केंद्र सरकार द्वारा संचालित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने विभिन्न गंभीर बीमारियों के उपचार में दी जाने वाली दवाओं के 10 बैचों को तत्काल प्रभाव से वापस मंगाने का फैसला किया है। अस्पताल प्रशासन द्वारा की गई आंतरिक गुणवत्ता जांच और निरीक्षण में इन दवाओं के नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। कुछ दवाओं के बैच एनालिटिकल टेस्टिंग में फेल हो गए, जबकि कुछ गोलियों के स्ट्रिप के भीतर ही पाउडर में तब्दील होने जैसे गंभीर फिजिकल दोष सामने आए। मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अस्पताल के इन्वेंटरी मैनेजमेंट सेक्शन ने सभी विभागों और आंतरिक वार्डों को प्रभावित दवाओं का वितरण तुरंत रोकने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
सात से चौदह सितंबर के बीच जारी हुए चार नोटिस
दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सामने आई इस गंभीर खामी के बाद अस्पताल प्रशासन ने 7 सितंबर से 14 सितंबर के बीच चार अलग-अलग आधिकारिक नोटिस जारी किए। इन नोटिसों के माध्यम से संबंधित इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे चिन्हित बैचों का इस्तेमाल हर हाल में रोकें और अपनी मौजूदा इन्वेंटरी को अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में वापस जमा कराएं। अस्पताल ने स्पष्ट किया है कि यह कदम मरीजों को किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम से बचाने के लिए एहतियातन उठाया गया है।
मानक गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुईं ये प्रमुख टैबलेट
अस्पताल की ओरल और टॉपिकल ड्रग यूनिट द्वारा 14 सितंबर को जारी किए गए एक नोटिस में तीन प्रमुख टैबलेट बैचों को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया गया। प्रयोगशाला विश्लेषण में फेल होने वाली इन दवाओं में सोडियम वैल्प्रोएट 200 मिलीग्राम शामिल है, जिसका उपयोग मिर्गी और न्यूरोलॉजिकल विकारों के इलाज में होता है। इसके अलावा दिल की विफलता और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी की समस्या को दूर करने के लिए दी जाने वाली स्पिरोनोलैक्टोन 50 मिलीग्राम तथा डिप्रेशन व अवसाद के मामलों में निर्धारित की जाने वाली इमिप्रामाइन 25 मिलीग्राम की गोलियां भी जांच में असफल पाई गईं।
पांच जीवनरक्षक इंजेक्शनों के बैच भी तुरंत हटाए गए
टैबलेट के अलावा अस्पताल की इंजेक्टेबल ड्रग यूनिट ने भी 14 सितंबर को एक अलग आदेश के तहत पांच तरह के इंजेक्शन बैचों को वापस बुलाने का फैसला लिया। लैब परीक्षण में असफल पाए गए इन इंजेक्शनों में कार्डियक स्थितियों में दिया जाने वाला एडेनोसिन और प्रसव के पश्चात माताओं में अत्यधिक रक्तस्राव रोकने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला महत्वपूर्ण मिथाइल एर्गोमेट्रिन शामिल है। इसके साथ ही फेनिरामाइन मैलिएट, मल्टीविटामिन इंजेक्शन और एस्कॉर्बिक एसिड के बैच भी जांच में मानकों के विपरीत पाए गए, जिसके बाद इन्हें तुरंत वार्डों से हटा दिया गया।
स्ट्रिप के अंदर पाउडर बनी मिलीं दिल की दवाएं
गुणवत्ता जांच के दौरान दवाओं में केवल रासायनिक कमियां ही नहीं, बल्कि स्पष्ट भौतिक दोष भी मिले। 9 सितंबर के नोटिस के अनुसार दिल के मरीजों को दी जाने वाली आइसोसॉरबाइड मोनोनाइट्रेट 20 मिलीग्राम की गोलियां अपनी पैकिंग के अंदर ही टूटकर पाउडर के रूप में पाई गईं। इस विशिष्ट बैच का निर्माण ग्लोसन इंडिया लैब्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जुलाई 2026 में किया गया था और इसकी समाप्ति तिथि जून 2028 दर्ज थी। अस्पताल ने सभी विभागों को इसे तीन दिनों के भीतर वापस लौटाने का सख्त समय दिया। इससे पूर्व 7 सितंबर को मेटोप्रोलॉल 50 मिलीग्राम की गोलियों में भी इसी प्रकार का पाउडर बनने का दोष पाया गया था। यह बैच भी ग्लोसन इंडिया लैब्स का था, जबकि कुछ अन्य नमूने जैक्सन लैबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सप्लाई किए गए थे।
मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और निगरानी
अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार जांच रिपोर्ट हाथ में आते ही बिना किसी देरी के रिकॉल प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अस्पताल में भर्ती अथवा ओपीडी में आए मरीजों के इलाज में कोई रुकावट न आए, इसके लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण वैकल्पिक दवाओं की पूरी व्यवस्था तुरंत कर दी गई है। अब तक इन प्रभावित दवाओं के सेवन से किसी भी मरीज पर प्रतिकूल असर पड़ने की कोई सूचना नहीं मिली है, फिर भी सभी क्लीनिकल टीमों को मरीजों की स्थिति पर निरंतर नजर रखने और दवा सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है।



















