मानव शरीर के सुचारू संचालन के लिए आयरन एक अत्यंत आवश्यक खनिज है, जो हीमोग्लोबिन के निर्माण में मुख्य भूमिका अदा करता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जिसका प्राथमिक कार्य फेफड़ों से स्वच्छ ऑक्सीजन ग्रहण करके उसे पूरे शरीर के आंतरिक अंगों और ऊतकों तक पहुंचाना होता है। जब शरीर में आयरन की मात्रा घटने लगती है, तब हीमोग्लोबिन के उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे एनीमिया यानी खून की कमी की स्थिति पैदा हो जाती है। आम धारणा के विपरीत कि यह समस्या केवल महिलाओं तक सीमित होती है, पुरुष भी गंभीर रूप से इससे प्रभावित हो सकते हैं। पुरुषों में आयरन की कमी को नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है, क्योंकि शुरुआती चेतावनी संकेतों को अक्सर केवल दिनभर की सामान्य थकान या सुस्ती समझकर अनदेखा कर दिया जाता है। इस विषय पर डॉ. दिनेश कुमार, निदेशक, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस, ग्रेटर नोएडा ने पुरुषों में दिखने वाले प्रमुख संकेतों, अंदरूनी कारणों और बचाव के तरीकों की विस्तार से व्याख्या की है।
पुरुषों में दिखने वाले आयरन की कमी के मुख्य लक्षण
जब शरीर के भीतर इस जरूरी तत्व का स्तर नीचे गिरता है, तो रोजमर्रा की शारीरिक कार्यप्रणाली में कई परेशानियां उभरने लगती हैं। इन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है
- लगातार थकान और सुस्ती: पुरुषों में आयरन घटने का सबसे सामान्य और प्राथमिक संकेत हर समय बिना वजह थकान का बना रहना है। रात में भरपूर और अच्छी नींद लेने के बाद भी अगर व्यक्ति दिनभर कमजोरी, आलस या ऊर्जा की कमी महसूस करता है, तो यह शरीर के अंदर आयरन की गंभीर कमी की ओर इशारा करता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पर्याप्त हीमोग्लोबिन के अभाव में शरीर के विभिन्न ऊतकों तक जरूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
- सांस फूलना और धड़कनें तेज होना: हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर के मुख्य अंगों तक ऑक्सीजन की सप्लाई बनाए रखने के लिए हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नतीजतन, दिल को सामान्य से कहीं अधिक तेजी से और जोर से पंप करना पड़ता है। इसी वजह से सामान्य शारीरिक गतिविधि, जैसे सीढ़ियां चढ़ना या तेज चलना, करने पर भी सांस फूलने लगती है और हृदय की धड़कन अप्रत्याशित रूप से तेज महसूस होती है।
- त्वचा का असामान्य पीलापन: रक्त में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन की कमी से त्वचा का स्वाभाविक रंग हल्का पड़ सकता है। यह पीलापन विशेष रूप से चेहरे, आंखों की निचली पलकों के अंदरूनी अस्तर और नाखूनों की सतह पर अधिक साफ दिखाई देता है। हालांकि, केवल त्वचा के रंग में बदलाव को देखकर ही स्थिति की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती, इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
- सिर में दर्द और चक्कर आना: जब रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, तो मस्तिष्क की कोशिकाओं तक पहुंचने वाले ऑक्सीजन प्रवाह में बाधा आती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को बार-बार सिरदर्द का सामना करना पड़ता है, चक्कर आने लगते हैं और किसी भी काम में मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में कठिनाई महसूस होती है।
- कमजोर नाखून और बालों का झड़ना: पोषक तत्वों का अभाव बालों और नाखूनों की संरचना को भी नुकसान पहुंचाता है। कई पुरुषों में बाल तेजी से गिरने लगते हैं, जबकि हाथ और पैरों के नाखून अत्यधिक नाजुक, पतले होकर आसानी से चटकने या टूटने लगते हैं।
- हाथ और पैरों का लगातार ठंडा रहना: रक्त संचार में ऑक्सीजन की कमी होने पर शरीर के दूरस्थ हिस्सों, विशेष रूप से हथेलियों और तलवों का तापमान गिर सकता है। कई पुरुषों को मौसम सामान्य होने पर भी हाथ-पैर असामान्य रूप से ठंडे महसूस होते हैं।
पुरुषों में आयरन की कमी होने के प्रमुख कारण
पुरुषों के शरीर में इस मिनरल की कमी विभिन्न शारीरिक और खानपान से जुड़ी समस्याओं के कारण उत्पन्न हो सकती है। सबसे पहला कारण दैनिक भोजन में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों की पर्याप्त मात्रा शामिल न होना है। इसके अलावा, कई बार भोजन में आयरन होने के बावजूद पाचन तंत्र उसे सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे कमी पैदा हो जाती है।
शरीर के आंतरिक हिस्सों से होने वाला रक्तस्राव भी इसका एक अत्यंत संवेदनशील और बड़ा कारण माना जाता है। पेट या आंतों में लंबे समय तक होने वाली ब्लीडिंग के कारण धीरे-धीरे रक्त की कमी हो जाती है। पाचन तंत्र से जुड़ी कई बीमारियां, जैसे कि पेट में अल्सर, आंतों की अंदरूनी सूजन या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट की अन्य गड़बड़ियां, इस स्थिति को जन्म देती हैं। कुछ विशेष मामलों में पुरुषों के मल के साथ छिपा हुआ आंतरिक खून आना भी आयरन के स्तर में भारी गिरावट की मुख्य वजह बनता है।
जांच के तरीके और स्थिति से बचाव के उपाय
यदि किसी पुरुष को लगातार अकारण थकान, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना या सिरदर्द की शिकायत बनी रहती है, तो उन्हें तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। इस कमी की सटीक पहचान के लिए डॉक्टर कम्प्लीट ब्लड काउंट, हीमोग्लोबिन टेस्ट और सीरम फेरिटिन परीक्षण करवाने की सलाह देते हैं। जरूरत पड़ने पर स्थिति की गहराई जानने के लिए विस्तृत आयरन प्रोफाइल और अन्य विशेष चिकित्सीय परीक्षण भी कराए जाते हैं।
आयरन के स्तर को संतुलित रखने के लिए खानपान में व्यापक सुधार करना सबसे प्रभावी कदम है। शाकाहारी विकल्पों में हरी पत्तेदार सब्जियां, विभिन्न दालें, राजमा, चना, सोयाबीन, तिल और आयरन से समृद्ध फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन में शामिल करना चाहिए। मांसाहारी भोजन करने वाले लोग मांस और मछली के सेवन से भी आयरन की पूर्ति कर सकते हैं। इसके साथ ही, शरीर में आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन C से भरपूर चीजों का सेवन अत्यंत आवश्यक है। आंवला, नींबू, अमरूद और संतरे जैसे खट्टे फलों को डाइट का हिस्सा बनाने से खाया गया आयरन शरीर में आसानी से पच और अवशोषित हो पाता है।


















