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ओवेरियन कैंसर के चौथे चरण से जंग जीतकर मनीषा कोइराला ने 56 की उम्र में हासिल की बेमिसाल फिटनेस, जानें उनका दैनिक रूटीनस्वास्थ्य
5 अक्तू॰ 2026, 1:29 pm (1 घंटे पहले)· 0

ओवेरियन कैंसर के चौथे चरण से जंग जीतकर मनीषा कोइराला ने 56 की उम्र में हासिल की बेमिसाल फिटनेस, जानें उनका दैनिक रूटीन

स्टेज 4 ओवेरियन कैंसर को मात देकर मनीषा कोइराला ने 56 वर्ष की उम्र में सख्त अनुशासन, सात्विक आहार और योग से खुद को पूरी तरह फिट बनाए रखा है।

बॉलीवुड में 1990 के दशक में अपनी शानदार अदाकारी और मासूमियत से दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाने वाली मनीषा कोइराला आज स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती की अद्भुत मिसाल पेश कर रही हैं। जीवन जब किसी इंसान के सामने सबसे कठिन चुनौती खड़ी करता है, तब कई लोग टूट जाते हैं, लेकिन कुछ लोग चट्टान की तरह डटकर खड़े रहते हैं। मनीषा कोइराला ने भी मौत को बेहद करीब से महसूस किया और फिर नए सिरे से अपनी जिंदगी की कहानी लिखी। आज 56 वर्ष की उम्र में उनकी बेदाग त्वचा, शारीरिक सक्रियता और आत्मविश्वास किसी भी 26 साल की युवती को पीछे छोड़ सकता है।

स्टेज 4 ओवेरियन कैंसर से सामना और जिंदगी की वापसी

मनीषा कोइराला का यह फिटनेस सफर किसी चमत्कार का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कड़ा संघर्ष छिपा है। साल 2012 का समय उनके लिए एक भयानक सपने की तरह सामने आया, जब उन्हें पता चला कि वह स्टेज 4 ओवेरियन कैंसर से जूझ रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार भी यह लड़ाई बहुत कठिन थी। कीमोथेरेपी के असहनीय दर्द, बालों के तेजी से झड़ने और लगातार गिरती शारीरिक क्षमता के दौरान कई ऐसे पल आए जब उम्मीदें टूटने लगी थीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मनीषा ने कठिन सर्जरी और लंबे मेडिकल उपचार का सामना किया। इस निरंतर संघर्ष का फल 30 अप्रैल 2013 को मिला, जब डॉक्टरों ने उन्हें औपचारिक तौर पर कैंसर-मुक्त घोषित कर दिया।

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बीमारी का पता चलने के शुरुआती दौर को याद करते हुए मनीषा ने बताया कि डाइगनोसिस के तुरंत बाद की रात उनके जीवन की सबसे अकेली और अंतहीन रातों में से एक थी। उस गहरे अंधेरे से बाहर निकलकर उन्होंने न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि पूरे रहन-सहन को बुनियादी स्तर पर बदल दिया। अपने इस पूरे अनुभव, दर्द और जीने की नई राह को उन्होंने अपनी किताब ‘हील्ड: हाउ कैंसर गिव मी ए न्यू लाइफ’ में विस्तार से साझा किया है। इस किताब में उन्होंने दर्ज किया है कि कैसे एक जानलेवा बीमारी ने उन्हें जिंदगी की असली अहमियत और शरीर की कद्र करना सिखाया।

शरीर से लड़ने के बजाय उसे समझने का दृष्टिकोण

कैंसर को मात देने के बाद मनीषा कोइराला की सोच में सबसे बड़ा बदलाव अपने शरीर को लेकर आया। उन्होंने एक बार खुलकर साझा किया था कि पहले वे जो भी करती थीं, उसमें शरीर पर दबाव रहता था, लेकिन अब वे अपने शरीर से मुकाबला करने के बजाय उसे गहराई से समझने और सही पोषण देने पर ध्यान लगाती हैं। उनकी त्वचा की चमक और ऊर्जा किसी शॉर्टकट या कॉस्मेटिक उपाय की देन नहीं है। इसके पीछे एक तय नियम, मानसिक संतुलन और खानपान की सावधानी जुड़ी हुई है। 56 की उम्र में उनकी चुस्ती यह साबित करती है कि अनुशासन से उम्र को केवल एक संख्या बनाकर रखा जा सकता है।

मोबिलिटी, स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का तालमेल

शारीरिक अभ्यास के मामले में मनीषा कोइराला का रूटीन काफी संतुलित है। वे जोड़ों को लचीला और सुरक्षित रखने के लिए हर दिन मोबिलिटी और स्ट्रेचिंग अभ्यास करती हैं। इससे शरीर को आसानी से मोड़ने, झुकने और दैनिक गतिविधियों को बिना किसी खिंचाव के पूरा करने में मदद मिलती है। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की क्षमता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, इसलिए वे नियमित तौर पर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करती हैं। इन दोनों अभ्यासों का संतुलन उनकी मांसपेशियों को मजबूती देता है और शरीर की कार्यप्रणाली को सक्रिय रखता है।

योग, मेडिटेशन और आउटडोर एक्टिविटी से मानसिक संतुलन

मनीषा का स्पष्ट मानना है कि असली तंदुरुस्ती केवल बाहरी शरीर तक सीमित नहीं होती, बल्कि मन का शांत रहना भी उतना ही आवश्यक है। मानसिक शांति, तनावमुक्ति और एकाग्रता बढ़ाने के लिए वे हर रोज लगभग 40 मिनट योग और मेडिटेशन को समर्पित करती हैं। इससे उनका ध्यान केंद्रित रहता है और आंतरिक सुकून मिलता है। बंद कमरे या जिम के अलावा उन्हें खुली हवा में समय बिताना बेहद पसंद है। जब भी मौका मिलता है, वे बाहर वॉक करने निकल जाती हैं या साइकिल चलाती हैं। ताजी हवा में यह हलचल उनके शरीर को दिनभर ऊर्जावान बनाए रखती है।

सात्विक आहार, पर्याप्त पानी और प्रोसेस्ड फूड से दूरी

मनीषा कोइराला का खानपान पूरी तरह शाकाहारी, सादा और सुपाच्य है। वे किसी जटिल या अत्यधिक सख्त डाइट प्लान के पीछे भागने के बजाय हल्का और संतुलित भोजन चुनती हैं। उनके दिन की शुरुआत हल्के गुनगुने पानी के साथ होती है। सुबह के नाश्ते में वे ताजे फल और अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स लेती हैं। दोपहर के भोजन में घर की बनी सादी दाल, रोटी और सब्जियां शामिल रहती हैं, जबकि शाम के वक्त वे मेवे खाना पसंद करती हैं। रात का खाना वे काफी हल्का रखती हैं और सोने से काफी पहले खा लेती हैं। दिनभर में वे भरपूर पानी और हरी सब्जियों का जूस पीती हैं, ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते रहें। चीनी और प्रोसेस्ड फूड को उन्होंने अपनी रसोई से पूरी तरह बाहर कर दिया है।

डेयरी और ग्लूटेन का परहेज, अल्कलाइन पानी का चयन

अपने पाचन तंत्र और शरीर के आंतरिक वातावरण को स्वस्थ रखने के लिए मनीषा डेयरी उत्पादों, विशेष रूप से गाय या भैंस के दूध, से दूरी बनाकर रखती हैं। इसके साथ ही वे ग्लूटेन वाली चीजों का सेवन भी नहीं करती हैं। शरीर में अल्कलाइन का स्तर सही बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने घर में अल्कलाइन वाटर मशीन लगवाई है और वे नियमित तौर पर उसी पानी का सेवन करती हैं। यह छोटा-सा बदलाव शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रखने में उनकी मदद करता है।

गहरी नींद और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता

दैनिक जीवन में मनीषा कोइराला नींद के साथ कोई समझौता नहीं करतीं। वे हर रात 6 से 7 घंटे की गहरी और शांत नींद लेती हैं, जिससे उनके दिमाग और मांसपेशियों को रिकवरी का पूरा समय मिलता है। उनका मानना है कि करियर, काम और सामाजिक जिम्मेदारियां अपनी जगह हैं, लेकिन खुद की सेहत हमेशा पहली कतार में होनी चाहिए। जब व्यक्ति खुद अंदर से स्वस्थ और ऊर्जावान रहेगा, तभी वह बाहर की दुनिया और जिम्मेदारियों को ठीक से संभाल सकता है।

मुश्किलों से जूझ रहे लोगों के लिए एक जीवंत प्रेरणा

मनीषा कोइराला की यह यात्रा केवल किसी फिल्मी हस्ती के फिट होने का किस्सा भर नहीं है। यह हर उस इंसान के लिए उम्मीद का संदेश है जो किसी गंभीर बीमारी या जीवन के कठिन मोड़ पर खुद को बेबस महसूस कर रहा हो। उन्होंने यह साबित करके दिखाया है कि जब इंसान का इरादा पक्का हो, तो जीवन दूसरा मौका जरूर देता है। उस दूसरे मौके को अनुशासन और सकारात्मक सोच के जरिए कैसे संवारा जाए, यह पूरी तरह हमारे हाथ में है। आज जब वे सार्वजनिक मंचों या इंटरनेट पर अपनी तस्वीरें साझा करती हैं, तो लोग उनकी सुंदरता के साथ-साथ उनके अदम्य साहस की सराहना करते हैं।

सवाल-जवाब

मनीषा कोइराला को किस बीमारी का पता चला था और कब?
मनीषा कोइराला को साल 2012 में स्टेज 4 ओवेरियन कैंसर होने का पता चला था।
मनीषा कोइराला को कब कैंसर-फ्री घोषित किया गया था?
सर्जरी और कीमोथेरेपी के सफल इलाज के बाद 30 अप्रैल 2013 को उन्हें आधिकारिक रूप से कैंसर-मुक्त घोषित किया गया था।
कैंसर से अपने संघर्ष पर मनीषा कोइराला ने कौन सी किताब लिखी है?
उन्होंने अपने कैंसर से जंग के सफर पर 'हील्ड: हाउ कैंसर गिव मी ए न्यू लाइफ' नामक किताब लिखी है।
मनीषा कोइराला अपने वर्कआउट में क्या-क्या शामिल करती हैं?
वे जोड़ों के लचीलेपन के लिए रोजाना मोबिलिटी और स्ट्रेचिंग करती हैं, मांसपेशियों के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती हैं और करीब 40 मिनट योग व मेडिटेशन करती हैं।
मनीषा कोइराला का डाइट रूटीन कैसा रहता है?
वे पूरी तरह शाकाहारी हैं और दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करती हैं। नाश्ते में फल व स्प्राउट्स, दोपहर में सादा घर का खाना और शाम को मेवे खाती हैं, जबकि चीनी, प्रोसेस्ड फूड, डेयरी और ग्लूटेन से दूर रहती हैं।
मनीषा कोइराला कितने घंटे सोती हैं?
वे शरीर और दिमाग को तरोताजा रखने के लिए रोजाना 6 से 7 घंटे की अच्छी नींद लेती हैं।
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