हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ कार्डिएक प्रोसीजर के जरिए कैरिबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो की रहने वाली 35 वर्षीय कार्वियन डेविड को नया जीवन प्रदान किया है। एक पेशेवर रेस्टोरेंट मालिक कार्वियन पिछले नौ वर्षों से एंड-स्टेज राइट-साइडेड हार्ट फेलियर और ट्राइकसपिड वॉल्व के खतरनाक रिसाव जैसी जानलेवा स्थिति से जूझ रही थीं। इस गंभीर बीमारी की वजह से उनके शरीर में फ्लूइड जमा होने लगा था और वह सीधा पेट के बल सोने में पूरी तरह असमर्थ हो गई थीं। हालांकि, भारत में अपनाए गए दक्षिण कोरियाई तकनीक वाले एक खास ट्रांसकैथेटर इम्प्लांट ने उनकी सेहत में नाटकीय सुधार ला दिया है।
नौ वर्षों का दर्दनाक संघर्ष और स्थानीय डॉक्टरों की बेबसी
कार्वियन डेविड के लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां तब शुरू हुई थीं जब उनकी उम्र केवल 27 साल थी। शुरुआत में उन्हें सांस फूलने की हल्की शिकायत महसूस हुई, जिसे सामान्य समझकर नजरअंदाज किया गया। लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर होती गई और उनका हृदय शरीर के दाहिने हिस्से से रक्त को सही ढंग से पंप करने में सक्षम नहीं रहा। उनके दिल का ट्राइकसपिड वॉल्व अत्यधिक रिसाव करने लगा, जिससे शरीर के तरल पदार्थ विपरीत दिशा में बहने लगे। बीते नौ सालों में यह स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उनके पेट और पैरों में लगातार भारी सूजन बनी रहने लगी। त्रिनिदाद के स्थानीय डॉक्टरों ने इलाज की सभी संभावनाओं से इंकार कर दिया था और स्पष्ट कर दिया था कि एक बेहद जोखिम भरे और जटिल हार्ट-एंड-लंग ट्रांसप्लांट के अलावा उनके पास जीवित रहने का कोई अन्य रास्ता नहीं बचा है।
इंटरनेट से मिली उम्मीद की किरण और भारत की कठिन यात्रा
जब स्वदेश में सभी चिकित्सा रास्ते बंद प्रतीत होने लगे, तब कार्वियन डेविड और उनकी मां नताली पॉल ने हार नहीं मानी। उन्होंने ऑनलाइन माध्यमों से दुनिया भर में मौजूद चिकित्सा विकल्पों की खोज शुरू की। इस दौरान उन्हें बार-बार भारत के अत्याधुनिक मेडिकल हब होने और यहां के कुशल कार्डियोलॉजिस्ट्स के बारे में जानकारी मिली। बिना कोई समय बर्बाद किए, दोनों ने तुरंत भारत आने की योजना बनाई। टोरंटो और ज्यूरिख से होकर दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचने वाली तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा कार्वियन के लिए अत्यधिक शारीरिक पीड़ा से भरी थी। यात्रा के दौरान उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि पैरों और पेट से लगातार रिसने वाले तरल पदार्थ की वजह से उनके ओढ़े हुए कंबल भी पूरी तरह भीग जाते थे।
पिवट एक्सटेंड सिस्टम तकनीक और प्रशासनिक मंजूरी का त्वरित फैसला
दिल्ली-एनसीआर पहुंचने के बाद प्राथमिक जांच में यहां के चिकित्सकों ने भी शुरुआती तौर पर ट्रांसप्लांट को ही एकमात्र विकल्प माना था। लेकिन विस्तृत कार्डियक मूल्यांकन के दौरान विशेषज्ञों ने एक नए और स्थाई ट्रांसकैथेटर डिवाइस पिवट एक्सटेंड सिस्टम के उपयोग का प्रस्ताव रखा। यह चिकित्सा उपकरण दुनिया भर में बेहद सीमित स्तर पर इस्तेमाल हुआ है और इस प्रक्रिया से पहले वैश्विक स्तर पर इसके केवल 40 प्रोसीजर ही रिकॉर्ड किए गए थे। भारत में यह इस तकनीक का कुल तीसरा और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का पहला ऐतिहासिक मामला था। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए भारत की केंद्रीय लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने मात्र पांच दिनों के भीतर इस विशेष उपकरण को आयात करने की मंजूरी दे दी। इस डिवाइस को सीधे दक्षिण कोरिया से मंगाया गया, जिसकी मूल कीमत लगभग 15,000 अमेरिकी डॉलर ($15,000) थी। इसके साथ ही 4,000 डॉलर का इम्पोर्ट ड्यूटी शुल्क लगा, जबकि पूरी प्रक्रिया का कुल चिकित्सकीय खर्च लगभग 2 लाख रुपये आया।
गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में ऐतिहासिक सर्जरी का सफल आयोजन
यह जटिल और जोखिम भरी प्रक्रिया गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. (कर्नल) मंजिंदर सिंह संधू के नेतृत्व में पूरी की गई। डॉ. संधू ने बताया कि मरीज एंड-स्टेज राइट-साइडेड हार्ट फेलियर से पीड़ित थी और परंपरागत उपचार के विकल्प लगभग समाप्त हो चुके थे। उन्होंने इस डिवाइस के अंतरराष्ट्रीय आविष्कारक से लंबी चर्चा करने के बाद इस अत्याधुनिक सर्जरी को अंजाम देने का साहसिक निर्णय लिया। डॉ. मंजिंदर सिंह संधू के अनुसार, "इस तकनीक ने वॉल्व के खतरनाक रिसाव को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है।" इस दुर्लभ प्रक्रिया की सफलता को स्वयं देखने के लिए दक्षिण कोरिया के पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी यांगसान अस्पताल के प्रो. डॉ. जूनहोंग किम भी विशेष रूप से भारत पहुंचे थे, जिन्होंने खुद इस पिवट एक्सटेंड सिस्टम का आविष्कार किया है।
सर्जरी के बाद का चमत्कारिक सुधार और नई जिंदगी की शुरुआत
चिकित्सकीय योजना के तहत कार्वियन डेविड को सबसे पहले 22 जुलाई को पेसमेकर बदलने की प्रक्रिया से गुजारा गया। इसके दो दिन बाद 24 जुलाई को उन्हें पिवट एक्सटेंड सिस्टम इम्प्लांट किया गया। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद किए गए मेडिकल स्कैन में यह पुष्टि हुई कि उनके ट्राइकसपिड वॉल्व का अत्यधिक रिसाव घटकर अब केवल मध्यम स्तर पर रह गया है। त्वरित रिकवरी के चलते मरीज को महज दो दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। नौ साल के लंबे अंतराल के बाद बिना किसी दर्द के पेट के बल सो पाने का अनुभव साझा करते हुए कार्वियन डेविड ने कहा, "नौ साल के लंबे अंतराल के बाद आज मैं चैन से पेट के बल सो पाई हूं।" उन्होंने बताया कि यह भले ही आम लोगों के लिए छोटी बात लगे, लेकिन उनके और उनकी मां नताली पॉल के लिए यह पूरी दुनिया की खुशी जैसा है। अब वह भारतीय चिकित्सा प्रणाली की कार्यकुशलता की प्रशंसक बन चुकी हैं और वैश्विक स्तर पर भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की क्षमताओं का प्रचार करने की इच्छा रखती हैं।



















