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रक्षाबंधन पर बहन को दें कैंसर से सुरक्षा की ढाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने दी एचपीवी वैक्सीन की सलाहस्वास्थ्य
22 अग॰ 2026, 7:16 am (3 घंटे पहले)· 1

रक्षाबंधन पर बहन को दें कैंसर से सुरक्षा की ढाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने दी एचपीवी वैक्सीन की सलाह

जौनपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने रक्षाबंधन पर पारंपरिक उपहारों के बजाय बहनों को एचपीवी वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है, जिससे उन्हें सर्वाइकल कैंसर जैसे गंभीर जोखिमों से सुरक्षा मिल सके।

रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम, असीम विश्वास और जीवनभर की सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर भाई अक्सर अपनी बहनों को मिठाई, चॉकलेट, कपड़े या सोने-चांदी के गहने उपहार में देते हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने इस बार भाइयों से एक अनोखी और जीवनरक्षक पहल करने का आह्वान किया है। उन्होंने अपील की है कि इस रक्षाबंधन पर बहनों को ऐसे उपहार दिए जाएं जो उनके भविष्य और सेहत की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके लिए उन्होंने बहनों को एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमावायरस की वैक्सीन दिलवाने का सुझाव दिया है।

राखी पर सेहत की सुरक्षा का अनूठा उपहार

डॉ. गुंजन पटेल का मानना है कि हर साल दिए जाने वाले पारंपरिक उपहार जैसे कपड़े, चॉकलेट या ज्वैलरी केवल क्षणिक खुशी देते हैं। इसके विपरीत, स्वास्थ्य से जुड़ा उपहार बहन के जीवन को लंबे समय तक सुरक्षित और खुशहाल बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन कलाई पर रक्षासूत्र बंधवाते समय भाइयों को अपनी बहन की सेहत की देखभाल का संकल्प भी लेना चाहिए। एचपीवी वैक्सीन लगवाना भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रभावी कदम साबित हो सकता है।

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एचपीवी वायरस और सर्वाइकल कैंसर का गंभीर खतरा

चिकित्सकीय दृष्टिकोण से एचपीवी एक बेहद सामान्य और संक्रामक वायरस है। इसके कई प्रकार मानव शरीर को प्रभावित करते हैं, जिनमें से कुछ उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का मुख्य कारण बनते हैं। इसके अलावा, एचपीवी संक्रमण के कारण जननांगों पर दर्दनाक मस्से बनने जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया कि समय रहते टीकाकरण करवा लेने से इस खतरनाक संक्रमण और उससे उत्पन्न होने वाली जटिलताओं से प्रभावी बचाव संभव है।

लड़कों के लिए भी क्यों आवश्यक है एचपीवी टीकाकरण?

आमतौर पर एचपीवी वैक्सीन को केवल लड़कियों और महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन डॉ. गुंजन पटेल ने इस भ्रांति को दूर किया है। उन्होंने बताया कि एचपीवी का संक्रमण केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पुरुषों में भी विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। कई विशेष परिस्थितियों और चिकित्सकीय दिशानिर्देशों के तहत लड़कों को भी एचपीवी वैक्सीन देने की सलाह दी जाती है। इससे न केवल पुरुषों की अपनी सेहत सुरक्षित रहती है, बल्कि समाज में वायरस के प्रसार को रोकने में भी मदद मिलती है।

उम्र के अनुसार एचपीवी वैक्सीन का निर्धारित शेड्यूल

एचपीवी वैक्सीन की सही खुराक और समय-सारणी व्यक्ति की उम्र तथा उसकी शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है। डॉ. पटेल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार

  • 9 से 14 वर्ष की आयु: इस उम्र के बच्चों के लिए सामान्यतः दो खुराक यानी दो डोज का शेड्यूल पर्याप्त माना जाता है। इन दोनों डोज के बीच लगभग छह महीने का अंतराल रखा जाना आवश्यक है।
  • 14 वर्ष से अधिक आयु: बड़ी उम्र के किशोरों और वयस्कों के लिए तीन डोज का टीकाकरण शेड्यूल अपनाया जाता है।

डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, उम्र और इस्तेमाल की जा रही वैक्सीन के ब्रांड या प्रकार के आधार पर सटीक शेड्यूल में थोड़ा बदलाव हो सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार का टीका लगवाने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य केंद्र से परामर्श लेना अनिवार्य है।

सरकारी और निजी क्षेत्रों में वैक्सीन की उपलब्धता

एचपीवी वैक्सीनेशन की उपलब्धता पर बात करते हुए डॉ. गुंजन पटेल ने बताया कि सरकार द्वारा भी इस टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास और योजनाएं चलाई जा रही हैं। पात्र व्यक्तियों को अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं और अभियानों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। इसके साथ ही, निजी अस्पतालों और क्लिनिकों में भी विभिन्न कंपनियों की एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध हैं। निजी क्षेत्र में वैक्सीन की कीमत उसके प्रकार और निर्माण कंपनी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

डॉ. पटेल ने आम जनता को सचेत करते हुए कहा कि अधिक महंगी वैक्सीन को बिना सोचे-समझे बेहतर मान लेना सही दृष्टिकोण नहीं है। वैक्सीन का चयन हमेशा डॉक्टर की उचित सलाह और अधिकृत स्वास्थ्य विकल्पों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी अभिभावकों और भाइयों से अपील की कि यदि उनके परिवार में पात्र सदस्य का एचपीवी टीकाकरण नहीं हुआ है, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें और इस रक्षाबंधन को सेहत की सुरक्षा के संकल्प के साथ यादगार बनाएं।

सवाल-जवाब

रक्षाबंधन पर डॉ. गुंजन पटेल ने किस उपहार की सलाह दी है?
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने चॉकलेट और गहनों के बजाय बहनों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाली एचपीवी वैक्सीन देने की सलाह दी है।
एचपीवी संक्रमण से कौन-कौन सी मुख्य बीमारियां हो सकती हैं?
एचपीवी संक्रमण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण बनता है और इसके अलावा जननांगों पर मस्से जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है।
9 से 14 साल की उम्र में एचपीवी वैक्सीन की कितनी डोज दी जाती हैं?
9 से 14 वर्ष की आयु में सामान्यतः दो खुराक दी जाती हैं, जिनके बीच करीब छह महीने का अंतराल रखा जाता है।
क्या लड़कों को भी एचपीवी वैक्सीन लगवाना जरूरी है?
जी हां, एचपीवी संक्रमण पुरुषों में भी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह पर कई परिस्थितियों में लड़कों को भी यह वैक्सीन दी जाती है।
क्या महंगी एचपीवी वैक्सीन हमेशा बेहतर होती है?
नहीं, डॉ. पटेल के अनुसार महंगी वैक्सीन को अपने आप बेहतर मान लेना सही नहीं है। सही वैक्सीन का चुनाव हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
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