सर्दियों के महीनों में चलने वाली सर्द हवाएं और वातावरण में नमी की भारी कमी केवल सामान्य रूखेपन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सोरायसिस से जूझ रहे मरीजों के लिए यह मौसम भारी शारीरिक परेशानी का कारण बन जाता है। इस अवधि में त्वचा पर लाल अथवा गहरे रंग के मोटे चकत्ते उभर आते हैं, सफेद रंग की पपड़ी जमने लगती है और असहनीय खुजली व जलन की समस्या कई गुना बढ़ जाती है। अधिकांश पीड़ित यह मान बैठते हैं कि ठंडक की वजह से उनकी समस्या अचानक विकराल हो गई है, जबकि इसके पीछे कई जैविक और वातावरणीय कारक सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
वास्तव में वायुमंडल में आर्द्रता का स्तर गिरना, धूप की पर्याप्त उपलब्धता न होना और कमरों को गर्म रखने के लिए हीटर का लगातार चलना ऐसे प्रमुख कारण हैं जो सोरायसिस के लक्षणों को तेजी से भड़का देते हैं। इस मौसमी बदलाव के पीछे मौजूद विज्ञान को समझना और त्वचा की विशेष सुरक्षा करना अत्यंत आवश्यक है ताकि ठंड के दिनों में भी इस रोग को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके।
सोरायसिस के लक्षण सर्दियों में क्यों हो जाते हैं गंभीर
सोरायसिस मूल रूप से त्वचा से जुड़ी एक दीर्घकालिक स्थिति है जो शरीर के इम्यून सिस्टम में होने वाली गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होती है। जब रोग प्रतिरोधक प्रणाली अनियंत्रित संकेत भेजने लगती है, तो त्वचा की नई कोशिकाएं सामान्य गति की तुलना में अत्यंत तेजी से विकसित होने लगती हैं। इस त्वरित निर्माण की वजह से पुरानी कोशिकाएं समय पर झड़ नहीं पातीं और सतह पर एकत्र होकर मोटे, सूखे तथा पपड़ीदार पैच के रूप में जमा हो जाती हैं। इन चकत्तों पर आमतौर पर सफेद अथवा चमकीली सिल्वर रंग की परत साफ तौर पर दिखाई देती है।
मौसम में आने वाले बदलाव पहले से मौजूद सोरायसिस को तेजी से भड़काने का काम करते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (एएडी) ने भी इस बात को स्पष्ट किया है कि ठंडा और शुष्क मौसम सोरायसिस के लक्षणों को भड़काने वाले प्रमुख उत्प्रेरकों में शामिल है। हालांकि प्रत्येक व्यक्ति के शरीर और त्वचा की प्रकृति अलग होती है, इसलिए मौसम का असर और तीव्रता भी हर मरीज में भिन्न हो सकती है।
सर्दियों में सोरायसिस भड़काने वाले प्रमुख कारण
शीत ऋतु में वातावरण की नमी में भारी गिरावट आ जाती है, जिससे त्वचा के भीतर मौजूद प्राकृतिक जलयोजन अत्यंत तेजी से समाप्त होने लगता है। सोरायसिस से ग्रस्त लोगों की त्वचा पहले से ही संवेदनशील होती है, और शुष्क हवाओं के संपर्क में आते ही वह अत्यधिक खुरदरी, खिंची हुई और खुजलीदार बन जाती है। ऐसी स्थिति में पपड़ीदार पैच सूखकर फटने लगते हैं और गंभीर दर्द का कारण बनते हैं।
सर्दियों के छोटे दिनों और लगातार घर के अंदर रहने की आदत के चलते शरीर को प्राकृतिक धूप बहुत कम मिल पाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य की किरणों में मौजूद यूवीबी किरणें सोरायसिस के चकत्तों को शांत करने और त्वचा कोशिकाओं की तेज वृद्धि को धीमा करने में सहायक सिद्ध होती हैं। पर्याप्त धूप न मिलने की स्थिति में यह प्राकृतिक सुरक्षा कवच कमजोर पड़ जाता है और रोग के लक्षण तेजी से उभरने लगते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि बिना चिकित्सीय परामर्श के तेज धूप में घंटों बैठकर त्वचा को झुलसा लिया जाए।
कड़ाके की ठंड से राहत पाने के लिए अत्यधिक गर्म पानी से देर तक नहाना बेहद सुखद लग सकता है, लेकिन यह आदत त्वचा के प्राकृतिक तेल और नमी को पूरी तरह सोख लेती है। लंबे समय तक गर्म पानी की धार के नीचे खड़े रहना और रासायनिक तत्वों से युक्त कड़े साबुनों का उपयोग करना त्वचा के सुरक्षात्मक बैरियर को क्षतिग्रस्त कर देता है, जिससे जलन और खुजली तीव्र हो जाती है।
कमरों का तापमान नियंत्रित रखने के लिए हीटर और ब्लोअर का लगातार संचालन कमरे की इनडोर हवा को पूरी तरह सूखा बना देता है। बंद कमरों की यह कृत्रिम गर्म हवा त्वचा की बची-खुची नमी को भी खींच लेती है, जिसके परिणामस्वरूप रूखापन पराकाष्ठा पर पहुंच जाता है। इसके अतिरिक्त सर्दियों में फैलने वाले वायरल संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियां भी प्रतिरक्षा तंत्र पर दबाव डालकर सोरायसिस के नए फ्लेयर-अप को जन्म दे सकती हैं।
शीत ऋतु में सोरायसिस के लक्षणों को नियंत्रित रखने के उपाय
यद्यपि सोरायसिस को रातों-रात पूरी तरह ठीक करने का कोई चमत्कारिक घरेलू नुस्खा उपलब्ध नहीं है, परंतु नियमित स्किनकेयर दिनचर्या और विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार योजना का कड़ाई से पालन करके इसे पूरी तरह नियंत्रण में रखा जा सकता है।
- मॉइस्चराइजर का निरंतर प्रयोग: स्नान करने के तुरंत बाद जब त्वचा में हल्की नमी हो, तब बिना खुशबू वाली गाढ़ी क्रीम अथवा ऑइंटमेंट का लेप करें और दिन में आवश्यकता पड़ने पर इसे दोबारा दोहराएं।
- अत्यधिक गर्म पानी से दूरी: नहाने के लिए हमेशा गुनगुने पानी का चयन करें और स्नान की कुल अवधि को सीमित रखें ताकि त्वचा की नमी सुरक्षित रहे।
- माइल्ड स्किनकेयर उत्पादों का चयन: तेज महक और रसायनों वाले साबुनों को त्यागकर सौम्य क्लींजर का उपयोग करें जो त्वचा को अतिरिक्त नुकसान न पहुंचाएं।
- कमरे में नमी का संतुलन: यदि घर के भीतर की हवा अत्यधिक शुष्क महसूस हो रही हो, तो इनडोर वातावरण को अनुकूल बनाए रखने के लिए कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- त्वचा को खरोंचने से बचाव: चकत्तों पर होने वाली खुजली को नाखूनों से खरोंचने की गलती न करें क्योंकि इससे घाव और संक्रमण का खतरा रहता है, और हमेशा ढीले व मुलायम कपड़े पहनें।
- दवाओं का नियमित क्रम: त्वचा विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई किसी भी क्रीम, लोशन अथवा गोलियों को अपनी मर्जी से बीच में बंद न करें और निर्धारित समय तक उपचार जारी रखें।
यदि उचित देखभाल के बावजूद त्वचा पर लाल चकत्ते लगातार फैल रहे हों, जलन और खुजली असहनीय हो जाए अथवा चल रही दवाएं निष्प्रभावी साबित हो रही हों, तो अविलंब त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। विशेष रूप से जब त्वचा की इन परेशानियों के साथ जोड़ों में बार-बार तेज दर्द, सूजन या सुबह के समय अकड़न महसूस होने लगे, तो डॉक्टरी जांच में तनिक भी देरी न करें क्योंकि सोरायसिस के कुछ मरीजों में सोरियाटिक अर्थराइटिस विकसित होने का गंभीर जोखिम रहता है।



















