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उत्तर प्रदेश के 18 जिलों के मरीजों को बड़ी राहत, कानपुर जीएसवीएसएस पीजीआई को मिला 5 साल का किडनी ट्रांसप्लांट लाइसेंसस्वास्थ्य
8 अग॰ 2026, 12:01 pm (81 दिन पहले)· 0

उत्तर प्रदेश के 18 जिलों के मरीजों को बड़ी राहत, कानपुर जीएसवीएसएस पीजीआई को मिला 5 साल का किडनी ट्रांसप्लांट लाइसेंस

कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशिलिटी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट में जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू होगी। शासन से 5 साल का लाइसेंस मिलने के बाद कानपुर और आसपास के 18 जिलों के गंभीर मरीजों को अब इलाज के लिए लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।

मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। कानपुर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशिलिटी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट (जीएसवीएसएस पीजीआई) को किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने के लिए शासन से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक नेहा शर्मा की ओर से इस संदर्भ में मेडिकल कॉलेज प्रशासन को औपचारिक पत्र जारी कर दिया गया है। इस निर्णय से कानपुर सहित आसपास के 18 जिलों में रहने वाले गुर्दा रोगियों को अपने ही शहर के पास उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

शासन की ओर से 5 साल का आधिकारिक लाइसेंस मंजूर

जीएसवीएसएस पीजीआई को राज्य सरकार की तरफ से किडनी ट्रांसप्लांट कार्य संचालित करने के लिए 5 साल की अवधि का लाइसेंस प्रदान किया गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने इस प्रशासनिक स्वीकृति की पुष्टि की है। उन्होंने जानकारी दी कि अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण सेवा प्रारंभ करने की योजना पिछले वर्ष से ही प्रगति पर थी। इसके लिए राज्य शासन को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया था। अब शासन स्तर से अनुमति प्राप्त होने के साथ ही आगे की चिकित्सीय व प्रशासनिक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है ताकि मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा सके।

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कानपुर और आसपास के 18 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

अब तक उत्तर प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में किडनी ट्रांसप्लांट की मुख्य और विश्वसनीय सुविधा राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) तक ही सीमित थी। कानपुर और पड़ोसी क्षेत्रों में इस सेवा का अभाव होने के कारण गंभीर रोगियों को मजबूरी में लखनऊ अथवा अन्य बड़े महानगरों का रुख करना पड़ता था। जीएसवीएसएस पीजीआई में यह सुविधा चालू होने से कानपुर मंडल व समीपवर्ती 18 जिलों के निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर ट्रांसप्लांट उपलब्ध होने से मरीजों और उनके परिजनों का यात्रा में लगने वाला कीमती समय बचेगा और परिवहन व्यय में भारी कमी आएगी। इसके अतिरिक्त, सरकारी दरों पर इलाज मिलने से निजी अस्पतालों की तुलना में मरीजों पर आर्थिक बोझ बहुत कम पड़ेगा।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि जीएसवीएसएस पीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा का शुभारंभ होना कानपुर के स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक ऐतिहासिक सफलता है। इस व्यवस्था से गुर्दे की गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपने ही क्षेत्र में समय पर उन्नत और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।

एसजीपीजीआई लखनऊ की विशेषज्ञ टीम ने किया था स्थल निरीक्षण

अस्पताल में व्यवस्थाओं की तैयारियों के संबंध में जीएसवीएसएस पीजीआई के प्रभारी डॉ. मनीष सिंह ने विस्तृत ब्यौरा साझा किया। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में एसजीपीजीआई लखनऊ के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक उच्चस्तरीय टीम ने संस्थान का विस्तृत भौतिक निरीक्षण किया था। उस दौरान निरीक्षण दल ने गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक सभी चिकित्सीय व्यवस्थाओं का गहराई से आकलन किया। इसमें विशेष ऑपरेशन थिएटर, डोनर रूम, डायलिसिस यूनिट, आइसोलेशन वार्ड तथा अन्य संबद्ध कक्षों की स्वच्छता और मानक सुविधाओं की जांच शामिल थी। निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल की मूलभूत संरचना और संसाधनों पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया था, जिसके बाद शासन स्तर पर 5 वर्षीय लाइसेंस की प्रक्रिया संपन्न हुई।

एलएलआर अस्पताल की ओपीडी में हर महीने आते हैं 20 से 25 मरीज

अस्पताल में प्रत्यारोपण की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. युवराज गुलाटी ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि एलएलआर अस्पताल की ओपीडी में हर महीने औसतन 20 से 25 ऐसे नए मरीज पहुंचते हैं जिन्हें गुर्दा प्रत्यारोपण की तत्काल या भावी आवश्यकता होती है। स्थानीय स्तर पर ट्रांसप्लांट की सुविधा न होने की वजह से इन रोगियों को लंबे समय तक दवाओं और नियमित डायलिसिस के सहारे जीवन व्यतीत करना पड़ता था या फिर दूसरे शहरों के चक्कर काटने पड़ते थे। जीएसवीएसएस पीजीआई में सेवा आरंभ होने से इन गंभीर मरीजों को समय पर अंग प्रत्यारोपण की सुविधा मिलेगी और उन्हें इलाज के लिए दूर जाने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।

क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण में मील का पत्थर

कानपुर के जीएसवीएसएस पीजीआई में 5 साल के लाइसेंस के साथ किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने की पहल को संपूर्ण क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक दूरगामी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह सुविधा न केवल गंभीर मरीजों के जीवन की रक्षा करेगी बल्कि उत्तर प्रदेश के चिकित्सीय बुनियादी ढांचे को भी नया बल प्रदान करेगी।

सवाल-जवाब

कानपुर के किस अस्पताल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस मिला है?
गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशिलिटी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट (जीएसवीएसएस पीजीआई) को लाइसेंस मिला है।
जीएसवीएसएस पीजीआई को कितने साल के लिए लाइसेंस जारी किया गया है?
शासन द्वारा जीएसवीएसएस पीजीआई को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 5 साल का लाइसेंस प्रदान किया गया है।
इस नई सुविधा से उत्तर प्रदेश के कितने जिलों को लाभ पहुंचेगा?
कानपुर समेत आसपास के कुल 18 जिलों के मरीजों को इस सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा।
कानपुर में सुविधा शुरू होने से पहले मरीजों को कहां जाना पड़ता था?
पहले मरीजों को मुख्य रूप से लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई या फिर अन्य बड़े शहरों व निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था।
अस्पताल का निरीक्षण किस टीम ने और कब किया था?
जनवरी 2026 में एसजीपीजीआई लखनऊ की डॉक्टरों की टीम ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर, डोनर रूम और आइसोलेशन वार्ड का निरीक्षण किया था।
एलएलआर अस्पताल की ओपीडी में हर महीने कितने मरीज ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले आते हैं?
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. युवराज गुलाटी के अनुसार ओपीडी में हर महीने लगभग 20 से 25 मरीज आते हैं जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है।
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