13 सितंबर को क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल चॉकलेट डे, जानें वर्ल्ड चॉकलेट डे से इसका अंतर और मीठा इतिहासमावा की जगह मिल्क पाउडर से बनाएं मथुरा के प्रसिद्ध पेड़े, जानें बेहद आसान तरीकाबोकारो की शेफ शालू से सीखें पारंपरिक बंगाली बैंगन भाजा बनाने की बेहद आसान विधि, स्वाद ऐसा कि सब उंगलियां चाटते रह जाएंगेसिंह साप्ताहिक राशिफल 13 से 19 सितंबर 2026: 17 सितंबर के बाद ग्रहों का बड़ा राशि परिवर्तन बढ़ाएगा धन और करियर में हलचलरणथंभौर दुर्ग में चौदह सितंबर से शुरू हो रहा ऐतिहासिक त्रिनेत्र गणेश मेला श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ीकद्दूकस नारियल और गुड़ का कमाल: जानिए मिथिला की वह पारंपरिक मिठाई जो आपकी डाइट में बिल्कुल फिट बैठेगीशनि देव की उल्टी चाल के आखिरी 90 दिन: मेष, वृषभ और मिथुन सहित इन राशियों के करियर और बैंक बैलेंस पर पड़ेगा सीधा असरनेशनल सीलिएक अवेयरनेस डे पर जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय जहां साधारण रोटी भी बन जाती है सेहत की दुश्मनमूलांक 5 राशिफल 12 सितंबर 2026: बुध के प्रभाव से सुलझेंगे रहस्य, मगर बातचीत में बरतें सावधानीसरकारी सहायता से वंचित कोटा के मलखंभ कलाकारों ने बिखेरी चमक, टीवी शो 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल में पहुंचे
नाड़ी देखकर बीमारी पकड़ लेते हैं गोंडा के यह वैद्य, जड़ी-बूटियों के भरोसे बलरामपुर-बहराइच तक से आ रहे मरीजस्वास्थ्य
7 सित॰ 2026, 12:45 am (5 दिन पहले)· 1

नाड़ी देखकर बीमारी पकड़ लेते हैं गोंडा के यह वैद्य, जड़ी-बूटियों के भरोसे बलरामपुर-बहराइच तक से आ रहे मरीज

गोंडा के वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बिना किसी अस्पताल के, अपने घर पर ही नाड़ी परीक्षण और जड़ी-बूटियों से इलाज करते हैं, जिनके पास बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच से भी रोज मरीज पहुंचते हैं।

गोंडा जिले में एक ऐसे वैद्य हैं जिनके पास न कोई बड़ा अस्पताल है, न कोई महंगी जांच मशीन, फिर भी उनके दरवाजे पर रोज सुबह से मरीजों की भीड़ लग जाती है। नाम है वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति, जो सालों से सिर्फ पारंपरिक आयुर्वेद और घर की बनाई जड़ी-बूटियों के सहारे लोगों की तकलीफ दूर कर रहे हैं। खास बात यह है कि इलाज कराने सिर्फ गोंडा के लोग नहीं आते, बल्कि बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे पड़ोसी जिलों से भी मरीज रोजाना यहां पहुंचते हैं, यानी उनकी पहचान अब जिले की सीमा से बाहर तक फैल चुकी है।

घर को ही बना लिया इलाज केंद्र

प्रजापति के पास इलाज के लिए न कोई बड़ा अस्पताल है, न कोई आधुनिक सेंटर, वह बरसों से अपने घर पर बैठकर ही मरीजों को देखते आ रहे हैं। उनकी जांच का तरीका आज के डॉक्टरों से बिल्कुल अलग है, वह पहले मरीज की नाड़ी थामकर बीमारी भांपने की कोशिश करते हैं और उसके बाद ही यह तय करते हैं कि किस जड़ी-बूटी की जरूरत है। यह हुनर उन्हें किसी मेडिकल कॉलेज ने नहीं, बल्कि वैद्यों के अपने पारंपरिक समाज ने सिखाया है, जहां यह ज्ञान बरसों से गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा है।

ये भी पढ़ें

घर पर ही तैयार होती हैं दर्जनों औषधियां

उनके घर में ही कई तरह की आयुर्वेदिक औषधियां और हर्बल पाउडर बनाए जाते हैं। इनमें जंगली शतावर, बेल की गिरी का चूर्ण, करेले का पाउडर, नीम की पत्ती और छाल से बना चूर्ण, अश्वगंधा, जराकुश और तुलसी पंचांग जैसी सामग्री शामिल है। हर मरीज को यह औषधियां एक जैसी नहीं, बल्कि उसकी बीमारी और शरीर की स्थिति देखकर अलग-अलग मात्रा और तरीके से दी जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे पुरानी आयुर्वेदिक किताबों में बताया गया है।

जोड़ों के दर्द से सर्दी-खांसी तक, सबसे ज्यादा भीड़ किनकी

प्रजापति बताते हैं कि उनके पास सबसे ज्यादा जोड़ों के दर्द, पेट से जुड़ी दिक्कतों, त्वचा रोग, सर्दी-जुकाम और शरीर की सामान्य कमजोरी के मरीज पहुंचते हैं, यानी ज्यादातर वही परेशानियां जिनमें लोग महंगे इलाज से पहले घरेलू और पारंपरिक नुस्खे आजमाना चाहते हैं। उनका कहना है कि आयुर्वेदिक तरीके से कई मरीजों को राहत मिल जाती है, लेकिन वह इसे हर बीमारी का इलाज नहीं मानते, इसलिए बीमारी गंभीर दिखते ही मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास भेज देते हैं ताकि देरी की वजह से नुकसान न हो।

चार जिलों से जुड़ा भरोसे का रिश्ता

गोंडा के अलावा बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और आसपास के कई इलाकों से लोग सिर्फ इस भरोसे पर यहां पहुंचते हैं कि पुरानी पद्धति से उन्हें राहत मिल सकती है। बड़े अस्पतालों और आधुनिक मशीनों के इस दौर में भी जड़ी-बूटियों और नाड़ी परीक्षण पर टिका यह यकीन कम नहीं हुआ है, यही वजह है कि इस छोटे से घरेलू इलाज केंद्र पर मरीजों की आवाजाही रोज बनी रहती है।

सवाल-जवाब

गोंडा के इस वैद्य का नाम क्या है?
इनका नाम वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति है।
वह मरीजों की बीमारी कैसे पहचानते हैं?
वह मरीज की नाड़ी थामकर बीमारी का अंदाजा लगाते हैं और उसी हिसाब से जड़ी-बूटी तय करते हैं।
उनके पास किन जिलों से मरीज आते हैं?
गोंडा के अलावा बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे जिलों से रोजाना मरीज आते हैं।
वह कौन-कौन सी जड़ी-बूटियां तैयार करते हैं?
जंगली शतावर, बेल की गिरी का चूर्ण, करेले का पाउडर, नीम की पत्ती और छाल का चूर्ण, अश्वगंधा, जराकुश और तुलसी पंचांग जैसी औषधियां तैयार करते हैं।
उनके पास सबसे ज्यादा किन बीमारियों के मरीज आते हैं?
सबसे ज्यादा जोड़ों के दर्द, पेट की परेशानी, त्वचा रोग, सर्दी-खांसी और सामान्य कमजोरी के मरीज आते हैं।
क्या वह हर बीमारी का इलाज करते हैं?
नहीं, गंभीर बीमारी होने पर वह मरीजों को तुरंत डॉक्टर से जांच कराने की सलाह देते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR