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त्वचा और दांतों के लिए संजीवनी है नीम, लेकिन इस्तेमाल से पहले जान लें ये जरूरी सावधानियांस्वास्थ्य
20 अग॰ 2026, 7:03 am (23 दिन पहले)· 2

त्वचा और दांतों के लिए संजीवनी है नीम, लेकिन इस्तेमाल से पहले जान लें ये जरूरी सावधानियां

नेचुरल एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर नीम त्वचा और मसूड़ों के लिए बेहद उपयोगी है। हालांकि, गहरे घावों, गर्भावस्था और दवाओं के साथ इसका गलत इस्तेमाल नुकसान भी पहुंचा सकता है।

सदियों से भारतीय परंपरा और चिकित्सा पद्धति में नीम को एक महत्वपूर्ण औषधि का दर्जा प्राप्त है। इसके पत्तों में पाए जाने वाले जीवाणुरोधी और कवक-रोधी यानी एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल तत्व कई तरह की शारीरिक समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं। हालांकि, इसे हर बीमारी की रामबाण दवा मान लेने के बजाय सही जानकारी, सीमित मात्रा और चिकित्सीय सलाह के साथ इस्तेमाल करना बेहद आवश्यक है। नीम का अनुचित प्रयोग या अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए विपरीत परिणाम भी पैदा कर सकता है।

बरसात के मौसम में त्वचा की देखभाल और सावधानियां

मानसून के दिनों में हवा में नमी और शरीर पर लगातार पसीने के कारण त्वचा पर खुजली, लाल दाने और जलन जैसी शिकायतें काफी बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में नीम की पत्तियों को पानी में अच्छी तरह उबालकर, फिर उस पानी को ठंडा करके प्रभावित त्वचा को धोना काफी राहत प्रदान करता है। इससे त्वचा की सामान्य सफाई होती है और अंदर से ताजगी महसूस होती है। हालांकि, इसे किसी भी गंभीर त्वचा संक्रमण का स्थायी इलाज नहीं माना जा सकता। यदि इस नीम वाले पानी के इस्तेमाल से जलन बढ़ने लगे या त्वचा अधिक लाल हो जाए, तो तुरंत इसका प्रयोग रोक देना चाहिए और त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

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इसी तरह, दाद और फंगल इंफेक्शन की स्थिति में नीम के पेस्ट या नीम के पानी का इस्तेमाल एक लंबे समय से किया जाने वाला पारंपरिक घरेलू उपाय है। फिर भी, यह जरूरी नहीं है कि इससे फंगल इंफेक्शन पूरी तरह समाप्त हो ही जाए। कई बार चिकित्सीय एंटीफंगल दवाओं की सख्त जरूरत होती है। चूंकि दाद एक छुआछूत और फैलने वाली समस्या है, इसलिए प्रभावित हिस्से को हमेशा सूखा रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, अपने कपड़े और तौलिया किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। यदि संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा हो, तो घरेलू उपचार के भरोसे रहने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना ही सही कदम है।

दांतों की सेहत और नीम की दातुन के फायदे

ग्रामीण इलाकों और पारंपरिक जीवनशैली में नीम की दातुन का इस्तेमाल व्यापक रूप से होता आ रहा है। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल की अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, नीम की टहनियों से बनी दातुन से मुंह की सफाई बहुत ही प्रभावी ढंग से होती है। इससे दांतों और मसूड़ों को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं। जिन लोगों को दांतों से लगातार खून आने, मसूड़ों में तेज दर्द या सूजन की परेशानी रहती है, उनके लिए नीम की दातुन का उपयोग काफी लाभकारी साबित हो सकता है। यह मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करती है।

घाव पर लेप की जोखिम और सुबह खाली पेट सेवन

छोटे-मोटे त्वचा संबंधी मामलों में नीम का उपयोग भले ही असरदार हो, लेकिन किसी भी खुले या गहरे घाव पर घर में बना नीम का लेप लगाना खतरनाक साबित हो सकता है। गहरे घाव की स्थिति में संक्रमण से बचने के लिए घाव को साफ रखना और सही तरीके से ड्रेसिंग कराना ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है। यदि घाव में मवाद यानी पस पड़ने लगे, लालिमा तेजी से बढ़े, तेज दर्द महसूस हो या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत घरेलू प्रयोग छोड़कर योग्य डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

दूसरी ओर, यद्यपि नीम का स्वाद बहुत कड़वा होता है, फिर भी सुबह-सुबह खाली पेट इसकी कुछ कोमल पत्तियों को चबाना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। यह रक्त को साफ करने यानी ब्लड प्यूरीफिकेशन में किसी संजीवनी की तरह काम करता है। हालांकि, नीम का सेवन करने से पहले कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।

जरूरी चेतावनियां और आंखों की रोशनी पर असर

नीम का सेवन करते समय कुछ स्वास्थ्य स्थितियों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और जो लोग पहले से किसी अन्य बीमारी की दवा ले रहे हैं, उन्हें बिना डॉक्टर की राय के नीम का किसी भी रूप में सेवन नहीं करना चाहिए। नीम का सेवन ब्लड शुगर के स्तर को कम करने और पेट के कीड़ों को खत्म करने में मदद करता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि डायबिटीज के मरीज अपनी नियमित दवाएं छोड़कर पूरी तरह नीम पर निर्भर हो जाएं। मधुमेह की दवाएं बंद करके केवल नीम लेना जानलेवा हो सकता है। पेट में कीड़े होने की आशंका होने पर भी चिकित्सीय जांच और प्रामाणिक उपचार ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

नीम की पत्तियां और छाल दादी-नानी के जमाने से घरेलू नुस्खों का हिस्सा रही हैं। सीमित मात्रा और सही जानकारी के साथ इसका उपयोग काफी फायदेमंद है, लेकिन इसके अत्यधिक सेवन से गंभीर नुकसान भी हो सकता है। विशेष रूप से नीम का बहुत ज्यादा सेवन करने से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है और देखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए, नीम का किसी भी रूप में औषधीय उपयोग करने से पहले एक्सपर्ट की राय लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

सवाल-जवाब

बरसात में त्वचा की खुजली और दानों के लिए नीम का उपयोग कैसे करें?
नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर ठंडा कर लें और उस पानी से प्रभावित त्वचा को धोएं। हालांकि, जलन या लालिमा बढ़ने पर तुरंत इसका उपयोग बंद कर दें।
क्या नीम की दातुन करने से दांत दर्द और मसूड़ों से खून आने में राहत मिलती है?
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, नीम की दातुन से दांतों की सफाई होती है और मसूड़ों की सूजन, दर्द तथा खून आने में राहत मिलती है।
क्या खुले या गहरे घाव पर नीम का लेप लगाना सुरक्षित है?
नहीं, खुले या गहरे घाव पर घर का बना नीम का लेप लगाना सुरक्षित नहीं है। घाव में मवाद, तेज दर्द या बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
किन लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के नीम का सेवन नहीं करना चाहिए?
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से कोई दवा ले रहे मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना नीम का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
नीम का अत्यधिक सेवन करने से क्या नुकसान हो सकता है?
अत्यधिक मात्रा में नीम का सेवन करने से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसका उपयोग हमेशा सीमित और डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
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