कार्यालयों में घंटों लगातार बैठकर काम करने की आधुनिक जीवनशैली रीढ़ की हड्डी के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। प्रतिदिन आठ से दस घंटे तक कुर्सी पर जमे रहने के कारण लोगों की पीठ और कमर में जटिल बीमारियां तेजी से पनप रही हैं। मेरठ में स्वास्थ्य जागरूकता के दौरान वरिष्ठ स्पाइन स्पेशलिस्ट डॉ. भावुक गर्ग ने चेतावनी दी कि यदि काम के दौरान लगातार बैठने अथवा खड़े रहने की आदत नहीं बदली गई, तो रीढ़ की हड्डी स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि समय रहते सही आदतें अपनाकर स्पाइन से जुड़ी कई गंभीर दिक्कतों से बचा जा सकता है।
हर एक घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लेना क्यों है जरूरी?
लगातार काम के दौरान शारीरिक मुद्राओं में सुधार लाने के लिए डॉ. भावुक गर्ग ने एक व्यावहारिक 55 मिनट का नियम पेश किया है। उनके अनुसार, नौकरीपेशा लोगों को यह मानकर चलना चाहिए कि एक घंटे के समय चक्र में कार्य के लिए केवल 55 मिनट ही उपलब्ध हैं। शेष 5 मिनट का उपयोग अपनी डेस्क या कुर्सी से उठकर हल्के टहलने और शरीर की स्ट्रेचिंग के लिए किया जाना चाहिए। यह छोटा सा अंतराल रीढ़ की डिस्क्स पर पड़ रहे निरंतर दबाव को राहत प्रदान करता है और रक्त संचार को बनाए रखता है।
इसके साथ ही, काम करने के दौरान सही पॉश्चर बनाए रखना बेहद आवश्यक है। सही मुद्रा न अपनाने का दुष्परिणाम केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों में भी काइफोसिस यानी कूबड़ निकलने की समस्या तेजी से देखी जा रही है। डॉ. गर्ग ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे घर पर ही सरल 'मिरर टेस्ट' (दर्पण परीक्षण) के जरिए बच्चों के कंधे और पीठ के झुकाव की जांच कर सकते हैं, ताकि शुरुआती चरण में ही गलत पॉश्चर का पता लगाकर उपचार शुरू किया जा सके।
अवेक स्पाइन सर्जरी और रोबोटिक तकनीक का कमाल
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के विकास पर प्रकाश डालते हुए डॉ. भावुक गर्ग ने बताया कि रीढ़ की जटिल शल्य चिकित्सा अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और सुलभ हो चुकी है। अब मरीजों को पारंपरिक सर्जरी की तरह पूरी तरह बेहोश करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। 'अवेक स्पाइन सर्जरी' जैसी आधुनिक एनेस्थीसिया पद्धतियों की मदद से केवल प्रभावित हिस्से को सुन्न किया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज होश में रहता है और ऑपरेशन थिएटर में अपनी पसंद के गाने सुनते हुए सहजता से सर्जरी करवा सकता है।
डॉ. गर्ग ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में चिकित्सा का मुख्य ध्यान मिनिमली इनवेसिव तकनीकों यानी कम चीर-फाड़ वाली पद्धतियों पर केंद्रित है। न्यूरो नेविगेशन सूट और रोबोटिक सहायता से लैस एडवांस्ड तकनीक के उपयोग से सर्जरी के दौरान अत्यधिक सटीकता प्राप्त होती है। इन उन्नत तकनीकों के माध्यम से मरीज को न्यूनतम दर्द का सामना करना पड़ता है, रक्तस्राव कम होता है और वह अस्पताल से बहुत जल्द स्वस्थ होकर अपने दैनिक जीवन में लौट सकता है।
मृत्युंजय हॉस्पिटल मेरठ में ओपीडी सेवा शुरू
स्थानीय निवासियों को रीढ़ और हड्डियों के विश्वस्तरीय इलाज की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से मेरठ स्थित मृत्युंजय बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक्स एवं स्पाइन सर्जरी ओपीडी की शुरुआत की गई है। इस नई परामर्श सेवा के अंतर्गत डॉ. भावुक गर्ग प्रत्येक माह के तीसरे शुक्रवार को पूर्वाहन 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मरीजों को अपनी विशेषज्ञ सलाह देंगे। इस स्वास्थ्य सेवा के शुभारंभ के अवसर पर वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शुभांकर भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी हड्डियों व जोड़ों की उचित देखभाल पर जोर दिया।



















