इन दिनों स्वास्थ्य जगत में लिवर एब्सेस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। इस गंभीर समस्या के पीछे अक्सर हमारी छोटी-छोटी दैनिक लापरवाहियां और अत्यधिक शराब का सेवन मुख्य वजहों के रूप में सामने आते हैं। जो लोग नियमित रूप से शराब पीने के आदी हैं, उन्हें इस बीमारी को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि वक्त पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा रूप भी धारण कर सकती है।
लिवर एब्सेस क्या है और इसके मुख्य कारण
प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. मोहम्मद अरशद के अनुसार, लिवर एब्सेस मूल रूप से एक प्रकार का संक्रमण है जो मुख्य रूप से बैक्टीरियल या पैरासाइटिक संक्रमण की वजह से पनपता है। जब हानिकारक बैक्टीरिया लिवर के अंदर संक्रमण फैला देते हैं, तो वहां मवाद यानी पस का संग्रह जमा होने लगता है। चिकित्सा विज्ञान में इसी अवस्था को लिवर एब्सेस के नाम से जाना जाता है।
यह बीमारी कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है। खासतौर पर डायबिटीज से पीड़ित लोगों में इस संक्रमण की चपेट में आने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा, जो लोग बहुत अधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन करते हैं, उनके लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचता है और इस प्रकार की समस्याओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। यदि शुरुआत में ही इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति काफी विकराल रूप ले सकती है।
लिवर एब्सेस के प्रमुख लक्षण और शुरुआती पहचान
जब किसी व्यक्ति को लिवर एब्सेस की समस्या होती है, तो उसका शरीर कई तरह के संकेत देना शुरू कर देता है। इसके सबसे सामान्य और प्रमुख लक्षणों में पेट में लगातार या हल्का दर्द बने रहना, अचानक तेज बुखार आना, हर समय मितली महसूस होना और उल्टी होना शामिल है। इन शारीरिक परेशानियों के साथ-साथ मरीज को अत्यधिक कमजोरी और भारी थकान का भी अनुभव होता है।
यदि आपके शरीर में इस तरह के लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो इन्हें सामान्य समझकर बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते मेडिकल जांच करवाने और सही उपचार शुरू करने से इस बीमारी को गंभीर होने से आसानी से रोका जा सकता है।
शुरुआती चरण में दवाओं से इलाज की संभावना
डॉ. मोहम्मद अरशद बताते हैं कि यदि लिवर एब्सेस की पहचान बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही हो जाए, तो इसका इलाज बहुत हद तक दवाओं के माध्यम से संभव है। मरीज को एंटीबायोटिक और अन्य आवश्यक दवाएं दी जाती हैं जिससे संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, यदि बीमारी गंभीर हो चुकी हो और लिवर के अंदर मवाद का संग्रह बहुत अधिक बढ़ गया हो, तो चिकित्सकों को एक विशेष प्रक्रिया के जरिए उस पस को बाहर निकालना पड़ता है। यही वजह है कि शुरुआती संकेत मिलते ही डॉक्टर से परामर्श करना सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
डायबिटीज के मरीजों और शराब प्रेमियों के लिए विशेष सावधानी
विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन लोगों को डायबिटीज की शिकायत है, उन्हें अपने ब्लड शुगर के स्तर को हमेशा नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई दवाइयों का सेवन नियमित रूप से करते रहना चाहिए। अनियंत्रित शुगर के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और विभिन्न प्रकार के संक्रमणों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए नियमित रूप से शुगर की जांच बेहद आवश्यक है।
जो व्यक्ति शराब का सेवन करता है और जिसे लिवर एब्सेस की पुष्टि हो चुकी है, उसे तुरंत प्रभाव से अल्कोहल से तौबा कर लेनी चाहिए। लिवर से जुड़ी किसी भी बीमारी के दौरान शराब पीना आग में घी डालने का काम करता है और स्थिति को अत्यधिक गंभीर बना देता है। इसलिए इस अवस्था में शराब का त्याग करना अनिवार्य है।
खानपान में बदलाव और पूरी सावधानी जरूरी
लिवर एब्सेस से पीड़ित व्यक्ति को अपने खानपान पर बहुत अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार इस दौरान अत्यधिक तेल, मसाले और मिर्च वाले भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए ताकि लिवर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। सबसे जरूरी नियम यह है कि डॉक्टर की ओर से दी गई दवाइयों का कोर्स समय पर पूरा करें और बीच में बिल्कुल भी न छोड़ें।



















