आज के दौर में दिल की सेहत पर कई तरह के खतरे मंडरा रहे हैं। एक तरफ खान-पान में कृत्रिम चीजों का चलन बढ़ गया है, तो दूसरी तरफ लोगों की दिनचर्या भी काफी बिगड़ चुकी है। इन तमाम वजहों से शरीर के भीतर हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं, जो आगे चलकर धमनियों को ब्लॉक करने का काम करती हैं। इसके अलावा बढ़ता प्रदूषण भी हृदय पर गहरा बुरा असर डाल रहा है। आज के समय में अधिकांश लोग तनावपूर्ण जीवन जी रहे हैं, जिसे दिल का बहुत बड़ा दुश्मन माना जाता है। भारत में हर साल हृदय रोगों के कारण 31 लाख से अधिक लोगों की जान चली जाती है, जबकि हर चार में से एक वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहा है। ऐसी विकट स्थिति में यह सवाल खड़ा होता है कि दिल की रक्षा कैसे की जाए। इस सिलसिले में पद्मश्री कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. डी एस गंभीर ने तीन ऐसे टेस्ट्स के बारे में बताया है, जिन्हें समय रहते करवाने से गंभीर खतरों से बचा जा सकता है।
डॉ. डी एस गंभीर के बताए तीन अहम टेस्ट
इस विषय पर जानकारी देते हुए डॉ. डी एस गंभीर ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए किसी भी तरह के भारी-भरकम या जटिल मेडिकल परीक्षणों की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए केवल तीन बुनियादी जांचें करवाने की जरूरत होती है। इनमें से पहली जांच को कोई भी व्यक्ति अपने घर पर ही आसानी से कर सकता है, जो कि ब्लड प्रेशर की जांच है। लोगों को लगातार नियमित अंतराल पर अपना बीपी चेक करते रहना चाहिए। दूसरी जरूरी जांच लिपिड प्रोफाइल है, जिसे साल में कम से कम एक बार जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा तीसरी जांच शुगर प्रोफाइल की है, जिसे भी हर साल कराना अनिवार्य माना गया है। यदि किसी की उम्र 40 साल तक पहुंच चुकी है, तो उसे हर साल ये तीनों टेस्ट जरूर करवाने चाहिए। समय पर जांच होने से किसी भी शुरुआती दिक्कत का पता लगाया जा सकता है और समय रहते हृदय रोगों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है जोखिम
डॉ. गंभीर का कहना है कि जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे दिल पर मंडराने वाला खतरा भी गहराने लगता है। यही कारण है कि 40 की उम्र पार करने के बाद हर व्यक्ति को अपनी सेहत के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। उन लोगों को इस मामले में और भी अधिक सावधानी बरतनी चाहिए जिनके परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है। जिन लोगों के माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी को पहले से हृदय संबंधी बीमारियां रह चुकी हैं, उन्हें खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। इसकी वजह यह है कि ऐसे लोगों के जीन में दिल की बीमारी को बढ़ावा देने वाले तत्व पहले से मौजूद हो सकते हैं।
ब्लड प्रेशर की अनदेखी है खतरनाक
हाई ब्लड प्रेशर का सीधा अर्थ यह होता है कि धमनियों या खून की नलियों के भीतर रक्त का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। सामान्य स्थिति में जब हमारा हृदय धड़कता है, तो वह एक निश्चित दबाव के साथ धमनियों पर जोर डालता है। लेकिन जब धमनियां संकरी या सख्त हो जाती हैं, तो खून को आगे की तरफ धकेलने के लिए अधिक जोर लगाना पड़ता है। इस प्रक्रिया के कारण हृदय की मांसपेशियां भी मोटी और कठोर होने लगती हैं। एक बार दिल की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद दोबारा नहीं बनती हैं, जिसके चलते हृदय धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो इससे हार्ट अटैक, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट फेल होने का बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। डॉ. डीएस गंभीर सलाह देते हैं कि कम से कम तीन महीनों के अंतराल पर अपना बीपी जरूर चेक करना चाहिए ताकि बढ़े हुए ब्लड प्रेशर का समय पर उचित इलाज किया जा सके।
हाई कोलेस्ट्रॉल और धमनियों की रुकावट
हमारे शरीर के भीतर मुख्य रूप से तीन प्रकार के कोलेस्ट्रॉल पाए जाते हैं। एक निश्चित मात्रा में ये हमारे शरीर के लिए फायदेमंद भी होते हैं, लेकिन जब रक्त में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है, तो यह धमनियों की दीवारों पर चिपकना शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे यह प्रक्रिया खून के सामान्य बहाव को बाधित करने लगती है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉ. डीएस गंभीर साल में कम से कम एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। यदि समय रहते अपनी जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए, तो हाई कोलेस्ट्रॉल को बहुत हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए सही समय पर इसकी जांच करवाना बेहद जरूरी है।
ब्लड शुगर टेस्ट की क्यों पड़ती है जरूरत
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि ब्लड शुगर की जांच तो केवल डायबिटीज के मरीजों के लिए की जाती है। हालांकि, अगर खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है, तो रक्त की नलियां धीरे-धीरे कमजोर और संकरी होने लगती हैं। इस वजह से शरीर में खून का संचार कमजोर पड़ सकता है, और यह स्थिति सीधे तौर पर हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देती है। इसी मुख्य कारण की वजह से हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार कंपलीट ब्लड शुगर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए ताकि दिल को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।



















