आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, बिगड़ती दिनचर्या और हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण थायरॉइड से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। थायरॉइड ग्रंथि हमारे शरीर के चयापचय (मेटाबॉलिज्म), ऊर्जा के स्तर और समग्र हार्मोनल संतुलन को नियंत्रित करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह और नियमित दवाओं के साथ-साथ योग और प्राणायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। महादेवन योग स्टूडियो की योग शिक्षिका पूजा ने थायरॉइड की समस्याओं से निपटने और शरीर तथा सांसों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए कुछ बेहद सरल और प्रभावी योगाभ्यासों के बारे में बताया है। उनके अनुसार, इन आसनों के नियमित अभ्यास से न केवल शरीर को गहरा आराम मिलता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
गले के खिंचाव के लिए ब्रिज पोज (सेतुबंधासन)
इस योग सत्र की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले एक योग मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर मजबूती से टिका कर रखें। अब अपने दोनों हाथों से पैरों की एड़ियों को पकड़ने का प्रयास करें। इस स्थिति में आने के बाद, धीरे-धीरे अपने कूल्हों और छाती को ऊपर की तरफ उठाएं। जब आप शरीर को ऊपर उठाएंगे, तो आपको अपनी गर्दन और गले के आसपास एक हल्का और आरामदायक खिंचाव महसूस होगा, जो थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में मदद करता है। इस मुद्रा में रहते हुए अपनी सांसों की गति पर पूरा ध्यान केंद्रित करें और लगभग 10 से 20 सेकंड तक इसी स्थिति में बने रहें।
हलासन के अभ्यास से बढ़ाएं शरीर का लचीलापन
ब्रिज पोज का अभ्यास पूरा करने के बाद, धीरे-धीरे हलासन की स्थिति में आएं। इसके लिए पीठ के बल लेटे हुए ही अपने दोनों पैरों को हवा में उठाएं और धीरे-धीरे उन्हें अपने सिर के पीछे की तरफ ले जाने का प्रयास करें। यदि संभव हो, तो अपने पैरों की उंगलियों को जमीन से छूने की कोशिश करें। इस आसन को करते समय किसी भी तरह की जल्दबाजी करने से बचें और शरीर के साथ जबरदस्ती न करें। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही इस मुद्रा में रुकें। योग शिक्षिका पूजा के अनुसार, इस खिंचाव का पूरा लाभ उठाने के लिए इस स्थिति में लगभग 20 से 30 सेकंड तक रुका जा सकता है।
ऊंटासन (कैमल पोज) से गले और छाती का विस्तार
हलासन के बाद अगला अभ्यास ऊंटासन यानी कैमल पोज का है, जो गले और छाती के हिस्से को खोलने के लिए बेहतरीन माना जाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल खड़े हो जाएं और दोनों घुटनों के बीच थोड़ा अंतर रखें। इसके बाद, धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और अपनी एड़ियों को पकड़ें। अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाते हुए शरीर को पीछे की तरफ झुकाएं। इस पूरे अभ्यास के दौरान अपनी सांस लेने की गति को सामान्य बनाए रखें। इस खिंचाव को महसूस करते हुए करीब 20 से 30 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहने का प्रयास करें।
मत्स्यासन (फिश पोज) से सांसों को करें संतुलित
पीठ के पिछले झुकाव को संतुलित करने के लिए मत्स्यासन का अभ्यास किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेटकर पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। इसके बाद अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं और अपने सिर के ऊपरी हिस्से (क्राउन एरिया) को मैट से टिकाने का प्रयास करें। इस दौरान आप अपने हाथों को शरीर के बगल में रख सकते हैं या ऊपर की ओर उठा सकते हैं। यह आसन फेफड़ों और गले के मार्ग को साफ करने में मदद करता है। इस मुद्रा में भी 20 से 30 सेकंड तक रुकने और अपनी सांसों पर ध्यान लगाने की सलाह दी गई है।
मानसिक शांति के लिए करें उज्जायी प्राणायाम
इन सभी शारीरिक आसनों को पूरा करने के बाद कुछ मिनटों के लिए शव आसन में लेटकर आराम करें। इसके बाद शांत चित्त से बैठकर उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास शुरू करें। इस प्राणायाम को करने के लिए अपना मुंह बंद रखें और केवल नाक से ही सांस को अंदर खींचें और बाहर छोड़ें। सांस लेते और छोड़ते समय अपने गले को थोड़ा संकुचित करें, जिससे गले से एक हल्की 'ह' जैसी आवाज या समुद्र की लहरों जैसी फुसफुसाहट निकले। इस अभ्यास के दौरान अपना पूरा ध्यान सांसों की गति और उससे उत्पन्न होने वाली ध्वनि पर केंद्रित रखें। योग विशेषज्ञ पूजा का मानना है कि यह प्राणायाम मानसिक तनाव को दूर करने और श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाने में बेहद मददगार है।



















