पारंपरिक भारतीय रसोई में हल्दी वाला दूध हमेशा से ही एक प्राकृतिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। जब इसी सादे हल्दी दूध में चार अन्य शक्तिशाली आयुर्वेदिक सामग्रियां मिला दी जाती हैं, तो यह एक विशेष पेय बन जाता है जिसे पंचामृत दूध कहा जाता है। यह ड्रिंक न केवल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, बल्कि पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और त्वचा में नई चमक लाने में भी काफी असरदार साबित होता है।
पंचामृत दूध के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ
रांची स्थित प्रसिद्ध आयुर्वेदिक डॉक्टर वीके पांडे का कहना है कि यह खास दूध कई तरह की शारीरिक बीमारियों में एक प्राकृतिक दवा की तरह काम करता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से सर्दी, जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं से बहुत जल्द राहत मिलती है। इसके साथ ही यह फेफड़ों की अंदरूनी सफाई करने में मदद करता है और शरीर में रक्त के संचार को बेहतर बनाता है।
कब्ज की शिकायत से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह पेय बेहद गुणकारी माना गया है। रात को सोने से पहले इसे पीने से पूरे शरीर का दर्द कम होता है और मांसपेशी तनावमुक्त होती हैं। इसका नियमित सेवन करने से सुबह सोकर उठने पर शरीर में एक नई ताजगी और ऊर्जा का अनुभव होता है। चेहरे पर प्राकृतिक निखार और ग्लो लाने में भी इसकी अहम भूमिका होती है।
स्टेप बाय स्टेप बनाने का सही तरीका
इस औषधीय दूध को घर पर तैयार करना बेहद आसान है। इसके लिए एक गिलास दूध को बर्तन में डालकर अच्छी तरह उबाल लें। जब दूध में पहला उबाल आ जाए, तो उसमें थोड़ा सा पिसा हुआ या कद्दूकस किया अदरक, केसर के कुछ धागे, चुटकी भर दालचीनी पाउडर और हल्दी डालकर हल्की आंच पर फिर से उबालें।
दूध को आंच से उतारने के बाद ही इसमें स्वादानुसार गुड़ मिलाएं। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि गुड़ को कभी भी चूल्हे पर उबलते हुए दूध में न डालें, क्योंकि इससे दूध तुरंत फट सकता है। सभी सामग्रियों को अच्छी तरह चम्मच से मिला लें और आपका गरमा गरम पंचामृत दूध पूरी तरह तैयार है।
किस मौसम में करें सेवन और जरूरी सावधानियां
डॉक्टर वीके पांडे बताते हैं कि इस दूध को पूरे साल रोजाना की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, मानसून यानी बरसात के मौसम में इसका सेवन करना सबसे अधिक लाभदायक होता है। बारिश के दिनों में अक्सर लोगों को खांसी और कफ की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे यह दूध सुरक्षा प्रदान करता है।
इसके साथ ही, व्यक्तिगत शारीरिक तासीर का ध्यान रखना भी आवश्यक है। यदि आपको इसमें शामिल कोई भी चीज सूट नहीं करती है, तो आप उसे छोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, दालचीनी की तासीर काफी गर्म होती है। अगर आपको दालचीनी से परेशानी होती है, तो इसकी मात्रा कम कर दें या फिर इसे रेसिपी से पूरी तरह हटा दें।



















