चित्रकूट के जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक बेहतर एवं सुरक्षित बनाने का काम तेजी से चल रहा है। अस्पताल परिसर स्थित ऑपरेशन थिएटर (OT) और लेबर रूम को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे प्रसूति एवं सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होगी। इस नए कदम से गंभीर स्थिति में महिला मरीजों को बड़े शहरों या महंगे निजी अस्पतालों में जाने की जरूरत काफी कम हो जाएगी।
जिला खनिज निधि से 88.01 लाख रुपये का बजट
इस पूरे नवीनीकरण कार्य के लिए जिला खनिज निधि (DMF) से कुल 88.01 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस बजट की मदद से अस्पताल में एक सर्वसुविधायुक्त मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तैयार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नए OT को आधुनिक चिकित्सा मानकों के अनुसार सुसज्जित किया जा रहा है, जिसमें संक्रमण से बचाव और सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है।
अपग्रेडेशन कार्य के अंतर्गत OT में विशेष पैनलिंग, एंटी-बैक्टीरियल पेंट और विनाइल फ्लोरिंग कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त, फॉल्स सीलिंग, सर्जिकल सामान के रखरखाव के लिए बेहतर स्टोरेज व्यवस्था, इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड और आधुनिक मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम (MGPS) स्थापित किया जा रहा है। सर्जनों की सुविधा के लिए इसमें 2-डोम LED OT लाइट्स और पूर्ण एयर-कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाया जा रहा है।
दो महीने में पूरा होगा निर्माण कार्य
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने जानकारी दी कि जिलाधिकारी के दिशा-निर्देशों के तहत लेबर रूम और OT को आधुनिक बनाने का कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि निर्माण और अपग्रेडेशन का यह कार्य आगामी दो महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके तैयार हो जाने के बाद चित्रकूट जिले की गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव और आपातकालीन सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा सरकारी अस्पताल में ही सुलभ हो सकेगी।
खोह अस्पताल में भी शुरू होगी सिजेरियन सुविधा
स्वास्थ्य विभाग जिले भर में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिला अस्पताल के अलावा खोह अस्पताल में भी सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा शुरू करने की तैयारी चल रही है। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुरूप अगले महीने से खोह अस्पताल में शल्य चिकित्सा द्वारा प्रसव कराने की व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी, ताकि ग्रामीण इलाकों के निवासियों को भी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही बेहतर इलाज मिल सके।



















