बारिश की पहली बौछार पड़ते ही फल बाजारों में काले और बैंगनी जामुन के ढेर लग जाते हैं। आयुर्वेद में इस छोटे से फल को बड़ी औषधि माना गया है और खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए तो यह किसी वरदान से कम नहीं। लेकिन यहां एक पेच है, जो दुकान पर सजा हर बड़ा और चमकता जामुन आपकी सेहत के लिए उतना फायदेमंद नहीं होता जितना दिखता है।
असल में मुनाफे की होड़ में बाजार अब हाइब्रिड और केमिकल से पकाए गए जामुनों से भरा पड़ा है। ग्राहक बड़े साइज और चमक पर मोहित होकर इन्हें उठा तो लेते हैं, पर इनमें वह असली देसी जामुन वाली ताकत नहीं होती। जामुन में मौजूद 'जंबोलिन' (Jamboline) नाम का तत्व ब्लड शुगर को काबू में रखने में मदद करता है, और यही तत्व देसी फल की असली पहचान है।
तो अगली बार ठगे जाने से बचने के लिए इन पांच आसान तरीकों को याद रखिए, जिनसे आप चंद मिनटों में देसी और हाइब्रिड जामुन का अंतर पकड़ सकते हैं।
1. आकार और बनावट पर गौर करें
देसी जामुन आमतौर पर छोटा या मध्यम आकार का होता है। यह पूरी तरह गोल या एक जैसा सुडौल नहीं दिखता, बल्कि थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा या अंडाकार हो सकता है। इसके उलट हाइब्रिड जामुन काफी बड़ा होता है और सारे फल एक जैसे, बिल्कुल सुडौल तथा अंगूर या बेर जैसे भरे-भरे नजर आते हैं।
2. कुदरती रंगत बनाम बनावटी चमक
देसी जामुन की त्वचा पर हल्की मखमली और मैट रंगत होती है। छूने पर यह ज्यादा चिपचिपा या तैलीय नहीं लगता। दूसरी ओर हाइब्रिड या लंबे समय तक स्टोर किए गए जामुनों को आकर्षक दिखाने के लिए उन पर वैक्स या केमिकल का छिड़काव कर दिया जाता है, जिससे वे जरूरत से ज्यादा चमकीले और वैक्सी लगते हैं।
3. स्वाद की परख सबसे पक्की है
यह सबसे भरोसेमंद तरीका है। देसी जामुन मुंह में रखते ही मिठास के साथ हल्का खट्टापन और कसैलापन घुल जाता है, जिससे जीभ और तालू थोड़े कड़क महसूस होते हैं। वहीं हाइब्रिड जामुन में या तो सिर्फ मिठास होती है या फिर वह पानी जैसा बेस्वाद लगता है। उसमें वह पारंपरिक कसैलापन सिरे से गायब रहता है।
4. गूदे और गुठली का अनुपात
जामुन को बीच से काटकर या खाकर देखिए। देसी जामुन में गुठली बड़ी होती है और उसके ऊपर गूदे की परत थोड़ी पतली रहती है। जबकि हाइब्रिड जामुन को इस तरह तैयार किया जाता है कि उसमें गूदा खूब मोटा और ज्यादा हो, और गुठली बेहद छोटी रह जाए।
5. जीभ का रंग और पानी का टेस्ट
देसी जामुन खाने के बाद जीभ पर गहरा जामुनी या बैंगनी रंग चढ़ जाता है, जो कई घंटों तक टिका रहता है। साथ ही अगर आप देसी जामुन को पानी में धोएं तो पानी का रंग नहीं बदलेगा। लेकिन अगर हाइब्रिड जामुन पर कृत्रिम रंग चढ़ाया गया है, तो पानी में डालते ही वह रंग छोड़ने लगेगा।
सेहत के लिए देसी जामुन ही क्यों जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद आचार्यों के अनुसार, जामुन में मौजूद 'जंबोलिन' (Jamboline) तत्व ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है, और यह देसी फल तथा उसकी गुठली में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। हाइब्रिड जामुन में पानी की मात्रा ज्यादा और औषधीय गुण नाममात्र के होते हैं। इसलिए अगली बार बाजार जाएं तो सिर्फ बड़े साइज के झांसे में मत आइए, अपनी सेहत के लिए छोटे पर गुणकारी देसी जामुन को ही चुनिए।













