घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करने की जीवनशैली के कारण आज के समय में पीठ और कमर में जकड़न की समस्या आम हो चली है। इस परेशानी से निजात पाने और शरीर का लचीलापन बरकरार रखने के लिए हस्तोत्तानासन एक बेहद असरदार योगासन साबित होता है। इस योगासन में शरीर के ऊपरी हिस्से यानी हाथों को ऊपर की तरफ उठाकर शरीर को अच्छी तरह खींचा जाता है और हल्का सा पीछे की तरफ मोड़ा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ कंधों और पेट की मांसपेशियों में बहुत अच्छा खिंचाव महसूस होता है। खास बात यह है कि यह आसन प्रसिद्ध सूर्य नमस्कार की प्रक्रिया का दूसरा और ग्यारहवां चरण भी माना जाता है। यदि इस योगासन को रोजाना सही विधि और नियम के साथ किया जाए, तो शरीर की जकड़न को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा यह शारीरिक सक्रियता को बढ़ाने में भी मददगार साबित होता है और व्यक्ति को पूरे दिन तरोताजा महसूस कराता है।
शब्दों की बनावट पर गौर करें तो हस्तोत्तानासन मूल रूप से संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमें पहले शब्द ‘हस्त’ का शाब्दिक अर्थ हाथ होता है, जबकि ‘उत्तान’ शब्द का अर्थ ऊपर की ओर एक खिंचाव पैदा करना होता है। इस खास आसन की क्रिया में व्यक्ति को अपने दोनों हाथों को सिर के ठीक ऊपर उठाकर पूरे शरीर को ऊपर की तरफ लंबा खींचना होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और योग गुरुओं के अनुसार इस योगासन को हमेशा सुबह के समय करना सबसे ज्यादा उत्तम और फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि सुबह के वक्त शरीर खुला हुआ होता है और ऊर्जा का स्तर भी अच्छा रहता है।
जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से हस्तोत्तानासन का अभ्यास करता है, तो इसका सबसे सीधा प्रभाव रीढ़ की हड्डी और उसके आसपास मौजूद मांसपेशियों पर पड़ता है। इन अंगों में हल्का खिंचाव पैदा होने की वजह से शरीर का प्राकृतिक लचीलापन लंबे समय तक बरकरार रहता है और रीढ़ की सेहत सुधरती है। इस आसन में हाथों को ऊपर की तरफ पूरी तरह उठाने और शरीर को तानने से केवल रीढ़ ही नहीं, बल्कि कंधों, बाजुओं और पेट की मांसपेशियों की भी बहुत अच्छी स्ट्रेचिंग हो जाती है। यह स्ट्रेचिंग मांसपेशियों के तनाव को दूर करने में सहायता करती है।
हस्तोत्तानासन का अभ्यास करते वक्त गहरी और नियंत्रित सांस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाती है और हाथों को ऊपर की तरफ खींचा जाता है, जिससे शरीर में एक नई ताजगी और ऊर्जा का संचार होता है। सुबह के शांत वातावरण में इस आसन को करने से दिन की शुरुआत एक सक्रिय और सकारात्मक तरीके से करने में बहुत मदद मिलती है। इस आसन के दौरान जब शरीर को पीछे की तरफ हल्का सा झुकाया जाता है, तो पेट की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है, जिससे पूरे शरीर की बेहतरीन स्ट्रेचिंग हो जाती है और पाचन तंत्र पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
इस योगासन को करते समय गहरी और नियंत्रित सांस लेने का अभ्यास करना बेहद जरूरी होता है। ऐसा करने से व्यक्ति का ध्यान अपनी सांसों पर केंद्रित रहता है और मन पूरी तरह शांत रहता है, जिससे मानसिक तनाव भी कम होता है। हालांकि इस आसन को करते समय कुछ सावधानियां बरतना भी उतना ही आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति को पीठ या गर्दन में बहुत गंभीर दर्द की शिकायत है या हाल ही में शरीर के इन हिस्सों में कोई चोट लगी है, तो उन्हें इस आसन को करने से पहले किसी डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करना चाहिए।
अभ्यास के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि शरीर को अपनी क्षमता से ज्यादा पीछे की ओर न झुकाएं, अन्यथा मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। यदि किसी व्यक्ति को अक्सर चक्कर आने की समस्या रहती है या वह दिल से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो उसे इस तरह के योगासन हमेशा किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करने चाहिए। इसके अलावा आसन का अभ्यास करते समय यदि शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द या असहजता महसूस हो, तो व्यक्ति को तुरंत अभ्यास रोक देना चाहिए और जबरदस्ती करने से बचना चाहिए।



















