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उत्तर प्रदेश के गांव की गृहिणी ने हर्बल बागीचे से खड़ा किया राष्ट्रव्यापी आयुर्वेदिक कारोबार, गांव की महिलाओं को मिला रोजगारस्वास्थ्य
9 सित॰ 2026, 5:47 pm (52 मिनट पहले)· 2

उत्तर प्रदेश के गांव की गृहिणी ने हर्बल बागीचे से खड़ा किया राष्ट्रव्यापी आयुर्वेदिक कारोबार, गांव की महिलाओं को मिला रोजगार

गोंडा की कुसुम मौर्य ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर जड़ी-बूटियों का सफल आयुर्वेदिक कारोबार शुरू किया है, जिससे बना जूस अब दिल्ली और मुंबई तक बिक रहा है और स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से उभरी एक मिसाली कहानी अब देश के बड़े महानगरों तक अपनी पहचान बना रही है। गोंडा के वजीरगंज ब्लॉक स्थित रायपुर गांव की रहने वाली कुसुम मौर्य ने अपने घर में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके एक अनूठा उद्यम खड़ा किया है। उनका तैयार किया गया पथरी नाशक आयुर्वेदिक जूस अब सिर्फ गोंडा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी बड़ी मांग दिल्ली, कानपुर, मुंबई और पंजाब जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है।

गृहिणी से सफल उद्यमी बनने का सफर

कारोबार शुरू करने से पहले कुसुम मौर्य एक साधारण गृहिणी के रूप में अपना जीवन बिता रही थीं और घर-परिवार की जिम्मेदारियां संभालती थीं। उनके जीवन में बदलाव तब आया जब वह एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इस समूह के साथ मिलकर काम करने से उन्हें अपनी एक नई पहचान मिली और उन्होंने औषधीय पौधों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने कई प्रकार के आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए, जिनमें से पथरी नाशक जूस को ग्राहकों ने सबसे ज्यादा सराहा और पसंद किया।

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घर के बागीचे से कच्चा माल और निर्माण प्रक्रिया

कुसुम मौर्य के आयुर्वेदिक जूस का मुख्य आधार उनके अपने घर और बागीचे में उगे औषधीय पौधे हैं। जूस बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल वह अपने घरेलू परिसर में लगे पौधों से ही प्राप्त करती हैं। निर्माण की प्रक्रिया बेहद सावधानी और स्वच्छता के साथ पूरी की जाती है। जड़ी-बूटियों को तोड़ने के बाद उन्हें अच्छी तरह साफ किया जाता है और तय मानकों के अनुसार एक निश्चित मात्रा में मिलाकर जूस निकाला जाता है। इस सटीक अनुपात के कारण उत्पाद की गुणवत्ता और प्रभाव बनाए रखने में मदद मिलती है।

उत्पादन लागत, मुनाफा और महिला सशक्तिकरण

इस आयुर्वेदिक कारोबार का आर्थिक पक्ष काफी मजबूत है। कुसुम मौर्य बताती हैं कि जूस की एक बोतल तैयार करने में लगभग 500 से 600 रुपये का खर्चा आता है, जबकि बाजार में इसकी बिक्री करीब 1,000 रुपये प्रति बोतल के हिसाब से होती है। वर्तमान में हर महीने लगभग 100 बोतलों की बिक्री हो जाती है। इस काम में उन्हें अपने परिवार का भरपूर सहयोग मिल रहा है, खासकर उनके पति हर मोड़ पर उनका साथ देते हैं। इसके अलावा, कुसुम ने गांव की लगभग 10 से 12 महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा है, जिससे उन्हें गांव में ही रोजगार का साधन मिल गया है। भविष्य में उनका लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाकर इस जूस को और अधिक लोगों तक पहुंचाने का है।

चिकित्सकीय सलाह और सुरक्षात्मक दिशानिर्देश

यद्यपि देशी और प्राकृतिक उपचारों को लेकर लोगों में आकर्षण रहता है, लेकिन पथरी के इलाज में आयुर्वेदिक जूस के प्रभाव को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इस बात की गंभीरता को समझते हुए कुसुम मौर्य किसी भी व्यक्ति को जूस देने से पहले उनकी मेडिकल जांच रिपोर्ट देखती हैं। स्थिति की समीक्षा करने के बाद ही वह मरीज को सुबह और शाम जूस का सेवन करने का परामर्श देती हैं। वह लोगों को स्पष्ट रूप से सतर्क करती हैं कि हर व्यक्ति के शरीर की तासीर और स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक या देशी उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक की परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।

सवाल-जवाब

कुसुम मौर्य कहां की रहने वाली हैं और वह क्या बनाती हैं?
कुसुम मौर्य उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज ब्लॉक स्थित रायपुर गांव की रहने वाली हैं और वह घर पर जड़ी-बूटियों से पथरी नाशक आयुर्वेदिक जूस बनाती हैं।
इस आयुर्वेदिक जूस की मांग किन-किन शहरों और राज्यों में है?
इस जूस की मांग गोंडा के अलावा दिल्ली, कानपुर, मुंबई और पंजाब तक है।
जूस तैयार करने की लागत और बाजार में बिक्री मूल्य क्या है?
एक बोतल तैयार करने में लगभग 500 से 600 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में इसकी कीमत लगभग 1,000 रुपये है।
कुसुम मौर्य हर महीने कितनी बोतलों की बिक्री करती हैं?
वह हर महीने करीब 100 बोतलों की बिक्री करती हैं।
इस कारोबार से गांव की कितनी महिलाओं को रोजगार मिला है?
इस उद्यम से गांव की लगभग 10 से 12 महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है।
जूस देने से पहले कुसुम मौर्य क्या प्रक्रिया अपनाती हैं?
वह मरीज की मेडिकल जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही जूस देती हैं और सुबह-शाम सेवन करने की सलाह देने के साथ डॉक्टर से परामर्श की ताकीद करती हैं।
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