दिनभर ऑफिस की कुर्सी से चिपके रहना अब आराम नहीं, बल्कि सेहत के लिए एक धीमा खतरा बन चुका है। अगर आपकी डेस्क जॉब आपको 8 से 10 घंटे तक एक ही जगह बैठाए रखती है और हिलने-डुलने का मौका मुश्किल से मिलता है, तो शरीर पर इसका असर चुपचाप बढ़ता जा रहा है। लेकिन राहत की बात यह है कि इस खतरे से बचने का तरीका न तो महंगा है और न ही मुश्किल, बस हर घंटे पांच मिनट की चहलकदमी।
एक नई ग्लोबल स्टडी में सामने आया है कि अगर हर एक घंटे में सिर्फ पांच मिनट का वॉक ब्रेक लिया जाए, तो लगातार बैठे रहने से होने वाले गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान को लगभग पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। यह रिसर्च ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में ऑनलाइन प्रकाशित हुई है।
बैठने के घंटे और बढ़ता खतरा
आंकड़े बताते हैं कि हाई-इनकम वाले देशों में लोग औसतन दिनभर में 11 से 12 घंटे बैठकर गुजार देते हैं। भारत जैसे विकासशील देश में भी व्हाइट-कॉलर यानी ऑफिस की नौकरी करने वालों की हालत इससे अलग नहीं है। इतने लंबे समय तक की शारीरिक निष्क्रियता मोटापा, डायबिटीज, हार्ट अटैक, बिगड़ती मेंटल हेल्थ और असमय मौत के खतरे को तेजी से बढ़ा देती है।
19,342 लोगों पर हुई असली जिंदगी की जांच
इस खतरे को टालने का सबसे कारगर तरीका ढूंढने के लिए अमेरिका के नेशनल पब्लिक रेडियो (NPR) की ओर से आयोजित ‘बॉडी इलेक्ट्रिक चैलेंज’ के तहत 19,342 वयस्कों पर दो हफ्तों तक रियल-वर्ल्ड कंडीशंस में परखा गया। इसमें लोगों को 30, 60 और 120 मिनट के अंतराल पर ब्रेक लेने को कहा गया। नतीजा यह निकला कि ब्रेक जितना नियमित होगा, फायदा भी उतना ही ज्यादा मिलेगा। प्रभावशीलता और व्यावहारिकता दोनों के लिहाज से ‘हर घंटे पांच मिनट की वॉक’ सबसे बढ़िया बैलेंस साबित हुई।
पांच मिनट की वॉक से शरीर को क्या मिलता है
हर घंटे सीट से उठकर की गई यह छोटी सी चहलकदमी कई बड़े फायदे देती है:
- बैठने के नुकसान से बचाव: यह ब्रेक शरीर में जमने वाले फैट और ब्लड शुगर के स्तर को बिगड़ने से रोकता है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन दुरुस्त रखता है और मांसपेशियों को एक्टिव बनाए रखता है।
- मूड होता है तरोताजा: स्टडी में शामिल कर्मचारियों ने माना कि इन पांच मिनटों से उनका मूड काफी बेहतर हुआ और मानसिक तनाव घटा।
- थकान दूर: लगातार स्क्रीन देखने और बैठे रहने से आने वाली सुस्ती और थकान पल भर में गायब हो जाती है।
- काम पर कोई बुरा असर नहीं: सबसे अहम बात यह कि इन छोटे ब्रेक्स से कर्मचारियों के वर्क परफॉर्मेंस पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ा। यानी सेहत और काम दोनों साथ-साथ संभल जाते हैं।
पब्लिक हेल्थ के लिए नया गेमचेंजर
रिसर्चर्स मानते हैं कि इस आसान फॉर्मूले को अब हर देश की फिजिकल एक्टिविटी गाइडलाइंस का हिस्सा बना देना चाहिए, क्योंकि यह कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के लिए फायदेमंद है।
तो देर किस बात की, आज ही अपने फोन या स्मार्टवॉच में हर घंटे का अलार्म लगा लीजिए। जैसे ही अलार्म बजे, कुर्सी से उठिए, थोड़ा पानी पीजिए या ऑफिस के कॉरिडोर में ही पांच मिनट टहल आइए। लंबी और सेहतमंद जिंदगी का रास्ता इसी छोटी सी वॉक से होकर निकलता है।













