राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल में नशे की लत से पीड़ित मरीजों की मदद के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अस्पताल परिसर के अंतर्गत मनोचिकित्सा केंद्र में 10 बेड की क्षमता वाला एक विशेष इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) फैसेलिटी सेंटर शुरू किया गया है। इस केंद्र में शराब, स्मैक, अफीम, गांजा, गुटखा, तंबाकू, सिगरेट और नींद की गोलियों जैसी जानलेवा आदतों से जूझ रहे लोगों को पूरी तरह नि:शुल्क इलाज, आवश्यक दवाएं और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रभावित लोगों को बिना किसी संकोच के स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़कर उन्हें सामान्य जीवन में वापस लाना है।
नशा मुक्ति के लिए विशेष IPD सुविधा और बेड क्षमता
यह नया नशा मुक्ति केंद्र सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित मनोचिकित्सा केंद्र के भीतर स्थापित किया गया है। शुरुआती चरण में भर्ती होकर इलाज कराने वाले मरीजों के लिए 10 बेड का समर्पित वार्ड तैयार किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में मरीजों की बढ़ती संख्या और मांग की समीक्षा के बाद बेड की संख्या में और वृद्धि की जाएगी। इस समर्पित वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को चौबीसों घंटे चिकित्सीय देखरेख में रखा जाएगा, ताकि नशे की अचानक लत छोड़ने से होने वाली शारीरिक और मानसिक दिक्कतों को सही समय पर नियंत्रित किया जा सके।
NDDTC का सहयोग और मेडिकेशन असिस्टेड ट्रीटमेंट
इस फैसेलिटी सेंटर के सुचारू संचालन के लिए नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (NDDTC) की ओर से विशेष दवाइयां और आवश्यक चिकित्सीय सामग्री मुफ्त मुहैया कराई जा रही है। अस्पताल के नोडल अधिकारियों और मनोचिकित्सकों के अनुसार, यह व्यवस्था लंबे समय से गंभीर नशे के शिकार लोगों के लिए बेहद राहत देने वाली साबित होगी। यहां केवल शुरुआती डिटॉक्सिफिकेशन की दवाएं ही नहीं दी जाएंगी, बल्कि लंबे समय तक नशे की तलब को दबाने वाली दवाएं भी नि:शुल्क प्रदान की जाएंगी। विशेष रूप से अफीम और स्मैक जैसे ओपिओइड नशे के शिकार मरीजों के लिए मेडिकेशन असिस्टेड ट्रीटमेंट (MAT) की व्यवस्था की गई है, जबकि गांजा, शराब तथा नींद की गोलियों की निर्भरता को खत्म करने के लिए भी लक्षित थेरेपी दी जाएगी।
युवा वर्ग पर प्रभाव और परिवार के साथ काउंसलिंग
सवाई मानसिंह अस्पताल द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि नशे की गिरफ्त में आने वाले मरीजों में सबसे बड़ी संख्या 20 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं की है। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र में केवल मरीजों का ही इलाज नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके परिजनों की भी गहन काउंसलिंग की जाएगी। मनोचिकित्सकों का मानना है कि नशा छोड़ने के बाद मरीज के दोबारा उसी लत में गिरने की संभावना बनी रहती है, जिसे परिजनों के सहयोग और सही मार्गदर्शन से रोका जा सकता है। परिजनों को यह सिखाया जाएगा कि वे घर के माहौल को कैसे सहयोगी बनाएं, ताकि मरीज पूरी तरह से ठीक होकर समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापित हो सके।



















