बरसात के सीजन में खेतों, बगीचों और रिहायशी इलाकों के आसपास सांपों का निकलना बहुत आम हो जाता है। कोबरा, करैत और रसेल वाइपर जैसे घातक सांपों का खतरा इस दौरान काफी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में, सर्पदंश की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण चीज घबराहट पर काबू पाना है। यदि पीड़ित व्यक्ति को शुरुआती साठ मिनट के भीतर सही उपचार मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना बहुत अधिक रहती है।
घबराहट से बचें और शरीर को स्थिर रखें
सांप काटने के बाद सबसे जरूरी काम मरीज को शांत रखना है। घबराने या डरने से दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं, जो खून के बहाव के जरिए शरीर में जहर को और अधिक तेजी से फैला सकती हैं। पीड़ित व्यक्ति को अधिक हिलने-डुलने न दें और उसे स्थिर अवस्था में लिटाएं। जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे बिल्कुल न हिलाएं और उसे दिल के स्तर से थोड़ा नीचे रखें ताकि जहर का फैलाव धीमा रहे।
क्या न करें: पुरानी और नुकसानदेह धारणाएं
अक्सर लोग डर के मारे कुछ गलत तरीके अपना लेते हैं जो मरीज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। प्रभावित स्थान पर रस्सी, कपड़ा या तार से कसकर पट्टी बांधना, जहर को मुंह से चूसने की कोशिश करना, त्वचा पर कट लगाना या घाव पर बर्फ लगाना पूरी तरह गलत है। इन तरीकों से घाव में इन्फेक्शन बढ़ सकता है या ऊतकों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा, हाथों या पैरों में पहनी गई घड़ियां, अंगूठियां या कड़े तुरंत निकाल देने चाहिए क्योंकि जहर के कारण सूजन आने पर ये रक्त संचार में बाधा डाल सकते हैं।
तुरंत चिकित्सा सहायता लें
इलाज में एक पल की भी देरी न करें और मरीज को तुरंत उस अस्पताल ले जाएं जहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की सुविधा उपलब्ध हो। एंबुलेंस को प्राथमिकता दें। मरीज को किसी भी हाल में खुद चलने या दौड़ने न दें, क्योंकि गतिविधि जहर को तेजी से शरीर में पहुंचाती है। अगर संभव हो तो उसे स्ट्रेचर पर या वाहन की मदद से अस्पताल पहुंचाएं।
सांप को पहचानने की कोशिश
अगर सुरक्षित दूरी से सांप की फोटो ली जा सके, तो यह डॉक्टरों के लिए मददगार हो सकता है ताकि वे सही इलाज तय कर सकें। लेकिन सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश में समय बर्बाद न करें और न ही अपनी जान को जोखिम में डालें। याद रखें कि हर सांप जहरीला नहीं होता, फिर भी किसी भी सर्पदंश को तब तक गंभीर मानकर चलना चाहिए जब तक डॉक्टर जांच न कर लें। सावधानी ही जीवन बचाती है, इसलिए खेतों या झाड़ियों में जाते समय लंबे बूट पहनें, रात में टॉर्च का उपयोग करें और आसपास सफाई रखें।











