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संक्रमित पक्षियों से कुत्तों और बिल्लियों में एवियन इन्फ्लूएंजा का प्रसार, बचाव के जरूरी दिशा-निर्देशस्वास्थ्य
19 सित॰ 2026, 10:34 pm (38 दिन पहले)· 1

संक्रमित पक्षियों से कुत्तों और बिल्लियों में एवियन इन्फ्लूएंजा का प्रसार, बचाव के जरूरी दिशा-निर्देश

कई देशों में एवियन इन्फ्लूएंजा पालतू जीवों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे बचाव के लिए विशेषज्ञों ने एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है।

अक्सर पक्षियों को प्रभावित करने वाला एवियन इन्फ्लूएंजा अब घरेलू पालतू जानवरों के लिए भी चिंता की वजह बनता जा रहा है। वैश्विक स्तर पर दर्ज मामलों के अनुसार H5 स्ट्रेन बिल्लियों और कुत्तों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। यद्यपि ऑस्ट्रेलिया के भीतर पालतू जीवों में H5 संक्रमण का कोई प्रकरण अभी दर्ज नहीं हुआ है और सामान्य तौर पर अधिकांश पालतू जानवरों के बीमार पड़ने की आशंका बहुत कम आंकी गई है, फिर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले अनुभवों के आधार पर वैज्ञानिक सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं।

विभिन्न जीवों पर संक्रमण का असर और गंभीरता

विभिन्न शोधों में देखा गया है कि यह वायरस विशेष रूप से बिल्लियों के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकता है। दुनिया के कई हिस्सों में इस रोगाणु से संक्रमित बिल्लियों की शारीरिक स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि कुछ ही दिनों के भीतर उन्होंने दम तोड़ दिया। दूसरी ओर, कुत्तों में भी इसके फैलने की आशंका बनी रहती है, किंतु उनके भीतर गंभीर रोग अथवा जटिलताओं के मामले बिल्लियों के मुकाबले काफी कम संख्या में दर्ज किए गए हैं।

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बिल्लियों के संक्रामक रोगों पर शोध करने वाली पशु चिकित्सक सैली कॉगिन्स का स्पष्ट मानना है कि घर में जानवर पालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह भली-भांति समझना चाहिए कि यह रोगाणु आवासीय परिसर में कैसे दाखिल हो सकता है और इससे बचने के व्यावहारिक उपाय क्या हैं। अकेले ऑस्ट्रेलिया में लगभग 77 लाख घरों में पालतू जीव मौजूद हैं। ऐसे में मुख्य चिंता केवल यह नहीं है कि जंगलों या फार्मों में पक्षी किस हद तक प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि घरों में रहने वाले चार पैरों वाले साथी अनजाने में इस रोगाणु के जाल में न फंसें।

घरेलू माहौल तक वायरस पहुंचने के संभावित रास्ते

यह रोगाणु कई अलग-अलग माध्यमों से घरों के अंदर प्रवेश कर सकता है। जब कोई पालतू जानवर किसी बीमार जंगली पक्षी अथवा अन्य संक्रमित जंतु के सीधे शारीरिक संपर्क में आता है, तो वह आसानी से इसकी गिरफ्त में आ जाता है। इसके अतिरिक्त ऐसे दूषित स्थानों पर विचरण करने अथवा संदूषित पशु उत्पादों का सेवन करने से भी यह रोग फैल सकता है।

वायरस का फैलाव केवल प्रत्यक्ष संपर्क तक सीमित नहीं रहता। इंसानों के जूते, उनके परिधान और बाहरी कार्य में प्रयुक्त औजार भी इस सूक्ष्म रोगाणु को घर के कमरों तक पहुंचा सकते हैं। दक्षिण कोरिया, पोलैंड तथा बेल्जियम जैसे मुल्कों में सामने आए दृष्टांतों ने साफ कर दिया है कि यह पैथोजन बिल्लियों के स्वास्थ्य को किस हद तक नुकसान पहुंचा सकता है।

बीमारी के शुरुआती संकेत और तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव

प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण किसी सामान्य मौसमी रोग जैसे ही प्रतीत होते हैं। रोगग्रस्त पशु अचानक सुस्त पड़ सकता है, उसे तेज ज्वर हो सकता है अथवा वह अपनी दैनिक खुराक लेना बिल्कुल बंद कर सकता है। इसके साथ ही उसे निरंतर खांसी, श्वास लेने में कठिनाई तथा आंखों अथवा नासिका से असामान्य तरल बहने की शिकायत हो सकती है।

बिल्लियों के मामले में जब संक्रमण अनियंत्रित होने लगता है, तो उनके तंत्रिका तंत्र पर इसका गहरा असर दिखाई देता है। ऐसी परिस्थिति में शरीर में निरंतर कंपन, मिर्गी जैसे दौरे पड़ना और अचानक आंखों की रोशनी चले जाना जैसे बेहद गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षण प्रकट हो सकते हैं।

लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सालय से संपर्क की विधि

यदि किसी पालतू जानवर में ऐसे कोई भी लक्षण उभरते हैं और वह हाल के दिनों में किसी अस्वस्थ जंगली परिंदे, वन्य जीव अथवा बिना पकाए गए कच्चे पशु उत्पाद के संपर्क में आया हो, तो उसे बिना पूर्व सूचना दिए सीधे क्लिनिक ले जाने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर सबसे पहले फोन के जरिए अपने पशु चिकित्सक को पूरी स्थिति से अवगत कराना उचित है। इस पूर्व सूचना की मदद से चिकित्सा कर्मी संक्रमण नियंत्रण के सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित जांच और उपचार की अग्रिम तैयारी कर सकेंगे।

उपचार की सीमाएं और बचाव के व्यावहारिक कदम

वर्तमान समय में पालतू जीवों की सुरक्षा के लिए H5 बर्ड फ्लू का कोई अधिकृत टीका मौजूद नहीं है। इसके अलावा फ्लू रोधी पारंपरिक औषधियां कुत्तों एवं बिल्लियों पर कितनी असरदार और सुरक्षित हैं, इस पर भी वैज्ञानिक स्पष्टता का अभाव है। इन्हीं कारणों से सावधानी और रोकथाम को ही सबसे बड़ा रक्षा कवच माना जा रहा है।

पालतू जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ प्रमुख सुझाव दिए हैं

  • कुत्तों को बाहर टहलाते समय हमेशा मजबूत पट्टे का प्रयोग करें तथा घरेलू बिल्लियों को आवास के भीतर ही सीमित रखें, जिससे वे संक्रमित परिंदों का पीछा करने या उन्हें खाने से बची रहें।
  • पक्षियों की बीट, गिरे हुए पंख, मृत अवशेष और संक्रमित जलस्रोतों से पालतू जीवों को सर्वथा दूर रखें। जानवरों के भोजन और पानी के बर्तनों को कभी भी खुले आंगन में न छोड़ें तथा बाहर बने बिल्ली के पिंजरों को भली-भांति ढंककर रखें।
  • कच्चे आहार को लेकर विशेष सतर्कता बरतें। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिल्लियों में पाए गए अनेक मामले बिना पके मांस, अपाश्चुरीकृत दुग्ध पदार्थों और दूषित पैक्ड भोजन से जुड़े रहे हैं। केवल फ्रीजर में खाना जमा देने से यह रोगाणु नष्ट नहीं होता, इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करें।
  • यदि आपका कामकाज पक्षियों, कुक्कुट पालन अथवा वन्यजीवों से संबंधित है, तो गृह प्रवेश से पूर्व हाथों को अच्छी तरह साफ करें, उपकरणों को सैनिटाइज करें और अपने जूते व कपड़े बदलकर ही पालतू जीवों के पास जाएं।

यद्यपि वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में अधिकांश घरेलू जानवरों के लिए इसका जोखिम न्यूनतम है, तथापि सतर्कता में ही सुरक्षा निहित है। यदि आसपास कोई बीमार अथवा मृत वन्यजीव नजर आए, तो उसे छूने के बजाय तत्काल दूरी बनाएं और इसकी सूचना इमरजेंसी एनिमल डिजीज हॉटलाइन को दें।

सवाल-जवाब

क्या H5 बर्ड फ्लू कुत्तों और बिल्लियों को भी संक्रमित कर सकता है?
हां, यह वायरस कुत्तों और बिल्लियों को संक्रमित कर सकता है, हालांकि बिल्लियों में यह बीमारी कहीं अधिक जानलेवा पाई गई है।
ऑस्ट्रेलिया में पालतू जानवरों में इसके कितने मामले सामने आए हैं?
ऑस्ट्रेलिया में अभी तक घरेलू पालतू जानवरों में H5 बर्ड फ्लू का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है।
क्या पालतू जानवरों के लिए बर्ड फ्लू का कोई टीका उपलब्ध है?
फिलहाल कुत्तों और बिल्लियों के लिए H5 बर्ड फ्लू से बचाव का कोई टीका उपलब्ध नहीं है।
बिल्लियों में इस संक्रमण के गंभीर लक्षण क्या होते हैं?
संक्रमण गंभीर होने पर बिल्लियों में कंपकंपी, दौरे पड़ना और अचानक आंखों की रोशनी चले जाने जैसे तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षण दिखते हैं।
बीमार पक्षी दिखने पर क्या कदम उठाना चाहिए?
बीमार या मृत पक्षी से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और उसकी जानकारी इमरजेंसी एनिमल डिजीज हॉटलाइन को देनी चाहिए।
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