गोंडा के घरों, खेतों और बगीचों में आसानी से दिख जाने वाला एलोवेरा सिर्फ एक हरा पौधा नहीं है, बल्कि सेहत और सुंदरता दोनों से जुड़ी सदियों पुरानी पहचान रखता है। इसे घृतकुमारी भी कहा जाता है। इसकी मोटी, हरी पत्तियों के भीतर भरा गाढ़ा जेल ही असली खजाना है, जिसकी वजह से आयुर्वेद में इसे एक अहम औषधीय पौधे का दर्जा मिला हुआ है।
वैद्य जमुना प्रसाद यादव के मुताबिक एलोवेरा में विटामिन ए, सी, ई और बी12 के साथ फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट तत्व मौजूद रहते हैं। यही पोषक तत्व इसे सेहत के लिहाज से फायदेमंद बनाते हैं। हालांकि वे साफ कहते हैं कि किसी बीमारी के इलाज में इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या जानकार की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
त्वचा को ठंडक और नमी
एलोवेरा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल त्वचा की देखभाल में होता है। पत्तियों से निकला जेल त्वचा को ठंडक देने का काम करता है। गर्मी के मौसम में तेज धूप से होने वाली जलन में लोग इसे लगाते हैं। कई लोग इसे सीधे चेहरे पर भी लगाते हैं, जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है और वह तरोताजा महसूस होती है। यही वजह है कि बाजार में मिलने वाले कई ब्यूटी और स्किन केयर प्रोडक्ट्स में एलोवेरा शामिल किया जाता है।
बालों के लिए घरेलू नुस्खा
बालों की देखभाल में भी एलोवेरा खूब इस्तेमाल होता है। गांव-देहात में कई लोग इसका जेल सीधे बालों में लगाते हैं। माना जाता है कि इससे बालों को पोषण मिलता है और रूखेपन की दिक्कत कम हो सकती है। कुछ लोग इसे प्राकृतिक हेयर मास्क की तरह भी आजमाते हैं। यही कारण है कि कई हर्बल शैंपू और हेयर प्रोडक्ट्स में एलोवेरा एक प्रमुख घटक के तौर पर मौजूद रहता है।
पाचन में मदद, पर संभलकर
आयुर्वेद में एलोवेरा को पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा माना गया है। कुछ लोग इसे सीमित मात्रा में खाते हैं और पारंपरिक मान्यता के मुताबिक यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन यह हर किसी के शरीर को रास नहीं आता, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इसका ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए।
किसानों के लिए कमाई का जरिया
एलोवेरा सिर्फ घरेलू नुस्खा नहीं, किसानों के लिए मुनाफे का सौदा भी है। औषधीय, कॉस्मेटिक और हर्बल उत्पाद बनाने वाली कंपनियों में इसकी मांग बनी रहती है। यही वजह है कि कई किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ एलोवेरा भी उगा रहे हैं। इसकी खेती में पानी अपेक्षाकृत कम लगता है और यह कई तरह की मिट्टी में उग जाता है। इसी खूबी की वजह से सूखे से जूझ रहे इलाकों में भी इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कम देखभाल, आसान उपलब्धता
ग्रामीण इलाकों में लोग इसे घरेलू जरूरत के लिए भी लगाते हैं। कई परिवार अपने आंगन या बगीचे में इसके पौधे रखते हैं और जरूरत पड़ने पर पत्तियों का इस्तेमाल कर लेते हैं। कम देखभाल और आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है।
जमुना प्रसाद यादव यह भी आगाह करते हैं कि एलोवेरा में फायदेमंद गुण भले ही ढेरों हों, लेकिन इसे किसी गंभीर बीमारी का पक्का इलाज नहीं मान लेना चाहिए। सेहत से जुड़ी कोई दिक्कत होने पर सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, और एलोवेरा को सिर्फ एक सहायक उपाय की तरह ही इस्तेमाल करना चाहिए।













