सुबह सोकर उठने पर तकिए पर टूटे बाल दिखना, नहाते वक्त या कंघी फेरते ही उंगलियों में बालों का गुच्छा आना अक्सर घबराहट पैदा कर देता है। कई लोग बदलते मौसम के दिनों में बाल अधिक गिरने की शिकायत करते हैं और इसे केवल मौसमी असर मानकर टाल देते हैं। हालांकि, हर बार बालों का गिरना सिर्फ मौसम की मार नहीं होता। सामान्य जैविक चक्र के तहत पुराने बाल गिरते हैं और उनकी जगह नए उगते हैं, लेकिन जब गिरने की रफ्तार नई ग्रोथ से तेज हो जाए या सिर की त्वचा दिखने लगे, तो यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या या पोषक तत्वों की कमी की ओर इशारा करता है। इस अंतर को समझना बालों की सेहत बचाने के लिए सबसे पहला कदम है।
सामान्य हेयर शेडिंग और मौसमी बदलाव का गणित
मानव शरीर में बालों के उगने, आराम की अवस्था में रहने और टूटने का एक नियमित चक्र चलता रहता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के मानकों को देखें तो रोजाना औसतन 50 से 100 बाल गिरना पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित माना जाता है। जब तक नए बाल सामान्य रफ्तार से उग रहे हैं और सिर का कुल घनापन बना हुआ है, तब तक दैनिक रूप से कुछ बाल टूटना चिंता का विषय नहीं होता। लंबे बालों में यह संख्या देखने में ज्यादा लग सकती है, क्योंकि लंबे रेशे कंघी या तौलिये में आसानी से उलझ जाते हैं और स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
ऋतु परिवर्तन के दौर में, विशेषकर उमस या अत्यधिक ठंड के दिनों में, कई लोगों को बालों का झड़ना अचानक बढ़ा हुआ महसूस होता है। इसे मौसमी शेडिंग कहा जाता है। मौसमी असर आमतौर पर कुछ हफ्तों में खुद ब खुद थम जाता है और बालों का घनत्व पहले की तरह सामान्य हो जाता है। यदि कई महीने बीत जाने के बाद भी बालों का लगातार गिरना कम न हो या बालों का घनापन लगातार घटता चला जाए, तो इसे मौसम की बात मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
इन खास शारीरिक बदलावों को कतई अनदेखा न करें
साधारण बाल गिरने और स्थायी हेयर लॉस के बीच बारीक लेकिन महत्वपूर्ण फर्क होता है। सबसे पहला संकेत तब मिलता है जब सिर की मांग यानी पार्टिंग लाइन धीरे-धीरे चौड़ी होने लगती है। जब मांग के दोनों किनारों के बाल पतले पड़ने लगते हैं और स्कैल्प साफ चमकने लगती है, तो यह केवल रोजमर्रा की शेडिंग नहीं रह जाती।
माथे के किनारों से हेयरलाइन का पीछे खिसकना, पोनीटेल का व्यास पहले की तुलना में बहुत पतला हो जाना और क्राउन एरिया से बालों का विरल होना इस बात का प्रमाण है कि हेयर फॉलिकल्स कमजोर हो रहे हैं। यदि नहाने के बाद कंघी करने पर बालों की मोटाई में लगातार गिरावट महसूस हो, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
तनाव, बीमारी और टेलोजन एफ्लुवियम का संबंध
अक्सर अत्यधिक बाल झड़ने की जड़ वर्तमान मौसम में नहीं, बल्कि दो से चार महीने पहले घटी किसी शारीरिक या मानसिक घटना में छिपी होती है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को टेलोजन एफ्लुवियम कहा जाता है। जब शरीर अचानक किसी बड़े तनाव, तेज बुखार, गंभीर संक्रमण, किसी बड़ी सर्जरी, तेजी से वजन घटने या प्रसव के बाद होने वाले भारी हार्मोनल बदलावों से गुजरता है, तो बालों का सामान्य ग्रोथ साइकिल बुरी तरह बाधित हो जाता है।
इस स्थिति में बड़ी संख्या में बाल एक साथ अपने बढ़ने के चरण से सीधे आराम यानी रेस्टिंग फेज में चले जाते हैं। उस आघात या तनावपूर्ण घटना के लगभग दो से चार महीने बाद वे बाल एक साथ तेजी से गिरने लगते हैं। अच्छी बात यह है कि टेलोजन एफ्लुवियम में शरीर के सामान्य संतुलन में वापस आते ही बालों का चक्र धीरे-धीरे दोबारा पटरी पर लौट आता है और नए बाल निकलने लगते हैं।
विशेषज्ञ से परामर्श कब है अनिवार्य
यदि बालों की समस्या सामान्य घरेलू उपायों या तेल बदलने से ठीक नहीं हो रही है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट यानी त्वचा और बालों के विशेषज्ञ को दिखाना अनिवार्य हो जाता है। कुछ ऐसे आपात लक्षण हैं जिन्हें कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए
- अचानक गोल पैच बनना: सिर पर यदि किसी एक हिस्से में सिक्के के आकार की पूरी तरह खाली जगह या गोल पैच दिखने लगे।
- मांग का लगातार चौड़ा होना: बीच की मांग की रेखा महीने दर महीने और चौड़ी नजर आने लगे और सिर की त्वचा दिखने लगे।
- स्कैल्प में जलन या पपड़ी: सिर की त्वचा पर लगातार खुजली, लाल चकत्ते, दाने या मोटी पपड़ी जम रही हो।
- महीनों तक अनियंत्रित शेडिंग: रोजाना भारी मात्रा में बाल गिर रहे हों और यह सिलसिला कई महीनों से बिना रुके जारी हो।
योग्य चिकित्सक स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद थायरॉइड प्रोफाइल, सीरम फेरिटिन यानी आयरन का स्तर और जरूरी विटामिनों की रक्त जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं। बिना मेडिकल जांच और डॉक्टर के परामर्श के मनमर्जी से हेयर सप्लीमेंट या दवाएं खाना नुकसानदेह साबित हो सकता है।
बालों की सुरक्षा के लिए दैनिक जीवन में जरूरी बदलाव
मजबूत और घने बालों के लिए बाहरी लेप से कहीं ज्यादा आंतरिक पोषण और सही देखभाल की आवश्यकता होती है। दैनिक आहार में प्रोटीन, आयरन, जिंक और आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए, क्योंकि बाल मूल रूप से प्रोटीन संरचना से बने होते हैं।
दैनिक जीवनशैली में कुछ गलत आदतों को तुरंत सुधारना आवश्यक है। बालों को बहुत ज्यादा खींचकर या कसकर बांधने से ट्रैक्शन एलोपेसिया का खतरा रहता है। बार-बार ड्रायर, स्ट्रेटनर या कर्लर जैसी हीट स्टाइलिंग मशीनों का अंधाधुंध उपयोग बालों की शाफ्ट को कमजोर कर देता है। गीले बालों की जड़ें सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए उन्हें तौलिये से जोर-जोर से रगड़ना या गीली अवस्था में बारीक कंघी से खींचना बंद करना चाहिए।



















