अक्सर घरों में महिलाओं के अचानक गुस्सा होने, बात-बात पर चिड़चिड़ाने या तेज आवाज में बोलने को उनका निजी स्वभाव मान लिया जाता है। लोग सोचते हैं कि यह व्यवहार का हिस्सा है, लेकिन चिकित्सीय दृष्टि से इसके पीछे छिपे शारीरिक कारणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। रांची के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. वीके पांडे ने इस स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि घरेलू महिलाओं में दिखने वाला यह चिड़चिड़ापन उनके स्वभाव की वजह से नहीं, बल्कि शरीर में विटामिन डी की भारी कमी और सुबह के खानपान में होने वाली गंभीर लापरवाही के कारण पैदा होता है।
नाश्ते में देरी और हार्मोनल असंतुलन का सीधा संबंध
डॉ. वीके पांडे के मुताबिक अधिकांश गृहणियां घर-परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने के चक्कर में सुबह का नाश्ता काफी देर से करती हैं। आमतौर पर देखा गया है कि महिलाएं सुबह 10:00 से 11:00 बजे तक भूखी रहती हैं और इसी दौरान पहला भोजन लेती हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होता है। खानपान का यह असंतुलित समय शरीर में ब्लड प्रेशर यानी बीपी की समस्याएं खड़ी करता है और आंतरिक हार्मोन्स के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है। शारीरिक तंत्र में होने वाला यही हार्मोनल असंतुलन सीधे तौर पर मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ेपन को जन्म देता है।
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ का सुझाव है कि महिलाओं को अपना सुबह का नाश्ता हर हाल में अधिकतम 9:00 बजे तक अवश्य समाप्त कर लेना चाहिए। सुबह के वक्त सही समय पर भोजन ग्रहण करने से शरीर के हार्मोन्स संतुलित बने रहते हैं, जिससे दिनभर मानसिक ऊर्जा और स्थिरता कायम रहती है।
सिरदर्द, माइग्रेन और थायराइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा
सुबह का नाश्ता नियमित समय पर न करने की यह अकेली आदत कई अन्य शारीरिक समस्याओं को भी सीधा न्योता देती है। डॉ. वीके पांडे चेतावनी देते हैं कि देर से नाश्ता करने के कारण महिलाओं में लगातार सिरदर्द बने रहने, गंभीर माइग्रेन और थायराइड जैसी बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। जब शरीर को सुबह आवश्यक पोषक तत्व समय पर नहीं मिलते, तो चयापचय प्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे में भोजन का समय सुधारना न सिर्फ मानसिक शांति के लिए जरूरी है, बल्कि थायराइड और माइग्रेन जैसी लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए भी अनिवार्य कदम है।
धूप से दूरी और विटामिन डी की कमी से बढ़ता मानसिक तनाव
लगातार घर की चारदीवारी के भीतर रहने के कारण महिलाओं का प्राकृतिक धूप से संपर्क लगभग खत्म हो जाता है। जब शरीर को पर्याप्त सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता, तब विटामिन डी का स्तर खतरनाक रूप से गिर जाता है। विटामिन डी की इस कमी के चलते शरीर का हार्मोनल चक्र पुनः बाधित होता है, जिससे अवसाद, थकावट और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है।
इस समस्या से उबरने के लिए डॉ. पांडे ने एक बेहद आसान और प्राकृतिक उपाय बताया है। महिलाओं को रोजाना कम से कम आधा घंटा धूप में बैठना चाहिए। इसके लिए या तो सुबह के उगते हुए सूरज के सामने बैठें या फिर शाम के वक्त ढलते हुए सूरज की हल्की किरणों में समय बिताएं। धूप के इस नियमित संपर्क से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और मस्तिष्क तरोताजा महसूस करता है।
दैनिक दिनचर्या और आहार में जरूरी बदलाव
डॉक्टर के अनुसार यदि घरेलू महिलाएं अपनी जीवनशैली में दो सामान्य आदतें शामिल कर लें, तो उनका चिड़चिड़ापन काफी हद तक खत्म हो सकता है। पहला नियम यह है कि वे धूप में कुछ वक्त जरूर बिताएं और दूसरा यह कि सुबह 9:00 बजे से पहले नाश्ता करने का कड़ा नियम बनाएं।
इसके साथ ही दैनिक भोजन में पोषण की गुणवत्ता पर ध्यान देना भी आवश्यक है। महिलाओं को अपने नियमित भोजन में विटामिन ए, बी और सी से भरपूर पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ-साथ ओमेगा फैटी एसिड का सेवन करना चाहिए। ओमेगा फैटी एसिड मछली में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इन पोषक तत्वों से युक्त संतुलित आहार और समय पर खानपान अपनाने से महिलाओं के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है।



















