सर्दियों के महीनों में सर्दी, जुकाम और इन्फ्लुएंजा जैसे सांस से जुड़े संक्रमणों का प्रकोप अचानक बढ़ जाता है। आम तौर पर लोग मानते हैं कि सिर्फ ठंडी हवा ही इन बीमारियों की सीधी वजह है, लेकिन इसके पीछे की असल वजह केवल कम तापमान तक सीमित नहीं है। ठंड के दौरान लोगों की जीवनशैली और रोजमर्रा की आदतों में बड़ा बदलाव आता है, जो वायरस के प्रसार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है।
बंद कमरे और ताजी हवा की कमी का प्रभाव
सर्दियों के मौसम में लोग ठंड से बचाव के लिए अपने घरों, दफ्तरों, स्कूलों और अन्य कार्यस्थलों पर खिड़कियां और दरवाजे ज्यादातर समय बंद रखते हैं। इस वजह से कमरों के भीतर ताजी हवा का आवागमन या वेंटिलेशन काफी कम हो जाता है। जब कई लोग एक ही बंद स्थान पर लंबा समय बिताते हैं, तो हवा का प्रवाह रुक सा जाता है।
यदि ऐसे किसी बंद और कम हवादार कमरे में कोई संक्रमित व्यक्ति मौजूद हो, तो उसके सांस लेने, बात करने, खांसने या छींकने से निकलने वाली बारीक सांस की बूंदें हवा में लंबे समय तक तैरती रह सकती हैं। हवा की पर्याप्त आवाजाही न होने से ये संक्रामक कण कमरे में जमा होते जाते हैं, जिससे वहां मौजूद अन्य स्वस्थ लोगों के संपर्क में आने और संक्रमित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले वायरस बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों पर अपेक्षाकृत अधिक आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं। इसलिए संक्रमण बढ़ने का कारण केवल ठंड लगना नहीं, बल्कि बंद जगहें, लोगों का आचरण और वेंटिलेशन का अभाव मिलकर तय करते हैं।
तापमान और नमी का वायरस पर वैज्ञानिक असर
तापमान और वातावरण की नमी भी कुछ वायरसों के सक्रिय रहने की क्षमता पर असर डाल सकती है। वैज्ञानिक अनुसंधानों में यह देखा गया है कि कम तापमान और शुष्क हवा यानी कम नमी वाली परिस्थितियों में इन्फ्लुएंजा वायरस अधिक तेजी से और आसानी से फैल सकता है।
हालांकि, इस संदर्भ में हुए अध्ययन प्रयोगशाला के भीतर जानवरों पर केंद्रित थे, इसलिए इन निष्कर्षों को हूबहू हर सामान्य मानवीय परिस्थिति या हर प्रकार के वायरस पर लागू नहीं किया जा सकता। सीडीसी का यह भी स्पष्ट करना है कि यद्यपि तापमान और नमी वायरस की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं, लेकिन सामान्य जीवन में संक्रमण से बचने के लिए सिर्फ कमरे का तापमान बढ़ाना या नमी में फेरबदल करना पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं है। रोजमर्रा के माहौल में कमरे के अंदर उचित वेंटिलेशन बनाए रखना और हवा की स्वच्छता सुनिश्चित करना कहीं ज्यादा कारगर सिद्ध होता है।
सर्दियों में बंद जगहों पर संक्रमण से सुरक्षा के उपाय
सर्दियों के दिनों में घर और दफ्तर के अंदर संक्रामक वायरस के संपर्क में आने से बचने के लिए वेंटिलेशन में सुधार करना बेहद आवश्यक कदम है। दिन के समय जब भी मौसम अनुकूल लगे, थोड़ी देर के लिए खिड़की या दरवाजा खोलकर कमरे में बाहरी ताजी हवा का संचार होने देना चाहिए। इससे कमरे के अंदर जमा दूषित हवा बाहर निकल जाती है।
बंद और बहुत अधिक भीड़भाड़ वाली जगहों पर लंबे समय तक रुकने से बचना चाहिए। यदि परिवार या कार्यस्थल पर कोई व्यक्ति पहले से अस्वस्थ या जुकाम से पीड़ित है, तो उस कमरे में हवा की आवाजाही का खास ख्याल रखना चाहिए। इसके साथ ही, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकना तथा नियमित रूप से हाथों को अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी फ्लू और इसी तरह के अन्य सांस के संक्रमणों से बचाव के लिए बंद स्थानों में उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था करने और भीड़भाड़ वाली बंद जगहों से दूरी बनाए रखने का सुझाव देता है।





















