्रण पाना आवश्यक है ताकि पैरों और घुटनों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम हो सके। घुटनों की तकलीफ के पीछे गठिया, लिगामेंट की चोट अथवा अन्य आंतरिक विकृतियां भी हो सकती हैं। इसलिए घरेलू नुस्खों को मुकम्मल इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे, सूजन बढ़ जाए या चलने में भारी लाचारी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सक से गहन जांच करवानी चाहिए।



















