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सीकर जनाना अस्पताल की विशेष परामर्श और लैक्टेशन थैरेपी से आसान हुआ स्तनपान, एक साल में 2300 से अधिक महिलाओं को मिला लाभस्वास्थ्य
5 अग॰ 2026, 8:43 pm (4 घंटे पहले)· 0

सीकर जनाना अस्पताल की विशेष परामर्श और लैक्टेशन थैरेपी से आसान हुआ स्तनपान, एक साल में 2300 से अधिक महिलाओं को मिला लाभ

सीकर के जनाना अस्पताल में स्थापित विशेष स्तनपान प्रबंधन इकाई से पिछले एक वर्ष के दौरान 2300 से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हुई हैं, जहां विशेषज्ञों की मदद से 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में माताओं की समस्याएं दूर की जा रही हैं।

नवजात बच्चों के समुचित शारीरिक विकास, मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर स्वास्थ्य के लिए मां का दूध सबसे महत्वपूर्ण पोषक आहार माना जाता है। हालांकि, प्रसव के तुरंत बाद अनेक महिलाओं को दूध न बनने, बेहद कम आपूर्ति होने अथवा शिशु द्वारा सही ढंग से स्तनपान न कर पाने जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन व्यावहारिक कठिनाइयों का स्थायी समाधान करने के उद्देश्य से राजस्थान स्थित सीकर के जनाना अस्पताल में एक समर्पित स्तनपान प्रबंधन एवं परामर्श केंद्र संचालित किया जा रहा है। पिछले 12 महीनों के दौरान इस विशेष पहल ने नवजात शिशुओं और उनकी माताओं के लिए एक बड़ी राहत बनकर सफलता का नया अध्याय लिखा है।

प्रतिदिन 15 से ज्यादा महिलाएं पहुंच रहीं परामर्श केंद्र

जनाना अस्पताल की इस विशेष इकाई की ओपीडी में रोजाना औसतन 15 से अधिक महिलाएं अपनी समस्याओं के इलाज और सलाह के लिए आ रही हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं प्रसव के बाद प्राकृतिक रूप से पर्याप्त दूध न बनने या शिशु के स्तन से सही संपर्क न बना पाने की समस्या लेकर पहुंचती हैं। अस्पताल परिसर के विभिन्न वार्डों में भर्ती प्रसूताओं में से स्तनपान संबंधी जटिलताओं से जूझ रही महिलाओं को इस केंद्र में भेजा जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम सबसे पहले प्रत्येक महिला की स्थिति का गहन विश्लेषण करती है और समस्या के मूल कारणों को समझकर उसी के अनुसार परामर्श प्रक्रिया शुरू करती है। इसके बाद विभिन्न थैरेपी पद्धतियों के माध्यम से मां और बच्चे दोनों की परेशानी को दूर करने का हरसंभव प्रयास किया जाता है।

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2300 से अधिक माताओं को मिला प्रत्यक्ष लाभ

लगभग एक वर्ष पूर्व स्थापित की गई इस स्तनपान प्रबंधन इकाई ने अपनी प्रभावकारिता से क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। अपनी शुरुआत से लेकर अब तक यह केंद्र 2300 से ज्यादा महिलाओं को सफलता पूर्वक सेवाएं प्रदान कर चुका है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सकारात्मक परिणामों और बढ़ती सामाजिक जागरूकता के चलते अब बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं आगे आकर इस सुविधा का लाभ उठा रही हैं। यहां दी जाने वाली विशेष लैक्टेशन थैरेपी के जरिए महिलाओं के शरीर में दूध बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया को उत्तेजित और सक्रिय किया जाता है।

शारीरिक उपचार के साथ-साथ महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। प्रसव के बाद तनाव या घबराहट के कारण भी दूध के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है, इसलिए विशेषज्ञों द्वारा माताओं की काउंसलिंग करके उन्हें मानसिक रूप से तनावमुक्त किया जाता है। नियमित निगरानी प्रणाली के तहत विशेषज्ञ चिकित्सक महिलाओं की रिकवरी रिपोर्ट और स्वास्थ्य प्रगति पर लगातार नजर रखते हैं।

विशेषज्ञों की देखरेख में ग्रिपिंग और फीडिंग थैरेपी

शिशुओं में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं के बारे में विस्तार से बताते हुए स्तनपान इकाई की काउंसलर मनीषा पूनिया ने जानकारी दी कि कई बार समय से पूर्व जन्म लेने, शारीरिक रूप से कमजोर होने या सही तकनीक की जानकारी न होने के कारण नवजात बच्चे स्तन को सही तरीके से पकड़ने में असमर्थ रहते हैं। ऐसी स्थिति में इस केंद्र पर विशेष ग्रिपिंग और फीडिंग थैरेपी दी जाती है। प्रशिक्षण प्राप्त विशेषज्ञ स्टाफ बच्चों को धीरे-धीरे सही तरीके से स्तनपान कराने का अभ्यास कराता है, जिससे शिशु आसानी से और पर्याप्त मात्रा में दूध पीने में सक्षम हो जाते हैं।

इस केंद्र में उपचार के साथ-साथ माताओं को स्तनपान की सही तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाता है। इसमें सही पोजिशनिंग, लैचिंग का तरीका और स्तनपान के दौरान ध्यान रखी जाने वाली आवश्यक सावधानियों की विस्तृत जानकारी शामिल है। इन उपायों से स्तनपान के समय होने वाली शारीरिक असहजता और दर्द में काफी कमी आती है, साथ ही शिशु को पूरा पोषण मिलने से उसका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।

निजी अस्पतालों की मरीज भी ले रही हैं निशुल्क परामर्श

जनाना अस्पताल की इस अनूठी पहल की सफलता की गूंज अब निजी चिकित्सा संस्थानों तक भी पहुंच चुकी है। वर्तमान में गैर-सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाएं भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जनाना अस्पताल के इस केंद्र में पहुंच रही हैं। परामर्श के लिए आने वाली कई माताओं ने साझा किया कि निजी अस्पतालों में प्रसव के बाद स्तनपान से जुड़ी समस्याओं पर न तो पर्याप्त काउंसलिंग दी जाती है और न ही इस विषय पर उचित मार्गदर्शन मिलता है।

प्राइवेट अस्पतालों की इस अनदेखी के विपरीत, सीकर के जनाना अस्पताल में विशेषज्ञ टीम महिलाओं की हर समस्या को संवेदनशीलता से सुनती है और उसका वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करती है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इस समर्पित काउंसलिंग और विशेष थैरेपी मॉडल की बदौलत 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में महिलाएं अपने नवजात बच्चों को सफलतापूर्वक स्तनपान कराने में सक्षम हो रही हैं।

सवाल-जवाब

सीकर के जनाना अस्पताल में स्तनपान प्रबंधन इकाई कब शुरू हुई थी?
जनाना अस्पताल में यह विशेष स्तनपान प्रबंधन एवं काउंसलिंग इकाई करीब एक साल पहले शुरू की गई थी।
इस स्तनपान इकाई से अब तक कितनी माताओं को लाभ मिला है?
इकाई की शुरुआत से लेकर अब तक 2300 से अधिक माताओं को परामर्श और इलाज का प्रत्यक्ष लाभ मिल चुका है।
जनाना अस्पताल की स्तनपान इकाई में रोजाना कितने मरीज आते हैं?
इस विशेष इकाई में प्रतिदिन औसतन 15 से अधिक महिलाएं परामर्श और इलाज कराने पहुंचती हैं।
नवजात बच्चों में स्तनपान न कर पाने की क्या मुख्य वजहें होती हैं?
काउंसलर मनीषा पूनिया के अनुसार, समय से पहले जन्म लेने, शारीरिक कमजोरी या सही तकनीक की जानकारी न होने से बच्चे स्तन को ठीक से नहीं पकड़ पाते।
क्या निजी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाएं भी इस केंद्र का लाभ ले सकती हैं?
हां, निजी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाएं भी स्तनपान संबंधी समस्याओं और काउंसलिंग के लिए जनाना अस्पताल आ रही हैं।
जनाना अस्पताल में काउंसलिंग और थैरेपी से सफलता की दर कितनी है?
अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, विशेष परामर्श और थैरेपी के माध्यम से 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में माताओं की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
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