दौसा में दीपावली का उल्लास: नीलकंठ महादेव मंदिर में उतरा दीपों का संसार, आतिशबाजी से रोशन हुआ आसमानमलेशियाई राजनीति में बड़ा मोड़, नजीब रज्जाक ने 100 करोड़ का जुर्माना भरकर जेल से जेल जैसे घर की ओर किया रुखमूलांक 7 राशिफल 8 नवंबर 2026: करियर में नई दिशा मिलने के योग, किसी खास शख्स से होगा संपर्कनागौर में एमएसपी पर मूंग और मूंगफली खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, खुले बाजार में इतने लाख कट्टे बेच चुके किसानमूलांक 8 राशिफल 8 नवंबर 2026: दिनचर्या से ऊब और नई रचनात्मकता की गूंजअलवर में जनाजे में जा रहे परिवार पर हमला, साइड देने के विवाद में 50 से अधिक लोगों ने पीटामिडटर्म चुनाव के बाद डोनाल्ड ट्रंप का बयान, शेयर बाजार में गिरावट के लिए डेमोक्रेट्स को ठहराया जिम्मेदारविवेक ओबेरॉय ने रामायण को बताया महायज्ञ, विद्युतजिह्वा का किरदार निभाने पर जताया आभारनिशा भगत मौत मामला: पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज, डीएसपी अमर कुमार पांडे को मिली जांचडीडवाना में अनोखी परंपरा, कच्ची दीपावली पर दुकानों की मालकिन बनती हैं महिलाएं
फरीदाबाद के अस्पताल में कैंसर इलाज पर बड़ा खुलासा, चौथे स्टेज के मरीज भी जी रहे हैं लंबी जिंदगीस्वास्थ्य
8 नव॰ 2026, 8:55 am (1 मिनट पहले)· 0

फरीदाबाद के अस्पताल में कैंसर इलाज पर बड़ा खुलासा, चौथे स्टेज के मरीज भी जी रहे हैं लंबी जिंदगी

मेडिकल साइंस की तरक्की के चलते अब चौथे स्टेज के कैंसर मरीज भी पांच से दस साल तक सामान्य जीवन बिता पा रहे हैं। फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. सफलता ने नई दवाओं और इलाज के आधुनिक तरीकों के बारे में अहम जानकारियां साझा की हैं।

कैंसर का जिक्र आते ही आज भी लोगों के जेहन में अनगिनत डर और आशंकाएं घर कर जाती हैं। विशेष तौर पर जब किसी मरीज की बीमारी एडवांस स्टेज यानी चौथे चरण में पहुंच जाती है, तो परिवार के लोग अक्सर मायूस होकर उम्मीदें छोड़ देते हैं। हालांकि, पिछले एक दशक के दौरान चिकित्सा विज्ञान ने चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। आज के समय में कैंसर की ऐसी अत्याधुनिक औषधियां और उपचार पद्धतियां मौजूद हैं, जिनकी सहायता से चौथे चरण के मरीज भी पांच से दस साल तक सामान्य और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल की कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. सफलता ने एक खास बातचीत में कैंसर के उपचार में आए इन क्रांतिकारी बदलावों पर खुलकर चर्चा की है।

बदल गया है चौथे स्टेज के कैंसर का पूर्वानुमान

विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग दस वर्ष पूर्व जब किसी व्यक्ति को चौथे चरण का कैंसर डिटेक्ट होता था, तो उसकी जीवन प्रत्याशा महज तीन से छह महीने तक ही आंकी जाती थी। लेकिन आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है। वर्तमान समय में स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे तमाम मरीज पांच से लेकर दस वर्षों तक का सुदीर्घ जीवन जी रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र में लगातार हो रहे शोध, विशेषकर टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और कीमोथेरेपी में आए आधुनिक सुधारों ने गंभीर रोगियों के लिए जीने की नई राहें तैयार की हैं।

ये भी पढ़ें

बायोमार्कर और रिसेप्टर्स के आधार पर सटीक दवाएं

डॉ. सफलता स्पष्ट करती हैं कि हर कैंसर की प्रकृति अलग होती है और सभी का इलाज एक समान नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, ब्रेस्ट कैंसर में हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव और एचईआर2 पॉजिटिव जैसे कई अलग-अलग वेरिएंट होते हैं। आधुनिक पैथोलॉजिकल जांचों के माध्यम से इन रूपों की सटीक पहचान की जाती है और उसी के अनुरूप औषधियां निर्धारित की जाती हैं। वर्तमान में इन खास रिसेप्टर्स को ध्यान में रखते हुए लगातार नई दवाइयों का अनुसंधान हो रहा है, और लगभग हर छह महीने के अंतराल पर बाजार में नई औषधियां आ रही हैं। इससे रोगियों के ठीक होने की संभावना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जिन मामलों में पूर्ण रूप से रिकवरी संभव नहीं होती, वहां भी इन दवाओं के जरिए जीवनकाल को कई वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।

लंग कैंसर के उपचार में भी आए व्यापक विकल्प

फेफड़ों के कैंसर के मामलों में भी चिकित्सा तकनीक ने लंबी छलांग लगाई है। डॉ. सफलता बताती हैं कि यदि लंग कैंसर के किसी मरीज में बीमारी दिमाग तक भी फैल चुकी है, तब भी आज के समय में सफल उपचार संभव है। इसके लिए ईजीएफआर और एएलके जैसे विशिष्ट म्यूटेशन की विस्तृत जांच की जाती है। यदि जांच के दौरान मरीज के शरीर में इनमें से कोई खास म्यूटेशन पाया जाता है, तो उसके आधार पर विशेष रूप से तैयार की गई टारगेटेड दवाइयां चलाई जाती हैं। इस पद्धति से उपचार पाने वाले मरीज भी पांच से दस साल तक सामान्य जीवन जी सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आधुनिक डायग्नोस्टिक्स और औषधियों के मेल ने चिकित्सा परिणामों को पहले से कहीं अधिक प्रभावी बना दिया है।

कीमोथेरेपी को लेकर व्याप्त मिथक और वास्तविकता

आम जनता के मन में कीमोथेरेपी को लेकर अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि यह प्रक्रिया अत्यधिक कष्टदायक होती है, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है। इसके कुछ सामान्य दुष्प्रभाव अवश्य हो सकते हैं, जिनके बारे में डॉक्टर उपचार शुरू होने से पहले ही रोगी को पूरी तरह अवगत करा देते हैं। इन कठिनाइयों को न्यूनतम करने के लिए आज तमाम बेहतरीन सहायक दवाइयां उपलब्ध हैं। पैक्लिटैक्सेल जैसी पारंपरिक कीमोथेरेपी औषधियों में भी अब ऐसे बदलाव किए गए हैं ताकि रोगी को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। सपोर्टिव केयर यानी सहायक देखभाल में हुई तरक्की से थेरेपी के दौरान मरीज की ओवरऑल हेल्थ और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में बहुत मदद मिल रही है।

विकल्पों की अधिकता से बढ़ी राहत

भविष्य की संभावनाओं को लेकर चिकित्सा जगत पूरी तरह आशान्वित है। अब कैंसर रोगियों के पास केवल सर्जरी या पारंपरिक कीमोथेरेपी जैसे सीमित विकल्प नहीं बचे हैं। इसके अलावा टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और सीएआर-टी सेल थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकें भी चिकित्सा जगत का हिस्सा बन चुकी हैं। किसी विशेष प्रकार के कैंसर और मरीज की शारीरिक स्थिति के आधार पर आज दस से पंद्रह विभिन्न प्रकार के औषधीय विकल्प मौजूद हो सकते हैं। इससे डॉक्टरों के लिए मरीज की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार सटीक उपचार योजना तैयार करना बेहद आसान हो गया है।

सवाल-जवाब

चौथे स्टेज के कैंसर मरीज अब कितने साल तक जीवित रह सकते हैं?
नई दवाओं और आधुनिक इलाज की मदद से चौथे स्टेज के मरीज पांच से दस साल तक सामान्य जिंदगी जी पा रहे हैं।
फरीदाबाद के किस अस्पताल में यह कैंसर स्पेशलिस्ट उपलब्ध हैं?
फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. सफलता ने इन आधुनिक उपचारों की जानकारी दी है।
लंग कैंसर के इलाज में किन म्यूटेशन की जांच की जाती है?
लंग कैंसर के मामलों में ईजीएफआर और एएलके जैसे विशिष्ट म्यूटेशन की जांच की जाती है।
कीमोथेरेपी को लेकर लोगों में क्या गलत धारणा है?
लोगों के मन में यह गलत धारणा है कि कीमोथेरेपी बेहद दर्दनाक होती है, जबकि आधुनिक सपोर्टिव केयर और दवाओं से परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा रहा है।
हर छह महीने में क्या बदलाव आ रहे हैं?
कैंसर के रिसेप्टर्स को ध्यान में रखकर हर छह महीने में नई दवाइयां विकसित की जा रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp