बारिश की बूंदें गिरते ही खान-पान की आदतें बदलने लगती हैं। सुहावने मौसम में जहां लोग गरमा-गरम पकौड़ों का आनंद लेते हैं, वहीं मांसाहारी भोजन के शौकीन मछली की नई-नई डिश का स्वाद चखना पसंद करते हैं। हालांकि, मानसून की इस खुशनुमा फ़िज़ा के बीच थोड़ी सी लापरवाही सेहत को बुरी तरह बिगाड़ सकती है। बरसात के दिनों में बाज़ार से खरीदी गई बासी, दूषित या अधपकी मछली का सेवन करने से पेट की गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि अनदेखी करने पर पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
दूषित जल और जीवाणुओं का बढ़ता प्रकोप
बरसात के मौसम में नदी, तालाब और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ उनमें संदूषण भी बढ़ जाता है। आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल का कहना है कि बारिश का पानी जल निकायों में गंदगी और तरह-तरह के दूषित पदार्थों को बहाकर ले जाता है। इस वजह से पानी में हानिकारक जीवाणु, बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव बहुत तेज़ी से पनपने लगते हैं। जब इन दूषित जल स्रोतों से पकड़ी गई मछलियों को सही ढंग से साफ़ नहीं किया जाता या कच्चा छोड़ दिया जाता है, तो उनसे संक्रामक बीमारी फैलने का डर रहता है। ऐसी मछली खाने से पेट का संक्रमण, लगातार उल्टी होना, दस्त की शिकायत और फूड पॉइज़निंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
कमज़ोर पाचन तंत्र और अधपकी मछली के ख़तरे
मौसम में बदलाव का सीधा असर मनुष्य की पाचन क्षमता पर भी पड़ता है। डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार, मानसून के दौरान अधिकांश लोगों का पाचन तंत्र सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा सुस्त और कमज़ोर हो जाता है। ऐसे समय में अत्यधिक तली-भुनी चीज़ें, मसालेदार व्यंजन या भारी भोजन को पचाने में शरीर को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अगर इस दौरान अधपकी मछली या लंबे समय से स्टोर करके रखी गई बासी मछली का सेवन किया जाए, तो यह पेट के लिए अत्यधिक हानिकारक साबित होता है। पकाने में कमी रहने पर मछली के भीतर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं, जो शरीर में प्रवेश करते ही पाचन क्रिया को प्रभावित करते हैं और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
बाज़ार से खरीदारी और घर पर तैयारी के सही नियम
मछली की खरीदारी करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। डॉ. मोहम्मद इकबाल ने सलाह दी है कि बाज़ार से मछली लेते समय कभी भी जल्दबाज़ी न करें। खरीदारी के समय मछली की ताज़गी की जांच करना बहुत ज़रूरी होता है
- दुर्गंध की जांच: यदि मछली से तेज़ या अजीब बदबू आ रही हो, तो उसे बिल्कुल न खरीदें।
- रंग और बनावट: अगर मछली की त्वचा का रंग बदला हुआ दिखे या वह ढीली नज़र आए, तो ऐसी मछली सेहत के लिए असुरक्षित हो सकती है।
- विश्वसनीय दुकान: हमेशा साफ़-सुथरी और भरोसेमंद दुकान से ही खरीदारी करें, जहां स्वच्छता का ध्यान रखा जाता हो।
- सफ़ाई और पकाना: घर लाने के पश्चात मछली को साफ़ पानी से अच्छी तरह धोएं और उसे पूरी तरह पकने दें। अधपका मांस खाना स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
गंभीर लक्षण और विशेष सावधानी बरतने वाले समूह
बरसात में मछली के सेवन को लेकर कुछ खास वर्ग के लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और जिन व्यक्तियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर है, उन्हें अधिक सावधान रहना चाहिए। इन संवेदनशील समूहों में संक्रमण का असर बहुत तेज़ी से और गंभीर रूप से हो सकता है। डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, यदि मछली खाने के बाद किसी व्यक्ति को उल्टी, दस्त, तेज़ बुखार, पेट में ऐंठन या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे साधारण समस्या समझकर नज़रअंदाज़ न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए और चिकित्सीय उपचार शुरू करना चाहिए।
पोषक तत्वों का लाभ और सुरक्षित सेवन
हालांकि, इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि मानसून में मछली का सेवन पूरी तरह छोड़ दिया जाए। मछली शरीर के लिए एक बेहतरीन और पौष्टिक आहार है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और शरीर के संचालन के लिए आवश्यक कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। डॉ. मोहम्मद इकबाल का स्पष्ट कहना है कि मछली खाना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। बस मानसून के महीनों में यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि खाई जाने वाली मछली पूरी तरह ताज़ी हो, उसे सही तरीके से साफ़ किया गया हो और पूर्ण रूप से पकाया गया हो। थोड़ी सी सतर्कता और स्वच्छता के नियमों का पालन करके इस मौसम में भी मछली के स्वाद का आनंद सुरक्षित रूप से लिया जा सकता है।



















