13 सितंबर को क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल चॉकलेट डे, जानें वर्ल्ड चॉकलेट डे से इसका अंतर और मीठा इतिहासरणथंभौर दुर्ग में चौदह सितंबर से शुरू हो रहा ऐतिहासिक त्रिनेत्र गणेश मेला श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ीनेशनल सीलिएक अवेयरनेस डे पर जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय जहां साधारण रोटी भी बन जाती है सेहत की दुश्मनसरकारी सहायता से वंचित कोटा के मलखंभ कलाकारों ने बिखेरी चमक, टीवी शो 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल में पहुंचेमावा की जगह मिल्क पाउडर से बनाएं मथुरा के प्रसिद्ध पेड़े, जानें बेहद आसान तरीकामूलांक 3 राशिफल 12 सितंबर 2026: बृहस्पति और भाग्यांक 4 के प्रभाव से आज विचारों को दें सही दिशा, जानें हर क्षेत्र का हालबोकारो की शेफ शालू से सीखें पारंपरिक बंगाली बैंगन भाजा बनाने की बेहद आसान विधि, स्वाद ऐसा कि सब उंगलियां चाटते रह जाएंगेमूलांक 4 राशिफल 12 सितंबर 2026: लुभावने प्रस्तावों से रहें सावधान, जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचेंमीन राशिफल 12 सितंबर: पार्टनर का मिलेगा सहयोग, करियर और आर्थिक मोर्चे पर होगा फायदाड्रेसिंग रूम लीक मामला: पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान और इमाम उल हक से साइबर क्राइम एजेंसी ने की 4 घंटे पूछताछ
पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से वजन घटाने और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मिलती है मददस्वास्थ्य
23 अग॰ 2026, 6:21 pm (20 दिन पहले)· 4

पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से वजन घटाने और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मिलती है मदद

प्राचीन भारतीय योग परंपरा में शामिल पश्चिमोत्तानासन शरीर के पिछले हिस्से को मजबूत बनाने, पेट की चर्बी घटाने और पाचन सुधारने में काफी असरदार माना जाता है।

भारतीय योग संस्कृति में शरीर और मन की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए अनेक आसनों का जिक्र मिलता है। इनमें पश्चिमोत्तानासन को एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्रा माना गया है, जिसमें जमीन पर बैठकर शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की तरफ झुकाया जाता है। इस प्रक्रिया से रीढ़ की हड्डी, कमर और पैरों के पिछले हिस्से की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव पैदा होता है, जिससे शरीर का लचीलापन धीरे-धीरे सुधरने लगता है।

यह योगासन मुख्य रूप से तीन संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है। इसमें 'पश्चिम' शब्द का अर्थ शरीर का पिछला भाग होता है, 'उत्तान' का मतलब तीव्र खिंचाव से है और 'आसन' का तात्पर्य विशेष शारीरिक मुद्रा से है। इसके नाम से ही यह साफ हो जाता है कि इस क्रिया में शरीर के पूरे पिछले हिस्से को अच्छी तरह स्ट्रेच किया जाता है ताकि उसका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

ये भी पढ़ें

इस आसन को करने की प्रक्रिया में जमीन पर बैठकर पैरों को सामने फैलाया जाता है और आगे झुकते हुए हाथों से पैर के पंजों को पकड़ने का प्रयास किया जाता है। इस मुद्रा से रीढ़ और पैरों की मांसपेशियों पर दबाव व खिंचाव दोनों आते हैं। पारंपरिक योग पद्धति में इसे हठ योग के प्रमुख आसनों में खास स्थान दिया गया है।

आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, पश्चिमोत्तानासन शरीर के पिछले हिस्से में एक प्रभावी खिंचाव पैदा करता है। इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी की लचक बरकरार रखने और पेट के भीतरी अंगों को सक्रिय करने में सहायता मिलती है। यह आसन पेट के आसपास जमा होने वाली अतिरिक्त चर्बी को नियंत्रित करने में भी मददगार माना जाता है, हालांकि केवल एक योगासन के भरोसे वजन या पेट की चर्बी कम होने का दावा नहीं किया जा सकता।

नियमित रूप से योग करने से शरीर लचीला बनता है, मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत महसूस करता है। योग पद्धति में इस मुद्रा को कब्ज जैसी पेट से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए भी उपयोगी बताया गया है। इसके अलावा कुछ योग और आयुर्वेदिक मान्यताओं में इसे डायबिटीज तथा मानसिक तनाव के प्रबंधन में सहायक माना गया है, लेकिन इसे किसी भी गंभीर बीमारी का पक्का इलाज नहीं समझा जाना चाहिए।

इस योगासन को करने के लिए सुबह का वक्त सबसे उत्तम माना जाता है। इसे हमेशा खाली पेट ही करने की सलाह दी जाती है ताकि शरीर आसानी से स्ट्रेच हो सके और दिन की शुरुआत तरोताजा ऊर्जा के साथ हो सके।

यदि सुबह के समय वक्त न मिल पाए, तो शाम के वक्त भी इस आसन का अभ्यास किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि भोजन करने के तुरंत बाद कभी भी योग नहीं करना चाहिए। आमतौर पर मुख्य भोजन के लगभग 4 से 5 घंटे बाद ही इस अभ्यास को करने की सलाह दी जाती है। जो लोग इसे पहली बार सीख रहे हैं, उन्हें किसी कुशल योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना चाहिए ताकि सही तकनीक अपनाई जा सके।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

यदि किसी व्यक्ति को पीठ या कमर में गंभीर दर्द रहता है, स्लिप डिस्क की शिकायत है या फिर हर्निया की समस्या है, तो पश्चिमोत्तानासन करने से पहले डॉक्टर या किसी अनुभवी योग गुरु से परामर्श अवश्य करना चाहिए। इसके अलावा पेट की हाल ही में हुई सर्जरी या शरीर पर किसी गंभीर चोट की स्थिति में भी इस आसन को करने से पूरी तरह बचना चाहिए।

सवाल-जवाब

पश्चिमोत्तानासन क्या है?
यह एक प्राचीन योग मुद्रा है जिसमें जमीन पर बैठकर आगे की ओर झुका जाता है, जिससे रीढ़ और पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव होता है।
इस आसन को करने का सबसे सही समय कौन सा है?
इसे सुबह खाली पेट करना सबसे उपयुक्त माना जाता है, हालांकि भोजन के 4-5 घंटे बाद शाम को भी किया जा सकता है।
क्या यह वजन घटाने में मदद करता है?
यह पेट के आसपास की अतिरिक्त चर्बी को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है, लेकिन केवल इसी आसन से वजन घटने की गारंटी नहीं होती।
किन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए?
गंभीर कमर दर्द, स्लिप डिस्क, हर्निया या हाल ही में पेट की सर्जरी कराने वाले लोगों को यह आसन करने से बचना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR