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नवजात शिशुओं में पीलिया की दर्दभरी जांच से मिली मुक्ति, सीतामढ़ी के अस्पतालों में शुरू हुई 2 सेकंड वाली नई बिलीरुबीन मीटर तकनीकस्वास्थ्य
29 जुल॰ 2026, 2:32 pm (46 दिन पहले)· 0

नवजात शिशुओं में पीलिया की दर्दभरी जांच से मिली मुक्ति, सीतामढ़ी के अस्पतालों में शुरू हुई 2 सेकंड वाली नई बिलीरुबीन मीटर तकनीक

सीतामढ़ी जिले के 17 प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर 37 आधुनिक ट्रांसक्यूटेनियस बिलीरुबीन मीटर उपकरण तैनात किए गए हैं, जिससे नवजात शिशुओं में बिना सुई चुभाए महज 2 सेकंड में जॉन्डिस के स्तर का सटीक आकलन संभव होगा।

सीतामढ़ी जिले में नवजात शिशुओं की चिकित्सकीय जांच प्रणाली में एक बड़ा और राहत देने वाला बदलाव किया गया है। अब शिशुओं को पीलिया यानी जॉन्डिस के परीक्षण के लिए दर्दनाक सुई चुभाने या लैब सैंपल देने के कष्टप्रद दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग की नई पहल के तहत जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहद आधुनिक डिजिटल उपकरणों से लैस कर दिया गया है। यह आधुनिक तकनीक नवजात बच्चों के शरीर में बिना किसी सुई या खून निकाले सेकंडों में पीलिया का सटीक स्तर बता देती है।

बिना सुई और बिना दर्द के सेकंडों में होगी जांच

पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं में नवजात बच्चों का ब्लड सैंपल लेना चिकित्साकर्मियों और अभिभावकों दोनों के लिए एक जटिल और दर्दनाक प्रक्रिया मानी जाती थी। नवजात की संवेदनशील त्वचा और छोटी नसों से खून निकालने के दौरान बच्चे अत्यधिक पीड़ा महसूस करते थे, और साथ ही बाहरी संक्रमण का अंदेशा भी हमेशा बना रहता था। इस नई व्यवस्था में 37 आधुनिक ट्रांसक्यूटेनियस बिलीरुबीन मीटर मशीनें जिले के 17 प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित की गई हैं। यह पोर्टेबल डिवाइस शिशु के माथे या छाती पर हल्का सा स्पर्श कराते ही मात्र 1 से 2 सेकंड की अवधि में बिलीरुबीन का स्तर रिकॉर्ड कर लेती है।

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रिपोर्ट के लंबे इंतजार से राहत और त्वरित इलाज

सुई वाले ब्लड सैंपल परीक्षण प्रक्रिया में लैब से रिपोर्ट प्राप्त करने में कम से कम 1 घंटे का समय लग जाता था। आपातकालीन स्थितियों में यह एक घंटे का विलंब नवजात शिशुओं के इलाज की शुरुआत में बाधा बनता था। नई बिलीरुबीन मीटर तकनीक के आ जाने से जांच परिणाम तात्कालिक और पूरी तरह पारदर्शी हो गए हैं। हाल ही में सिविल सर्जन डॉ. आर.के. यादव ने डुमरा सीएचसी का दौरा करके एक नवजात शिशु पर इस मशीन का प्रत्यक्ष सफल परीक्षण किया और इसकी प्रभावशीलता का जायजा लिया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान सभी मौजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले सभी नवजात बच्चों की नियमित जॉन्डिस जांच अनिवार्य रूप से की जाए।

0 से 30 दिन के शिशुओं के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था

इस अत्याधुनिक डिजिटल डिवाइस की आपूर्ति बीएमएसआईसीएल द्वारा स्वास्थ्य विभाग को की गई है। तकनीशियन सूरज कुमार ने उपकरण की तकनीकी विशेषताओं की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह डिवाइस विशेष रूप से 0 से 30 दिन तक के यानी एक महीने तक की उम्र वाले नवजात शिशुओं के बिलीरुबीन स्तर को मापने के लिए तैयार की गई है। डॉक्टरों का मानना है कि जन्म के शुरुआती हफ्तों में नवजात बच्चों में जॉन्डिस का खतरा काफी अधिक होता है। यदि समय पर इस बीमारी की पहचान न की जाए और रक्त में बिलीरुबीन का स्तर अत्यधिक बढ़ जाए, तो यह बच्चे के मस्तिष्क पर गंभीर और स्थायी असर डाल सकता है। अब इस पोर्टेबल मशीन की मदद से डॉक्टर बिना किसी देरी के सटीक उपचार योजना तय कर पा रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों के परिवारों को बड़ी राहत

जिले के दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले परिवारों के लिए यह तकनीकी सुधार एक बड़ी राहत साबित हो रहा है। पहले ग्रामीण अभिभावकों को लैब रिपोर्ट का घंटों इंतजार करना पड़ता था। सीतामढ़ी स्वास्थ्य विभाग ने सभी 17 केंद्रों के चिकित्सा अधिकारियों और तकनीशियनों को इस उपकरण के सही इस्तेमाल, सुरक्षा मापदंडों और उचित रखरखाव के आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह सुविधा तुरंत उपलब्ध होने से माता-पिता को रिपोर्ट का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है, और साथ ही संक्रमण का खतरा शून्य होने से नवजात बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा और अधिक मजबूत हो गई है।

सवाल-जवाब

सीतामढ़ी के स्वास्थ्य केंद्रों पर कौन सा नया उपकरण तैनात किया गया है?
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 17 केंद्रों पर 37 आधुनिक ट्रांसक्यूटेनियस बिलीरुबीन मीटर उपकरण तैनात किए हैं।
इस नई मशीन से नवजात बच्चों की पीलिया जांच में कितना समय लगता है?
इस गैर-आक्रामक मशीन से शिशु के माथे या छाती को स्पर्श कराकर महज 1 से 2 सेकंड में परिणाम मिल जाता है।
पुरानी जांच पद्धति की तुलना में यह नई तकनीक कैसे बेहतर है?
पुरानी पद्धति में सुई से ब्लड सैंपल लेना पड़ता था और रिपोर्ट के लिए 1 घंटे का इंतजार करना पड़ता था, जबकि इस नई मशीन से बिना सुई चुभाए तुरंत रिपोर्ट मिलती है और संक्रमण का खतरा शून्य रहता है।
यह उपकरण किस उम्र के बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है?
तकनीशियन सूरज कुमार के अनुसार यह डिजिटल डिवाइस 0 से 30 दिन तक के नवजात शिशुओं में बिलीरुबीन का स्तर मापने के लिए तैयार की गई है।
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