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याददाश्त में सुस्ती और फोकस टूटने के पीछे सिर्फ काम का तनाव नहीं, शरीर में छिपी कमियां हो सकती हैं जिम्मेदारस्वास्थ्य
2 अक्तू॰ 2026, 12:22 pm (26 मिनट पहले)· 0

याददाश्त में सुस्ती और फोकस टूटने के पीछे सिर्फ काम का तनाव नहीं, शरीर में छिपी कमियां हो सकती हैं जिम्मेदार

चीजें भूलना और काम में मन न लगना हमेशा सिर्फ थकान नहीं होता। खानपान की कमी, थायरॉइड असंतुलन या विटामिन की कमी से भी युवाओं में मानसिक धुंधलापन बढ़ सकता है।

दैनिक कामकाज के दौरान अक्सर जरूरी बातें भूल जाना, किसी काम पर लगातार ध्यान केंद्रित न कर पाना और बातचीत के बीच में ही दिमाग का भटक जाना आज के समय में बहुत आम अनुभव बन चुका है। कई युवा अक्सर यह कहते सुने जाते हैं कि उनका दिमाग ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है, जरूरी फैसले लेते वक्त उलझन महसूस होती है या हाल ही में सुनी बातें एकदम से गायब हो जाती हैं। आम बोलचाल में इस मानसिक सुस्ती और भ्रम की स्थिति को ब्रेन फॉग के नाम से जाना जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह अपने आप में कोई स्वतंत्र बीमारी या विशिष्ट डायग्नोसिस नहीं है, बल्कि यह शरीर और दिमाग के भीतर चल रही कई संभावित गड़बड़ियों का एक साझा लक्षण है। असली चुनौती यह समझना है कि आखिर किन कारणों से यह परेशानी जन्म ले रही है और कब इसे गंभीरता से लेकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इस विषय पर डॉ. अजय फड़के, एगिलस डायग्नोस्टिक्स बताते हैं कि किन परिस्थितियों में चिकित्सीय जांच और परामर्श अनिवार्य हो जाता है।

दैनिक आदतों की भूमिका और प्राथमिक सुधार के उपाय

अव्यवस्थित जीवनशैली मानसिक स्पष्टता को सीधे तौर पर चोट पहुंचाती है। हर रात पर्याप्त और सुकून भरी नींद न मिलना, काम या करियर का अत्यधिक तनाव, देर रात तक मोबाइल व लैपटॉप की चमकदार स्क्रीन से चिपके रहना, भोजन के समय का कोई तय नियम न होना तथा शराब या जरूरत से ज्यादा चाय और कॉफी का सेवन दिमाग की स्मरण शक्ति और एकाग्रता को बुरी तरह प्रभावित करता है। यदि ऐसी दिक्कतें महसूस हो रही हों, तो सबसे पहले अपनी दिनचर्या में सुधार करना चाहिए। रोजाना एक ही निश्चित समय पर सोने की आदत डालें और रात में कम से कम 7 घंटे की निर्बाध नींद सुनिश्चित करें। संतुलित समय पर पौष्टिक भोजन लें, दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, नियमित हल्की शारीरिक कसरत करें और मानसिक दबाव घटाने के लिए कामकाज के बीच छोटे-छोटे विराम लें। इन जरूरी बदलावों को लगातार दो से चार हफ्ते तक अपनी दिनचर्या में लागू करके देखें। यदि इसके बाद भी मानसिक धुंधलापन या भूलने की आदत दूर न हो, तो इसे केवल सुस्ती मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा।

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रक्त जांच और पोषक तत्वों की कमी का असर

जब जीवनशैली ठीक करने के बावजूद मानसिक धुंधलापन बना रहता है, तो उसके पीछे कुछ बुनियादी शारीरिक कारण हो सकते हैं जिन्हें सामान्य रक्त जांच के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है। शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया, आयरन की कमी, विटामिन B12 का निम्न स्तर, थायरॉइड ग्रंथि का असंतुलन और रक्त शर्करा के स्तर में बार-बार उतार-चढ़ाव दिमाग के सामान्य कामकाज में बाधा डालते हैं। विशेष रूप से विटामिन B12 की स्थिति पर करीबी नजर रखना जरूरी होता है। शाकाहारी भोजन करने वाले लोगों में विटामिन B12 की कमी व्यापक रूप से देखने को मिलती है, क्योंकि यह विटामिन मुख्य रूप से मांसाहार, अंडों और दूध से बने उत्पादों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा जो लोग लंबे समय से पेट में गैस या एसिडिटी की दवाएं खा रहे हैं, या डायबिटीज के इलाज के लिए मेटफॉर्मिन दवा का नियमित सेवन करते हैं, उनके शरीर में भी विटामिन B12 का स्तर घट सकता है। वहीं महिलाओं में मासिक धर्म के कारण शरीर से खून निकलने से आयरन की कमी होना एक बेहद आम समस्या है।

अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं और आवश्यक मेडिकल टेस्ट

शारीरिक कारणों के अलावा कुछ अन्य जटिल स्थितियां भी एकाग्रता छीन सकती हैं। स्लीप एप्निया एक ऐसा विकार है जिसमें सोते समय सांस में रुकावट आती है, जिसके कारण व्यक्ति रातभर बिस्तर पर रहने के बाद भी सुबह उठते ही भारी थकान महसूस करता है। डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां भी ध्यान लगाने की क्षमता और याददाश्त को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। इसके अतिरिक्त कोविड जैसे किसी गंभीर वायरल संक्रमण से उबरने के बाद भी कई लोगों को हफ्तों तक सोचने-समझने में भारीपन या ब्रेन फॉग का सामना करना पड़ता है। कुछ नियमित चलने वाली दवाइयों के दुष्प्रभाव से भी यह लक्षण उभर सकते हैं। चिकित्सक मरीज के पूरे लक्षणों और पिछली मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर आवश्यक जांचें तय करते हैं। सामान्य तौर पर शुरुआती दौर में सीबीसी, फेरिटिन, विटामिन B12, थायरॉइड प्रोफाइल और ब्लड शुगर की जांच कराई जाती है। हर व्यक्ति को सभी तरह के टेस्ट कराने की बाध्यता नहीं होती। यदि किसी मरीज की रिपोर्ट में विटामिन B12 का स्तर बॉर्डरलाइन आता है लेकिन मानसिक सुस्ती के लक्षण बने रहते हैं, तो चिकित्सक स्थिति की पुष्टि के लिए होमोसिस्टीन जैसी विशिष्ट जांच का सहारा लेते हैं।

कब जरूरी है डॉक्टर से मिलना और आपातकालीन स्थितियां

यदि दिमागी उलझन और ध्यान भटकने की वजह से कॉलेज की पढ़ाई, दफ्तर का जरूरी काम या रोजमर्रा के घरेलू फैसले प्रभावित होने लगें, तो बिना समय गंवाए विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। इसके साथ ही अगर शरीर में लगातार भारी थकान बनी रहे, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन तेजी से घटे या बढ़े, बार-बार चक्कर आएं, मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो, हाथ-पैरों में चींटियां चलने जैसी झुनझुनी हो, थोड़ा चलने पर भी सांस फूलने लगे या मन में गहरा अवसाद बना रहे, तो जांच में कतई देरी नहीं करनी चाहिए। कुछ विशिष्ट लक्षणों के उभरने पर बिल्कुल भी इंतजार नहीं करना चाहिए और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। यदि अचानक बहुत तेज मानसिक भ्रम पैदा हो जाए, जुबान लड़खड़ाने लगे या बोलने में दिक्कत आए, चेहरे या शरीर के किसी एक हिस्से में अचानक सुन्नता या कमजोरी आ जाए, असहनीय तेज सिरदर्द उठे, मिर्गी जैसा दौरा पड़े या व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए, तो फौरन इमरजेंसी विभाग पहुंचना चाहिए। यह स्थिति केवल सामान्य ब्रेन फॉग नहीं होती, बल्कि किसी बड़ी न्यूरोलॉजिकल या शारीरिक समस्या का गंभीर संकेत हो सकती है। हर बार दिमागी सुस्ती को सिर्फ व्यस्त दिनचर्या या तनाव का बहाना बनाकर न टालें, क्योंकि अक्सर एक साधारण ब्लड टेस्ट से वास्तविक कारण पकड़ में आ जाता है और सही इलाज से स्थिति पूरी तरह ठीक हो जाती है।

सवाल-जवाब

ब्रेन फॉग क्या है?
ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं है, बल्कि याददाश्त कमजोर होने, ध्यान भटकने और मानसिक सुस्ती के लक्षणों का एक समूह है।
शुरुआती सुधार के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?
कम से कम 7 घंटे की नींद लें, समय पर भोजन करें, स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और दो से चार हफ्ते तक अपनी दिनचर्या में सुधार करें।
विटामिन B12 की कमी शाकाहारियों में ज्यादा क्यों होती है?
विटामिन B12 मुख्य रूप से मांसाहार, अंडे और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है, जिसके कारण शाकाहारी आहार में इसकी कमी होने का खतरा अधिक रहता है।
डॉक्टर आमतौर पर कौन से टेस्ट कराने की सलाह देते हैं?
प्रारंभिक जांच में आमतौर पर सीबीसी, फेरिटिन, विटामिन B12, थायरॉइड प्रोफाइल और ब्लड शुगर टेस्ट शामिल होते हैं।
किन लक्षणों को देखकर तुरंत इमरजेंसी में जाना चाहिए?
अचानक बहुत तेज सिरदर्द, बोलने में परेशानी, चेहरे या शरीर के एक तरफ कमजोरी, दौरा या बेहोशी होने पर तुरंत इमरजेंसी में जाना चाहिए।
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