निजी चिकित्सा संस्थानों में इलाज के नाम पर हो रही भारी वसूली पर शिकंजा कसने के लिए केरल सरकार ने बड़ा कदम उठाने का मन बनाया है। राज्य सरकार की योजना निजी अस्पतालों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों को कानूनी दायरे में लाने और नियंत्रित करने की है। इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में एक नया विधेयक पेश किया जाएगा, जिसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने सोमवार को विधानसभा के पटल पर इस बात की आधिकारिक जानकारी दी कि सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है।
अनियंत्रित शुल्क और बीमा कंपनियों की चिंताएं
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान चर्चा का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि प्रदेश के कई निजी अस्पतालों में कमरों के किराए और दवाओं के दाम लगातार और बिना किसी उचित नियंत्रण के बढ़ते जा रहे हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि मनमाने दामों के कारण बीमा कंपनियां भी आम जनता को स्वास्थ्य बीमा कवर देने से हाथ खींचने लगी हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य के कई निजी अस्पतालों का संचालन अब विदेशी कंपनियों के प्रबंधन के हाथों में पहुंच चुका है, जिसके कारण शुल्कों पर लगाम लगाना और भी आवश्यक हो गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह प्रस्तावित विधेयक चालू विधानसभा सत्र में नहीं आएगा, बल्कि इसे अगले सत्र के दौरान निश्चित रूप से सदन में लाया जाएगा।
अस्पतालों के बढ़ते खर्च से बीमा बाजार पर असर
स्वास्थ्य विभाग के सामने आ रही इन चुनौतियों का असर सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में इलाज के बढ़ते खर्च और महंगे शुल्कों ने बीमा क्षेत्र को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालात इस हद तक पहुंच गए हैं कि बीमा प्रदाता कंपनियां लोगों को सुरक्षा कवर देने से कतराने लगी हैं। इसी समस्या के समाधान के रूप में सरकार यह विधेयक ला रही है, ताकि अस्पतालों के शुल्कों को एक निश्चित दायरे में बांधा जा सके। हालांकि, सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नए नियमों के तहत विभिन्न सेवाओं की दरें तय करने का पैमाना क्या होगा और इस विधेयक में कौन-कौन से कड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
बिना लाइसेंस चलने वाले स्पा पर होगी सख्त कार्रवाई
निजी अस्पतालों के नियंत्रण के अलावा विधानसभा में अवैध रूप से संचालित स्पा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। इस पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक कहा कि मौजूदा कानून ऐसे किसी भी अवैध काम की अनुमति नहीं देते हैं और उन पर पूरी तरह रोक लगाते हैं। सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को राज्यभर के सभी स्पा परिसरों का औचक निरीक्षण करने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग के स्वास्थ्य निरीक्षक इस समय जमीनी स्तर पर जांच-पड़ताल कर रहे हैं। मंत्री ने चेतावनी दी है कि जो भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आयुर्वेद संस्थान और औषधि कंपनी के मामलों पर अपडेट
सत्र के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने केरल में एक नए आयुर्वेद संस्थान की स्थापना के लिए उपयुक्त भूमि और स्थान की तलाश पर भी अपडेट साझा किया। उन्होंने सदन को बताया कि केंद्रीय आयुष मंत्री को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपे जाने के बाद, प्रमुख सचिव की अगुवाई में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। यह टीम पहले ही नई दिल्ली का दौरा कर चुकी है और इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके साथ ही, सरकारी आयुर्वेदिक औषधि निर्माता कंपनी ‘औषधि’ से जुड़े कथित सौंदर्य उपचार यानी ब्यूटी ट्रीटमेंट के विवादित मामले पर भी सरकार ने जवाब दिया। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच की थी। यह पूरा प्रकरण अंडे, गुड़हल की कलियों और खट्टे फलों के रस के इस्तेमाल से किए जाने वाले कथित उपचार से जुड़ा हुआ था। मंत्री ने सदन को सूचित किया कि समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट उन्हें सौंप दी है, जिसमें इस अनोखी उपचार पद्धति का उल्लेख किया गया है, हालांकि इस पर अभी तक कोई अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन आने वाले समय में उचित कदम उठाए जा सकते हैं।



















