पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच सर्पदंश की घटनाओं में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। बरसात के इस मौसम में जमीन के अंदर पानी भरने के कारण सांप और अन्य जहरीले जीव अपने बिलों को छोड़कर बाहर आने पर मजबूर हो जाते हैं। इस दौरान इंसानों और इन जहरीले जीवों का आमना-सामना होने पर सांप के काटने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए मेरठ स्थित लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में सर्पदंश के शिकार मरीजों की संख्या में भारी उछाल आया है, जो लगातार इलाज के लिए अस्पताल का रुख कर रहे हैं।
हर महीने पहुंच रहे हैं सैकड़ों मरीज
इस गंभीर स्थिति को लेकर लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में हर महीने लगभग 300 से 400 मरीज सर्पदंश से जुड़ी गंभीर समस्याओं के उपचार के लिए सीधे मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। इन सभी आने वाले मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और संसाधनों के जरिए तुरंत इलाज मुहैया कराया जाता है, और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया जाता है।
झाड़-फूंक में समय गंवाने से बचें
डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को सांप काटने के बाद उसे जितनी कम से कम देरी में अस्पताल पहुंचाया जाए, उसके पूरी तरह ठीक होने की संभावना उतनी ही ज्यादा बेहतर हो जाती है। उन्होंने चिंता जताते हुए बताया कि आज भी कई लोग आधुनिक अस्पताल जाने के बजाय पारंपरिक झाड़-फूंक और अन्य अंधविश्वास से जुड़े उपायों के चक्कर में अपना कीमती समय बर्बाद कर देते हैं। इस तरह की अनावश्यक देरी से इलाज में बाधा उत्पन्न हो सकती है और कई बार मरीज की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि उसे बचाना बेहद कठिन हो जाता है।
तत्काल चिकित्सीय सहायता है जरूरी
विशेषज्ञ डॉक्टर ने आम जनता से यह सख्त अपील की है कि सांप काटने की घटना के बाद किसी भी प्रकार की भ्रांति, भ्रम या झाड़-फूंक के जाल में बिल्कुल न फंसें। ऐसी स्थिति में समय गंवाए बिना तुरंत पेशेवर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। पीड़ित व्यक्ति को तुरंत उसके सबसे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) या जिला अस्पताल ले जाया जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर मरीज को सीधे मेरठ स्थित लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में लाकर भी उचित उपचार कराया जा सकता है।
क्षेत्र में पाए जाने वाले जहरीले सांप
डॉ. अरविंद कुमार ने यह भी जानकारी दी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और इसके आसपास के विभिन्न जनपदों में कई प्रजाति के खतरनाक और विषैले सांप पाए जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से कोबरा, स्नेल वाइपर और करैत जैसे अत्यंत जहरीले सांप शामिल हैं। इन सभी अलग-अलग प्रजातियों के सांपों के विष का शरीर पर प्रभाव भी अलग-अलग प्रकार का होता है, और समय पर इलाज न मिलने पर सर्पदंश किसी भी इंसान के लिए जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।
एंटी स्नेक वेनम की निशुल्क सुविधा
डॉक्टर के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि दुर्भाग्यवश किसी व्यक्ति को सांप डस ले, तो उसे एक पल की भी देरी किए बिना फौरन नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना ही एकमात्र समझदारी है। वहां तैनात डॉक्टरों द्वारा आवश्यक चिकित्सकीय जांच करने के बाद जरूरत के मुताबिक मरीज को एंटी स्नेक वेनम (ASV) का इंजेक्शन दिया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन की तरफ से प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह जीवनरक्षक उपचार सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, जिससे गरीब से गरीब सर्पदंश के मरीज को भी समय पर सही इलाज मिल सके।
बरसात के मौसम में सावधानी
बारिश के इस मौसम में जहरीले सांपों के बिलों से बाहर निकलने की घटनाएं आम तौर पर काफी बढ़ जाती हैं, इसलिए सभी नागरिकों को अपने घरों के अंदर और आसपास के इलाकों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी अप्रत्याशित सर्पदंश की स्थिति में घरेलू नुस्खों या झाड़-फूंक के फेर में पड़कर कीमती समय गंवाने के बजाय तुरंत किसी अच्छे अस्पताल पहुंचना सबसे ज्यादा जरूरी कदम है। समय पर सही उपचार मिलने से मरीज की गंभीर स्थिति को टालने और उसकी जान बचाने की संभावना सबसे अधिक बढ़ जाती है।



















